बदायूं में किन्नरों का तीन दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन हुआ, भव्य शोभायात्रा निकाली
बदायूं | तीन दिनों तक रंगों, रौनक और सांस्कृतिक विविधता से सराबोर रहा किन्नर समाज का राष्ट्रीय सम्मेलन। देश के कोने-कोने से आए हजारों किन्नरों ने इस ऐतिहासिक आयोजन में भाग लेकर न केवल अपनी परंपराओं और संस्कृति का प्रदर्शन किया, बल्कि समाज और राष्ट्र की प्रगति एवं शांति के लिए सामूहिक संकल्प भी लिया।देशभर से जुटे किन्नरों ने दिया एकता का संदेश सम्मेलन में उत्तर प्रदेश, दिल्ली, बिहार, झारखंड, महाराष्ट्र, राजस्थान, मध्यप्रदेश, पंजाब, हरियाणा और बंगाल सहित लगभग सभी राज्यों से किन्नर प्रतिनिधि पहुँचे। आयोजन समिति के अनुसार, इस सम्मेलन में बड़ी संख्या में किन्नरों ने भागीदारी की। टीना किन्नर, जो बदायूं जनपद की जानी-मानी समाजसेवी भी हैं, ने सम्मेलन की अगुवाई की। उनका कहना था कि “किन्नर समाज भी देश की प्रगति में बराबरी का हकदार है। यह सम्मेलन केवल हमारी परंपरा को संजोने का माध्यम नहीं, बल्कि हमारे हक़, अधिकार और सामाजिक पहचान की एक आवाज़ है।”तीन दिवसीय सम्मेलन में पारित हुए कई महत्वपूर्ण प्रस्ताव सम्मेलन में देशभर के किन्नरों ने मिलकर कई अहम प्रस्ताव पारित किए। इनमें से कुछ प्रमुख बिंदु इस प्रकार रहे– किन्नर समाज को सामाजिक और आर्थिक रूप से मुख्यधारा में शामिल करने के लिए सरकार से ठोस नीतियाँ बनाने की मांग। शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं में किन्नरों के लिए विशेष प्रावधान। सरकारी नौकरियों और राजनीतिक हिस्सेदारी में किन्नरों के लिए आरक्षण की मांग। किन्नरों के साथ हो रहे भेदभाव और हिंसा की घटनाओं को रोकने के लिए सख्त कानून लागू करने की अपील। किन्नर समाज को उद्यमिता और स्वरोजगार से जोड़ने के लिए विशेष योजनाओं की जरूरत। इन प्रस्तावों पर सभी किन्नरों ने सहमति जताई और केंद्र व राज्य सरकार से इन पर जल्द अमल करने की अपील की। शोभायात्रा बनी आकर्षण का केंद्र सम्मेलन के अंतिम दिन किन्नर समाज ने बदायूं नगर में भव्य शोभायात्रा निकाली।

यह शोभायात्रा मथुरिया चौराहे से प्रारंभ होकर नेहरू चौक, खैराती चौक और बड़ा बाजार होते हुए पथिक चौक पर समाप्त हुई। घोड़ों की बग्गियों पर सवार किन्नर, रंग-बिरंगे परिधानों में सजे-धजे, नाचते-गाते और ढोल-नगाड़ों की थाप पर थिरकते नज़र आए। जगह-जगह दुकानदारों और नागरिकों ने फूल बरसाकर उनका स्वागत किया। इस दौरान बदायूं की गलियाँ मानो उत्सव में बदल गईं। एक दर्शक ने कहा, “किन्नरों को अक्सर समाज में हाशिये पर देखा जाता है, लेकिन आज उनकी एकता और भव्यता ने पूरे शहर को मंत्रमुग्ध कर दिया।”—सुरक्षा व्यवस्था रही कड़ी शोभायात्रा के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए पुलिस प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद रहा। मुख्य मार्गों पर पुलिस बल की तैनाती की गई, ताकि भीड़ नियंत्रण और यातायात व्यवस्था सुचारू बनी रहे। किसी भी प्रकार की अव्यवस्था न हो, इसके लिए आयोजकों ने भी स्वयंसेवकों की टीम बनाई, जिन्होंने जगह-जगह लोगों को नियंत्रित किया और शोभायात्रा को सुचारू रूप से आगे बढ़ाया किन्नर समाज की एकजुटता बनी मिसाल सम्मेलन के दौरान यह साफ झलकता रहा कि किन्नर समाज अब केवल अपनी पारंपरिक परंपराओं तक सीमित नहीं रहना चाहता, बल्कि शिक्षा, रोजगार, राजनीति और सामाजिक सम्मान की दिशा में गंभीरता से कदम बढ़ा रहा है। देशभर से आए प्रतिनिधियों ने एक स्वर में कहा कि जब तक समाज हमें बराबरी का दर्जा नहीं देगा, तब तक देश की प्रगति अधूरी रहेगी। किन्नरों ने यह भी संदेश दिया कि वे किसी से अलग नहीं हैं, बल्कि भारतीय संस्कृति और समाज का अभिन्न हिस्सा हैं। टीना किन्नर की भूमिका रही अहम बदायूं निवासी टीना किन्नर ने इस सम्मेलन की अगुवाई कर यह साबित किया कि किन्नर समाज की महिलाएँ भी नेतृत्व क्षमता में किसी से कम नहीं। उन्होंने बताया कि बदायूं में पहली बार इस स्तर का राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया गया है, जिसमें पूरे देश से किन्नरों का आना गर्व की बात है। टीना ने कहा, “हमारा उद्देश्य केवल उत्सव मनाना नहीं, बल्कि सरकार और समाज को यह बताना है कि हमें भी बराबरी का हक चाहिए। हमें दया नहीं, अधिकार चाहिए।” भव्य आयोजन से गूँजा बदायूं तीन दिनों तक बदायूं नगर मानो किन्नरों की ऊर्जा और रंगों से सराबोर रहा। सम्मेलन स्थल पर रोजाना सांस्कृतिक कार्यक्रम हुए, जहाँ पारंपरिक नृत्य, गीत और कविताओं ने लोगों का मन मोह लिया। कई किन्नरों ने मंच से अपने जीवन के संघर्षों की कहानियाँ साझा कीं, जिससे श्रोताओं की आँखें नम हो गईं। वहीं, कुछ ने प्रेरक अनुभव सुनाकर समाज में बदलाव की राह दिखाने का प्रयास किया। भविष्य की दिशा सम्मेलन में यह तय किया गया कि किन्नर समाज की समस्याओं और मांगों को लेकर एक राष्ट्रीय ज्ञापन तैयार कर प्रधानमंत्री और संबंधित मंत्रालयों को भेजा जाएगा। साथ ही हर राज्य में इस तरह के सम्मेलन आयोजित करने की योजना बनाई गई, ताकि किन्नरों की आवाज़ और बुलंद हो सके। बदायूं में आयोजित तीन दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन किन्नर समाज के लिए ऐतिहासिक साबित हुआ। हजारों किन्नरों की मौजूदगी, उनकी एकजुटता और भव्य शोभायात्रा ने यह संदेश दिया कि किन्नर अब केवल पारंपरिक ताली और नाच-गाने तक सीमित नहीं, बल्कि वे अपने हक और सम्मान के लिए संघर्षरत हैं। यह आयोजन न केवल बदायूं के इतिहास में दर्ज हो गया, बल्कि पूरे देश को यह सोचने पर मजबूर कर गया कि समानता और अधिकार की लड़ाई में किन्नर समाज भी अब पीछे नहीं रहने वाला।













































































