परमात्मा द्वारा जीवन को सुंदर और सरल बनाने का मार्ग है

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बरेली । प्राचीनतम एवं भव्यतम बाबा त्रिवटीनाथ मंदिर में संगीतमयी श्री मद्भागवत महापुराण कथा के चतुर्थ दिवस
वृंदावन के सुप्रसिद्ध कथा व्यास पं.सुरेश शास्त्री ने कहा कि यदि मनुष्य के भक्ति में सामर्थ्य हो तथा प्रभु के प्रति आसक्ति में बल हो तब परमात्मा भी अपने भक्त के आगे कृपा करने के लिए विवश हो जाते हैं। कथा व्यास कहते हैं कि भगवान मनुष्य पर ही नहीं अपितु पशु पर भी समान कृपा करते हैं। तालाब में पानी पीते हुए हाथी के पैर जब मगरमच्छ अपने मुंह में दबा कर मारने का प्रयास करता है तब हाथी की सूंड पर कमल का फूल आ जाता है जोकि पानी से ऊपर होता है। हाथी की असहाय अवस्था देखकर भगवान विष्णु स्वयं प्रकट हो कर हाथी की रक्षा करते हैं। कथा व्यास कहते हैं कि श्रीमद्भागवत की चर्चा मात्र से मनुष्य की मनोवृत्ति नकारात्मक से सकारात्मक हो जाता है। श्री मद्भागवत मात्र कोई ग्रंथ नहीं है अपितु परमात्मा द्वारा जीवन को सुंदर और सरल बनाने का मार्ग है। कथा व्यास कहते हैं कि गुरु का मतलब जो गोविन्द से मिला दे। गुरु का मतलब ये नहीं है जो अपने आपको ही मंदिर में सजा दें। गुरुर साक्षात परम ब्रह्म हैं। वही गुरु श्रेष्ठ हैं जो गुरु गोविंद की राह पर चलने के लिए हमें प्रसन्नता दें। जो गोविंद दे दें वहीं स्वीकार कर लो..वही श्रेष्ठ है। भगवान से मांगना ही तो ये मांगों कि ऐसी दया करो “मेरा हीआत्म कल्याण हो जाये”। कभी कभी भगवान से भगवान को भी मांग लेना चाहिए। तब आनद आता है। कथा व्यास बताते हैं कि जब कंस का अत्याचार बहुत अधिक बढ़ जाता है तब सभी ब्रजवासियों को बचाने के लिए श्री कृष्ण अवतार लेते हैं। अपनी बहन देवकी के विवाह के समय आकाशवाणी होती है कि उसी बहन का आठवां पुत्र उसकी मृत्यु का कारण होगा। कुपित होकर कंस देवकी और वसुदेव को कारागार में डाल देता है। भगवान कृष्ण के जन्म पर वसुदेव बाल कृष्ण को गोकुल नंद जी के घर ले जाते हैं। कथा व्यास कहते हैं कि कंस ने भगवान कृष्ण को मारने के बहुत कुत्सित प्रयास किये।उनके द्वारा राक्षसी पूतना को मारने के लिये भेजते हैं जोकि रूप बदलने में निपुण थी।उसने एक सुंदर स्त्री का रूप बदल कर गोकुल में नन्द बाबा के घर में प्रवेश करती है और बाल कृष्ण को खिलाने के साथ अपने स्तन पर विष लगा कर भगवान कृष्ण क़ो दुग्धपान करा कर मारना चाहती है।बाल कृष्ण उसके प्राण हर लेते हैं और मुक्ति प्रदान करते हैं। कथा व्यास कहते हैं कि हम सब जानते हैं कि दूध में घी होता लेकिन उसको निकालने की कला आनी चाहिए तभी घी की प्राप्ति हो सकती है।उसी तरह से परमात्मा की कृपा पाने के लिये
भक्ति रूपी कला का आना होना चाहिए । कथा व्यास कहते हैं कि भगवान अधर्म करने वाले का नाश करते हैं परंतु अधर्म करने वाला यदि पश्चाताप करके भगवान का ध्यान करके उनकी शरण में चला जाता है तो भगवान उसको सद्गति और सद्मार्ग भी प्रदान करते हैं।राजा इंद्र को अति अहंकार होने पर जब इंद्र अपनी पूजा नहीं होने पर गोकुल में तीव्र वर्षावृष्टि कर देते हैं।भगवान कृष्ण गोवर्धन पर्वत को अपनी कनिष्ठ उंगली पर धारण करके सभी गोकुलवासियों की सुरक्षा करते हैं।इन्द्र को जब यह ज्ञात होता है कि परमब्रह्म परमात्मा ही सभी गोकुल वासियों की सुरक्षा कर रहे हैं तब इन्द्र को पश्चाताप होता है,उनका अभिमान भंग हो जाता है और वह भगवान श्री कृष्ण से क्षमा याचना करते हैं। गोकुलवासियों की गोवर्धन पर्वत से सुरक्षा करने के कारण भगवान को सभी गोकुलवासी गोवर्धनधारी भी प्रेमवश कह कर ध्यान करते हैं। आज श्रीकृष्ण जन्म की पवित्र कथा होने पर कथा व्यास के साथ सभी भक्तों ने नन्द के आनन्द भयो जय कन्हैयालाल की,हाथी घोड़ा पालकी जय कन्हैयालाल की का उद्घोष करके भाव के साथ कन्हैया जी जन्मोत्सव मनाया। आज की कथा के उपरांत वहां उपस्थित काफी संख्या में भक्तजनों ने श्रीमद्भागवत जी की आरती करी तथा प्रसाद वितरण हुआ। मीडिया प्रभारी संजीव औतार अग्रवाल ने बताया कि कथा का समय सांयकाल 4 से 7 बजे तक नित्य 5 जुलाई तक रहेगा। आज के कार्यक्रम में मंदिर सेवा समिति के प्रताप चंद्र सेठ , मीडिया प्रभारी संजीव औतार अग्रवाल, सुभाष मेहरा,हरिओम अग्रवाल का मुख्य सहयोग रहा।

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