वर्ल्ड टूरिज्म डे 2025 पर कार्यशाला महात्मा ज्योतिबा फुले रोहिलखंड विश्वविद्यालय में

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बरेली। महात्मा ज्योतिबा फुले रोहिलखंड विश्वविद्यालय, बरेली के होटल मैनेजमेंट एंड कैटरिंग टेक्नोलॉजी विभाग द्वारा 27 सितम्बर को विश्व पर्यटन दिवस के उपलक्ष्य में “Workshop on Tourism and Sustainable Transformation” का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम की शुरुआत
कार्यक्रम का शुभारंभ सरस्वती वंदना एवं दीप प्रज्वलन से हुआ। इसके पश्चात् विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. के. पी. सिंह की अध्यक्षता में मुख्य अतिथि रविन्द्र कुमार (उप निदेशक पर्यटन, बरेली/मुरादाबाद डिवीजन) तथा विशिष्ट अतिथि रतिन्द्र पाण्डेय (वरिष्ठ प्रबंधक-पर्यटन, पर्यटन विभाग, भारत सरकार), आर. के. सिंह (पर्यटन अनुसंधान अधिकारी, बरेली/मुरादाबाद डिवीजन, पर्यटन विभाग, उत्तर प्रदेश सरकार), मनीष सिंह (पर्यटन अधिकारी) तथा आशीष जौहरी (मीडिया प्रभारी, सहारा समय) का स्वागत किया गया।
स्वागत एवं प्रेरक विचार
विभागाध्यक्ष प्रो. (डा.) तूलिका सक्सेना एवं डा. हेमा वर्मा ने सभी अतिथियों का अभिनंदन करते हुए उन्हें तुलसी का पौधा भेंट किया। मुख्य अतिथि रविन्द्र कुमार ने छात्रों को अपने व्यापक अनुभव से प्रेरित करते हुए कहा कि कोई भी कार्य छोटा नहीं होता। उन्होंने छात्रों को पर्यटन क्लब का सदस्य बनने के लिए आमंत्रित किया और मेहनत से आगे बढ़ने की प्रेरणा दी।
विशिष्ट अतिथि रतिन्द्र पाण्डेय, जो स्वयं IHM लखनऊ के स्नातक हैं, ने विद्यार्थियों को ईको-टूरिज्म और सस्टेनेबिलिटी के विभिन्न पहलुओं के बारे में मार्गदर्शन दिया।
छात्रों की सहभागिता
छात्र-छात्राओं छाया पाल, ज़ैना खान, हर्षिता वर्मा, रेहान आदि ने संयुक्त राष्ट्र विश्व पर्यटन संगठन (UNWTO) की थीम “Tourism and Sustainable Transformation” पर अपने विचार प्रस्तुत किए। इस अवसर पर उन्होंने सस्टेनेबल टूरिज्म पर चार्ट प्रदर्शनी लगाई और एक क्विज़ प्रतियोगिता का भी आयोजन किया। वक्ताओं ने कहा कि सतत पर्यटन का अर्थ है विकास और संरक्षण में संतुलन स्थापित करना तथा पर्यावरण-अनुकूल तकनीक, नवीकरणीय ऊर्जा, प्लास्टिक के न्यूनतम उपयोग और समुदाय आधारित पर्यटन को बढ़ावा देना।
पर्यटन और अर्थव्यवस्था
वक्ताओं ने बताया कि वर्ष 2024 में पर्यटन ने भारत की जीडीपी में लगभग 6.6% (₹21 ट्रिलियन) का योगदान किया और 4.6 करोड़ नौकरियों का सृजन किया। 2025 में यह संख्या 5 करोड़ से अधिक होने की संभावना है और वर्ष 2035 तक पर्यटन क्षेत्र से 9–10 करोड़ रोजगार सृजित होने की उम्मीद है।
पर्यटन विभाग से आए अतिथिगणों ने विभाग को उत्तर प्रदेश पर्यटन द्वारा प्रकाशित विभिन्न पुस्तकें भेंट कीं। इनमें प्रमुख रूप से “History of Bundelkhand: History Beckons Here”, “The Heritage Arc”, “The Buddhist Circuit”, “Krishna Vraj Circuit of Uttar Pradesh” सम्मिलित थीं। इसके साथ ही “Perfume Tourism, Kannauj”, “Lucknow Heritage Walk – Chowk” एवं “Mirzapur & Sonbhadra: A Tourist Guide to UP Hidden Gems”, “Varanasi”, “Prayagraj”, “Vrindavan” आदि पर आधारित साहित्य भी प्रदान किया गया। इस अवसर पर डॉ. हेमा वर्मा ने विभाग की ओर से पर्यटन विभाग के प्रति हार्दिक आभार प्रकट किया।
योगदान और समापन
इस अवसर पर विभाग के शिक्षकगण विजय कुमार अग्रवाल, मुकेश कुमार, सचिन वर्मा, पारस संतोषी, विशाल गौतम ने अपने विचार साझा किए। साथ ही तपन वर्मा, सुनील कुमार एवं विश्वविद्यालय के अन्य प्राध्यापकगण भी उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का संचालन पारस संतोषी ने किया तथा धन्यवाद ज्ञापन डा. हेमा वर्मा द्वारा प्रस्तुत किया गया। समापन पर सभी अतिथियों का आभार प्रकट किया गया।

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