नोएडा: सीवेज टैंक में गिरे दो श्रमिकों की मौत, ठेकेदार गिरफ्तार

सुरक्षा उपकरण न मिलने का आरोप, परिवार ने प्राधिकरण पर लापरवाही का ठीकरा फोड़ा
नोएडा। सेक्टर-115 स्थित सीवेज पंपिंग स्टेशन में शनिवार को बड़ा हादसा हो गया। सीवेज टैंक की सफाई कर रहे दो श्रमिक जहरीली गैस की चपेट में आकर बेहोश हो गए और टैंक में गिरने से उनकी मौत हो गई। मृतकों की पहचान खुशाल (24) और विकास (26) के रूप में हुई है। दोनों मूल रूप से अलीगढ़ के मऊआखेड़ा गांव के रहने वाले थे।
पीड़ित परिजनों का आरोप है कि ठेकेदारों ने श्रमिकों को कोई सुरक्षा उपकरण नहीं दिया था। घटना के बाद पुलिस ने ठेकेदार पुष्पेंद्र कुमार सिंह (निवासी सेक्टर-41) और अजीत (निवासी लडपुरा छतारी, बुलंदशहर) को गिरफ्तार कर लिया है। यह पंपिंग स्टेशन नोएडा प्राधिकरण के अधीन है और जल विभाग ने इसका काम ठेकेदारों को सौंपा हुआ था।
परिवार का आरोप: सुरक्षा उपकरण नहीं दिए गए
मृतक खुशाल के भाई बृजेश कुमार ने थाने में शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने बताया कि शनिवार को ठेकेदारों के कहने पर खुशाल और विकास सीवर की सफाई करने गए थे। कुछ समय बाद फोन पर सूचना मिली कि दोनों की सीवर में डूबने से मौत हो गई है। बृजेश का कहना है कि ठेकेदारों की लापरवाही और सुरक्षा उपकरण न मिलने के कारण यह हादसा हुआ। पुलिस ने पंचनामा कर शव परिजनों को सौंप दिया।
प्राधिकरण के दावे, परिवार का खंडन
जल विभाग के जीएम आरपी सिंह ने दावा किया कि सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराए गए थे और मानकों का पालन हुआ था। उन्होंने बताया कि मृतकों के परिवारों को 6-6 लाख रुपये का मुआवजा, अंतिम संस्कार हेतु 50-50 हजार रुपये और एक मृतक की पत्नी को संविदा नौकरी देने की व्यवस्था की गई है। हालांकि मृतकों के परिवारों ने इन दावों को झूठा करार दिया है।
हादसे से उजड़े दो परिवार
खुशाल और विकास दोनों विवाहित थे। खुशाल की दो बेटियां हैं और पत्नी सात महीने की गर्भवती है। हादसे से दोनों परिवारों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।
सीईओ ने मांगी रिपोर्ट
नोएडा प्राधिकरण के सीईओ डॉ. लोकेश एम ने कहा कि स्पष्ट निर्देश हैं कि बिना सुरक्षा उपकरणों के किसी भी श्रमिक से काम नहीं कराया जाए। हादसे की जांच बैठा दी गई है और जल विभाग के जीएम से विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई है।
पहले भी हो चुके हैं हादसे
नोएडा प्राधिकरण की परियोजनाओं में इससे पहले भी लापरवाही के कारण हादसे हो चुके हैं। 20 सितंबर 2022 को सेक्टर-21 में नाला निर्माण के दौरान बाउंड्रीवॉल ढहने से 4 मजदूरों की मौत हुई थी। मई 2024 में सेक्टर-26 में निजी सीवर सफाई के दौरान भी दो श्रमिकों की मौत हो गई थी। इन घटनाओं पर भी राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी आयोग ने गंभीरता दिखाई थी।