नए-आत्मनिर्भर भारत के लिए स्वदेशी विकल्प, रोजगार के अवसर बढ़ाने होंगे; संघ की आर्थिक शाखाओं का निष्कर्ष

नई दिल्ली टैरिफ जंग के कारण दुनिया में छाई आर्थिक अनिश्चितता के बीच संघ की छह प्रमुख आर्थिक शाखाओं की बैठक में नया और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण के लिए स्वदेशी को महत्व देने, नौकरी की जगह रोजगार के अवसर बढ़ाने पर जोर दिया गया।संघ प्रमुख मोहन भागवत की उपस्थिति में इस दो दिवसीय बैठक में देश से जुड़े आर्थिक और सामाजिक मुद्दों पर जोर दिया गया। स्वदेशी आधारित अर्थव्यवस्था के निर्माण के लिए श्रम कानूनों में पर्याप्त सुधार और निवेश की जरूरतों को पूरा करने के लिए सामाजिक न्याय के साथ संतुलन बैठाने पर सहमति बनी। बैठक में सरकार द्वारा ऑनलाइन गेमिंग एप्स पर प्रतिबंध लगाने और इसे दंडनीय अपराध बनाने के केंद्र सरकार के फैसले की सराहना की गई।समय-समय पर होने वाली संघ की आर्थिक शाखाओं की बैठक में स्वदेशी जागरण मंच (एसजेएम), भारतीय मजदूर संघ (बीएमएस) और लघु उद्योग भारती (एलयूबी) सहित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े छह आर्थिक संगठनों ने हिस्सा लिया। बैठक में आर्थिक नीतियां तय करने और श्रम कानूनों में जरूरी सुधार में स्वदेशी की अवधारणा को अपनाने पर जोर दिया गया। इस दौरान इन संगठनों ने सतत विकास, आत्मनिर्भरता, निष्पक्ष श्रम प्रथाओं, पर्यावरण संतुलन और युवाओं को हानिकारक डिजिटल प्रभाव से बचाने जैसे मुद्दोंं पर अपनी राय रखी।आने वाला समय भारत का
संघ के सूत्रों ने बताया कि बैठक में संघ प्रमुख ने कहा कि विभिन्न समस्याओं से जूझ रही दुनिया के लिए भारत आशा की किरण है। हमारे पास स्वदेशी आधारित विकास मॉडल है। युद्धों और बाह्य सुख के लिए परस्पर संघर्षों में उलझी दुनिया को आंतरिक सुख उपलब्ध कराने का हजारों साल का पुराना मॉडल है। आने वाला समय भारत का है।
आत्मनिर्भर भारत के निर्माण के लिए जरूरत स्वदेशी आधारित ऐसी अर्थव्यवस्था का निर्माण करना होगा, जिसमें नौकरी की जगह स्वरोजगार को प्राथमिकता मिले। हमारे गांव कैसे आत्मनिर्भर बने, इसकी रूपरेखा तैयार करनी होगी। श्रम कानूनों में भी ऐसे जरूरी सुधार करने होंगे, जिससे स्वदेशी आधारित विकास मॉडल को वरीयता मिले।
ऑनलाइन गेमिंग पर रोक का स्वागत
बैठक में ऑनलाइन सट्टा और जुआ को बढ़ावा देने वाले ऑनलाइन गेमिंग पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने और इसे दंडनीय अपराध बनाने केलिए सरकार द्वारा पारित विधेयक का स्वागत किया गया। बैठक में कहा गया कि कानून के अभाव में ऑन लाइन सट्टेबाजी और जुआ से सामाजिक और आर्थिक तानाबाना बिगड़ रहा था। गरीब, मध्य वर्ग से जुड़े हजारोंं परिवार इसके जाल में उलझ कर तबाह हो रहे थे।
आत्मनिर्भरता-उद्यमिता भारत के भविष्य की आधारशिला
स्वदेशी जागरण मंच की ओर से दी गई प्रस्तुति मेंं आत्मनिर्भरता और उद्यमिता को भारत के भविष्य के विकास की आधारशिला बताया गया। कई संगठनों ने लघु-स्तरीय उद्यमों, स्टार्ट-अप्स और स्व-रोजगार से जुड़े लोगों के लिए नीतियों में मजबूत समर्थन प्रणाली की मांग की। प्रस्तुति में कहा गया कि सभी वर्गों को आर्थिक तरक्की का लाभ तभी मिल सकता है जब युवा पारंपरिक नौकरी की जगह रोजगार के अवसर पैदा करने में सक्षम हों।
हिंदू-मुस्लिम समाज में करीबी बढ़ाने के लिए तैयार होगा रोडमैप, मजबूत करेंगे भारतीयता की पहचान
शताब्दी वर्ष पूरा होने के बाद राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ हिंदू-मुस्लिम समाज के बीच करीबी बढ़ाने और भारतीयता की पहचान को मजबूत करने की मुहिम में जुटेगा। गुरुवार को संघ प्रमुख मोहन भागवत की मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के पदाधिकारियों के साथ अहम बैठक में इसका तानाबाना बुना गया। इस दौरान 26 से 28 अगस्त के बीच विज्ञान भवन में आयोजित संघ प्रमुख की व्याख्यानमाला में किन मुस्लिम बुद्धिजीवियों को बुलाया जाए, इस पर भी चर्चा हुई।
हरियाणा भवन में करीब चार घंटे की बैठक में संघ प्रमुख ने भी अपनी बात रखी। सूत्रों के मुताबिक उन्होंने कहा कि अब समाज में घट रही घटनाओं के इतर सामाजिक सद्भाव के साथ बड़ा लक्ष्य तय करने की है। बड़ा लक्ष्य धार्मिक पहचान की जगह देश की पहचान भारतीयता से हो। सभी धर्मों में भारतीयता की पहचान की भूख बढ़े। मुस्लिम समाज उन घटनाओं पर खुल कर प्रतिक्रिया दे, जिसमें उसके समाज के व्यक्ति की लिप्तता है।
संवाद के बाद बड़ी मुहिम
संघ सूत्रों का कहना है कि सामाजिक सद्भाव के लिए शताब्दी वर्ष तक संघ का जोर संवाद पर रहेगा। इसके बाद इसके लिए संघ नई मुहिम शुरू करेगा। स्वयं संघ प्रमुख ने पिछले दिनों ऑल इंडिया इमाम आर्गनाइजेशन के मुखिया उमेर इलियासी के नेतृत्व में मुस्लिम धर्मगुरुओंं के साथ संवाद किया था। इसके बाद राजधानी के विज्ञान भवन के साथ ही देश के चुनिंदा चार महानगरों में व्याख्यानमाला के जरिए संघ प्रमुख का सभी वर्गों के साथ सीधा संवाद करने की योजना बनाई गई।
दोनों समुदायों में करीबी बढ़ाने के तरीके पर भी हुई चर्चा
बैठक में दोनों समुदायों के बीच करीबी बढ़ाने और भारतीयता की पहचान को मजबूत बनाने के उपायों पर चर्चा की गई। एक दूसरे के सामाजिक तानेबाने को जानने-समझने की दिशा में किस प्रकार प्रयास किया जाए, इस पर भी चर्चा हुई। बैठक में मंच के मुखिया इंद्रेश कुमार सहित संगठन के 40 पदाधिकारी मौजूद थे।