बाबा इंटरनेशनल स्कूल में हुई दो दिवसीय शतरंज प्रतियोगिता,बच्चों ने शानदार प्रदर्शन किया

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बिल्सी। नगर के बाबा इन्टरनेशनल स्कूल में दो दिवसीय शतरंज प्रतियोगिता का आयोजन किया गया जिसमे कक्षा 6 से 12 तक के विद्यार्थियों ने प्रतिभाग किया। प्रतियोगिता को तीन ग्रुप में विभाजित किया गया था। जूनियर ग्रुप सब जूनियर ग्रुप और सीनियर ग्रुप। प्रतियोगिता का शुभारम्भ डायरेक्टर अनुज वार्ष्णेय, विद्यालय प्रधानाचार्या रूपा माहेश्वरी ने किया। इस प्रतियोगिता में विद्यालय के चारो सदनों भगत हाउस, आजाद हाउस, तिलक हाउस व विवेकानंद हाउस के 247 विद्यार्थियों ने भाग लिया। विद्यार्थियों ने शतरंज में बहुत ही शानदार प्रदर्शन करते हुए प्रतियोगिता को और भी रोमांचक बना दिया। प्रतियोगिता के बाद निर्णायक मंडल ने विद्यार्थियों की प्रतिभा को देखते हुए परिणाम घोषित किया। बालक वर्ग से सब जूनियर ग्रुप में अक्षत यादव (कक्षा-8 अ), अभय कश्यप (कक्षा-8 स) सुधांशु सिंह (कक्षा- 6 ब) ने क्रमशः प्रथम, द्वितीय, एवं तृतीय स्थान प्राप्त किया।
बालिका वर्ग से सब जूनियर ग्रुप में आर्या गोयल (कक्षा-7 अ), आरोही पाल (कक्षा- 8 ब), अमिशी वार्ष्णेय (कक्षा-8ब) ने क्रमशः प्रथम, द्वितीय, एवं तृतीय स्थान प्राप्त किया। बालक वर्ग से जूनियर ग्रुप में मोहम्मद शान (कक्षा-10 स), एकांश राठी (कक्षा-10 ब), आशुतोष यादव (कक्षा- 10 अ) ने क्रमशः प्रथम, द्वितीय, एवं तृतीय स्थान प्राप्त किया। बालक वर्ग से सीनियर ग्रुप में अभिषेक वर्मा (कक्षा-11 स), हर्षित पुण्डीर (कक्षा-11 स), इशांत शर्मा (कक्षा-12 स) ने क्रमशः प्रथम, द्वितीय, एवं तृतीय स्थान प्राप्त किया। बालिका वर्ग से सीनियर ग्रुप में वर्णिका (कक्षा-11 ब), ईशानी (कक्षा-10 ब), कनिष्का वर्मा (कक्षा-12 अ) ने क्रमशः प्रथम, द्वितीय, एवं तृतीय स्थान प्राप्त किया। प्रतियोगिता के समापन पर डायरेक्टर अनुज वार्ष्णेय तथा विद्यालय निदेशिका साधना वार्ष्णेय ने विद्यार्थियों को भारतीय शतरंज खिलाडी विश्वनाथन आनंद के बारे में बताया और कहा कि विश्वनाथन आनंद अंतर्राष्ट्रीय ग्रांडमास्टर एवं पूर्व विश्व चैम्पियन हैं आनंद पांच बार विश्व विजेता रहे हैं। डी. गुकेश वर्तमान में सबसे कम उम्र के विश्व शतरंज चैंपियन हैं. वर्ष 2024 में, 18 साल की उम्र में, उन्होंने चीन के डिंग लिरेन को हराकर यह खिताब जीता | शतरंज को भारत का प्रमुख खेल बताते हुए कहा कि शतरंज विद्यार्थियों के मानसिक विकास में सहायता करता है तथा उनके सोचने की क्षमता को बढ़ाता है। प्रधानाचार्या रूपा माहेश्वरी ने सभी छात्रों को बधाई एवं शुभकामनाएँ दीं और बच्चों को शतरंज के प्रति प्रोत्साहित किया | उन्होंने बच्चो को बताया कि शतरंज के खेल से बौद्धिक स्तर का विकास होता है इससे तार्किक क्षमता बढ़ती है | इसलिए समय समय पर विद्यालय द्वारा इस प्रकार की प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाता है। इसलिए विद्यालय में बच्चों को पढाई के साथ-साथ खेलने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। जिससे खेल व्यक्ति में अनुशासन का संचार करता है जो कि सफलता का मूल मंत्र है। उन्होंने खेल के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि खेल कैरियर में एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है। प्रतियोगिता को सफल बनाने में टी.सी. भट्ट, विकास कुमार, स्वाति साहू, प्रज्ञा मिश्रा का मुख्य योगदान रहा। इस अवसर पर विद्यालय प्रशासक अमित माहेश्वरी तथा समस्त स्टाफ मौजूद रहा |

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