‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद बोले राहुल गांधी: BJP-RSS दबाव में झुकते हैं, कांग्रेस नहीं सरेंडर करती

भोपाल। ऑपरेशन सिंदूर के बाद कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने पहली बार भारत-पाकिस्तान सीजफायर और संगठन निर्माण को लेकर बड़ा बयान दिया। भोपाल स्थित रविंद्र भवन में कांग्रेस के ‘संगठन सृजन अभियान’ कार्यक्रम में राहुल ने बीजेपी और आरएसएस पर सीधा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि इन संगठनों पर जरा सा भी अंतरराष्ट्रीय दबाव पड़ता है, तो वे झुक जाते हैं। राहुल गांधी ने अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का हवाला देते हुए कहा कि एक इशारा होते ही BJP ने जी हुजूर कहकर पाकिस्तान से सीजफायर कर लिया। उन्होंने तंज कसते हुए कहा, “इतिहास गवाह है कि BJP-RSS का चरित्र यही रहा है – ये हमेशा दबाव में झुकते हैं।” वहीं कांग्रेस की भूमिका पर उन्होंने कहा कि 1971 में जब अमेरिका धमका रहा था, तब भी इंदिरा गांधी ने झुके बिना पाकिस्तान को विभाजित कर दिया। “गांधी, नेहरू, पटेल जैसे नेता कभी सरेंडर नहीं करते थे। कांग्रेस की रीढ़ मजबूत है,” राहुल ने कहा।
देश में विचारधारा की लड़ाई
राहुल गांधी ने कहा कि देश में आज विचारधारा की दो धाराएं आमने-सामने हैं। पहली लड़ाई संविधान की रक्षा की है, जिसमें कांग्रेस पार्टी पूरी तरह संविधान के साथ खड़ी है। दूसरी लड़ाई सामाजिक न्याय की है। उन्होंने जाति जनगणना को जरूरी बताते हुए कहा कि देश के विकास में सभी की भागीदारी जरूरी है।
उन्होंने तेलंगाना मॉडल की सराहना करते हुए कहा कि वहां जाति जनगणना के सवाल जनता ने तय किए। यह तरीका पारदर्शी और लोकतांत्रिक है। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार जाति जनगणना और महिला आरक्षण जैसे मुद्दों पर गंभीर नहीं है।
एमपी कांग्रेस में बदलाव की तैयारी
राहुल गांधी ने मध्यप्रदेश कांग्रेस की आंतरिक समस्याओं पर भी खुलकर बात की। उन्होंने स्वीकार किया कि एमपी में कांग्रेस कार्यकर्ताओं की कमी नहीं है, लेकिन उनकी आवाज संगठन तक ठीक से नहीं पहुंच पा रही। राहुल ने संगठन में सुधार के संकेत देते हुए कहा, “अब पार्टी में रेस के घोड़े और बारात के घोड़े को अलग किया जाएगा। लंगड़े घोड़ों को रिटायर करना जरूरी है क्योंकि वे बाकियों को भी पीछे खींचते हैं।” उन्होंने कहा कि जिला स्तर से नए नेतृत्व को मौका दिया जाएगा और जल्द ही कांग्रेस एमपी में फिर से मजबूती से खड़ी होगी।
निष्कर्ष
राहुल गांधी का यह बयान न केवल भाजपा और आरएसएस पर हमला था, बल्कि कांग्रेस संगठन में सुधार और नए नेतृत्व को बढ़ावा देने की रणनीति का संकेत भी था। अब देखना होगा कि एमपी कांग्रेस में बदलाव की ये बयार चुनावी सफलता में कितनी मददगार होती है।