नेशनल हेराल्ड प्रकरण में गांधी परिवार आया लपेटे में

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बरेली। अंग्रेजी दैनिक नेशनल हेराल्ड की कंपनी एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड ( ए जे एल) का भूत गांधी परिवार का पीछा नहीं छोड़ पा रहा है। अब तो कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष रहीं श्रीमती सोनिया गांधी, उनके सांसद पुत्र राहुल गांधी के खिलाफ केंद्रीय जांच एजेंसी ईडी ने कोर्ट में अंग्रेजी दैनिक नेशनल हेराल्ड से जुड़े 2 हजार करोड़ की संपत्ति प्रकरण में चार्जशीट फाइल कर दी है। लखनऊ सहित कुछ कार्यालय पर नोटिस भी चस्पा हो गए हैं। इससे पहले एक दूसरे मामले में श्रीमती सोनिया गांधी की पुत्री सांसद प्रियंका के पति रॉबर्ट वाड्रा को ईडी ने बुलाकर पूछताछ की थी। देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार पर कांग्रेस नेताओं ने कई बार परेशान करने का भी निशाना साध चुके हैं । इसको लेकर देश भर में कांग्रेस ने ई डी कार्यालय पर प्रदर्शन भी किया। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने बीजेपी सरकार पर निशाना साधा और सरकारी जांच एजेंसियों का गलत इस्तेमाल का भी आरोप लगाये हुए कहा की हम डटकर मुकाबला करेंगे। पूर्व में वर्ष 2015 एवं वर्ष 2022 में भी प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की पूछताछ के दौरान कांग्रेस अध्यक्ष श्रीमती सोनिया गाँधी और सांसद राहुल गांधी ने कांग्रेस पार्टी के पूर्व कोषाध्यक्ष स्वर्गीय मोतीलाल वोरा पर अपना ठीकरा फोड़ कर अपने बचने की जुगत निकालने का प्रयास कर रहे थे। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी नेपूर्व वर्षों में ई डी की पूछताछ में भी यही कहा था कि अकेले कांग्रेस, ए जे एल और यंग इंडियन के बीच आर्थिक लेनदेन के विवरण के बारे में केवल स्वर्गीय मोती लाल बोरा ही जानते थे। यही बात राहुल गांधी ने भी पूर्व में अपनी 50 घंटे वाली प्रवर्तन निदेशालय की पूछताछ में कही थी। माननीय सुप्रीम कोर्ट ने अपने एक निर्णय में प्रवर्तन निदेशालय को उसके अधिकार पर उसे राहत दी थी । पी एम एल ए पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद सुप्रसिद्ध वकील सुब्रमण्यम स्वामी ने कांग्रेस पर तंज कस कर इसे सुप्रीम फैसला बताया था। प्रवर्तन निदेशालय ई डी के पीएमएलए अधिकार पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले आने पर प्रमुख नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने कांग्रेस पर तंज भी कसा था। स्वामी ने एक ट्वीट कर कहा कि था कि पी एम एल ए पर सुप्रीम कोर्ट का जजमेंट पी. चिदंबरम आदि के लिए ऐसा है कि अब चिकेन खुद तलने के लिए आ गया। ई डी को यूपीए सरकार दौरान शक्तिशाली बनाया गया था। कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी को प्रवर्तन निदेशालय ई डी ने कई घंटे पूछताछ की थी। माननीय सुप्रीम कोर्ट ने अपने एक निर्णय में प्रवर्तन निदेशालय को उसके अधिकार पर उसे राहत भी दी थी। एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड ( ए जे एल) कथित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में यंग इंडियन द्वारा एजेएल और उसकी 800 करोड़ रुपये की संपत्ति के अधिग्रहण के संबंध में पूर्व के वर्षों में श्रीमती सोनिया गांधी से कई घंटे तक तक पूछताछ हुई थी जिसमें श्रीमती गांधी ने यंग इंडियन द्वारा नेशनल हेराल्ड और अन्य पार्टी प्रकाशनों के प्रकाशक एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (ए जे एल) की संपत्ति के अधिग्रहण की सुविधा देने वाले लेनदेन वाले विवरण देने में अपनी असमर्थता व्यक्त की थी । बता दें कि इस कंपनी में श्रीमती सोनिया गांधी और उनके पुत्र सांसद राहुल गांधी दोनों की ही सर्वाधिक हिस्सेदारी है। ई डी की पूछताछ के दौरान ने सोनिया गाँधी ने कहा था कि कांग्रेस पार्टी के पूर्व कोषाध्यक्ष स्वर्गीय मोतीलाल वोरा ही अकेले कांग्रेस, एजेएल और यंग इंडियन के बीच लेनदेन के विवरण के बारे में जानते थे। इस मामले में ईडी यह पता लगाने की कोशिश कर रहा था कि यंग इंडियन (वाईआई) ने ए जे एल और उसकी संपत्तियों का अधिग्रहण कैसे किया। ई डी अनिवार्य रूप से इसकी प्रमुख अचल संपत्ति के बारे में जानना चाहती है जो दिल्ली, मुंबई, लखनऊ, भोपाल और चंडीगढ़ जैसे शहरों में कांग्रेस सरकारों द्वारा रियायती दरों पर उसे दी गई थी। सूत्रों के अनुसार, यंग इंडियन ने कांग्रेस को 1 करोड़ रुपये में से केवल 50 लाख रुपये का भुगतान किया था, जो कि डोटेक्स मर्चेंडाइज प्राइवेट लिमिटेड से था। ई डी को संदेह है कि यह कोलकाता स्थित एक मुखौटा कंपनी है। कांग्रेस ने दावा किया था कि उसने एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (ए जे एल) को अपने कर्मचारियों के भविष्य निधि बकाया और वीआरएस बकाया के भुगतान के लिए अपने दायित्वों को पूरा करने में मदद करने के लिए 90.2 करोड़ रुपये का भुगतान किया था। वहीं, ईडी का कहना है कि पार्टी के पदाधिकारी कथित भुगतान का कोई सबूत देने में विफल रहे हैं। वह यह भी नहीं बता पाए हैं कि भुगतान नकद में किया गया या फिर चेक के जरिए। सूत्रों का कहना है कि यंग इंडियन का दावा है कि उसने ए जे एल के कांग्रेस के कर्ज को अपने कब्जे में ले लिया और बदले में पार्टी ने एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (ए जे एल) की 100 प्रतिशत हिस्सेदारी को हस्तांतरित कर दिया। ई डी का कहना था कि उसे यह अविश्वसनीय लगा कि यंग इंडियन ने 5 लाख रुपये की शेयर पूंजी के साथ कांग्रेस के 90 करोड़ रुपये के कर्ज को अपने ऊपर ले कर एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (ए जे एल) की संपत्ति पर कब्जा करने में कामयाब रहा। प्रवर्तन निदेशालय (ई डी) डोजियर के अनुसार, “चूंकि 90.2 करोड़ रुपये के ऋण की कथित खरीद के समय यंग इंडियन (वाई आई) के पास कोई धन नहीं था, इसलिए उसने डॉटेड मर्चेंडाइज से 1 करोड़ रुपये का ऋण लेने का दावा किया।”
स्मरण रहे कि कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी से कई घंटे के सत्र के दौरान लगभग 90 से अधिक सवाल पूछे गए थे। ई डी ने उनके बयान दर्ज किए थे। ई डी सूत्रों ने कहा कि जांचकर्ताओं को राहुल के करीब 100 सवालों के जवाब रिकॉर्ड करने में कई दिन लगे थे।अब इस मामले में कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष रहीं श्रीमती सोनिया गांधी, उनके सांसद पुत्र राहुल गांधी के खिलाफ केंद्रीय जांच एजेंसी ईडी ने कोर्ट में अंग्रेजी दैनिक नेशनल हेराल्ड से जुड़े प्रकरण में चार्जशीट फाइल कर दी है। जिसमें सुमन दुबे एवं सेम पित्रोदा भी आरोपी हैं। इससे पहले एक दूसरे मामले में श्रीमती सोनिया गांधी की पुत्री सांसद प्रियंका के पति रॉबर्ट वाड्रा को ईडी ने बुलाकर लंबी पूछताछ की थी। नेशनल हेराल्ड से संघर्ष जारी रखते हुए उसके कर्मियों ने लखनऊ से निकाला था दैनिक “वर्कर्स हेराल्ड” आजकल नेशनल हेराल्ड का भूत श्रीमती सोनिया गांधी एवम सांसद राहुल गांधी, प्रियंका वाड्रा जैसे तीनों नेताओं की नींद उड़ाए हुए है। आज भी ‘नेशनल हैराल्ड’ लखनऊ के दर्जनों कर्मचारियों के वेतन संबंधी प्रकरण लखनऊ के श्रम न्यायालय व अन्य अदालतों में फाइलों के ढेर में दबे हैं जिसमें सर्वश्री स्वर्गीय एस. पी. निगम व स्वर्गीय आर. के. अवस्थी के नाम प्रमुख हैं। जिन्होंने नैशनल हैराल्ड के कर्मचारियों के वेतन की अपने जीते जी लंबी लड़ाई लड़ी। इस पुनीत कार्य में यू. पी. जर्नलिस्ट एसोशियशन (उपजा) ने भी उसका भरपूर साथ दिया था। पत्रकार साथी भले ही मजाक में कहते हों पर यह सही है कि ‘नेशनल हैराल्ड’ के स्वर्गीय पत्रकारों का भूत आज भी कांग्रेस को घेरे खड़ा है और प्रवर्तन निदेशालय (ई डी) को काफी सुराग भी मिले है । एक समय तो ‘नेशनल हैराल्ड’ की लड़ाई लड़ने वाले पत्रकारों ने सहकारिता के आधार पर लखनऊ से दैनिक ‘वर्कर्स हेैराल्ड’ नामक समाचार पत्र भी निकालकर अपना संघर्ष जारी रखा था। सहकारिता के आधार पर इस ‘वर्कर्स हैराल्ड’ समाचार पत्र में मुझ जैसे कई उपजा से जुड़े पत्रकारों ने इसके शेयर खरीदकर अपना आर्थिक योगदान किया था। नेशनल हैराल्ड’ कर्मियों का संघर्ष वर्ष 1970 के दशक से ही चलता रहा। जिस समय ‘नेशनल हैराल्ड’, ‘नवजीवन’, ‘कौमी आवाज’ समाचार पत्रों का लखनऊ में सत्तारूढ़ होने का दबदवा था उस दौर में भी ‘नेशनल हैराल्ड’, ‘नवजीवन’ के पत्रकार साथी हमेशा वेतन के लिए संघर्ष करते रहे। नेशनल हैराल्ड के संपादकीय विभाग के अब स्वर्गीय एस. पी. निगम, सरदार अवतार सिंह कल्सी, एस. के. राव, श्रीमान टंडन हो या नवजीवन के आर.के.अवस्थी या अन्य पत्रकार साथी रहे हो हमेशा पत्रकारों के कल्याण की लड़ाई लड़ते रहे जो अब जीवित भी नहीं हैं।
स्वर्गीय एस.पी.निगम के बारे में लखनऊ के पत्रकार साथी बताते हैं एस पी निगम साहब उत्तर प्रदेश विधान सभा में जाएं या न जायें पर उनकी नेशनल हेराल्ड की रिपोर्टिंग अन्य समाचार पत्रों पर हमेशा भारी पड़ती थी। यही हाल स्वर्गीय आर. के. अवस्थी का भी था। हिन्दी नवजीवन में रहते हुए भी वह चलती फिरती अंग्रेजी डिक्शनरी व खेलकूद के समाचार पत्रों को पैनापन देने में माहिर थे। लखनऊ के केसरबाग एवम् नई दिल्ली के बहादुर शाह जफर मार्ग स्थित नेशनल हैराल्ड हाउस के कार्यालय में मुझे जाने का कई बार अवसर मिला। बरेली से कुछ दिनो नवजीवन को समाचार भी भेजें पर मुझे वहां मुझे आत्मसंतुष्टि नहीं मिली क्योंकि अंतिम दौर में नवजीवन बदहाली के दौर से गुजर रहा था। ‘नेशनल हैराल्ड’ व ‘नवजीवन’ के बरेली संवाददाता रहे स्वर्गीय मुंशी प्रेम नारायण सक्सेना वर्षों इस समाचार पत्र से जुड़े रहे। बाद में उनके सहयोगी रहे भैरव दत्त भट्ट ने बरेली में दैनिक ‘नवजीवन’ का कार्य संभाला था। नगर विकास मंत्री अब स्वर्गीय राम सिंह खन्ना के कार्यालय में सहायक बनने के बाद भैरव दत्त भट्ट ने नवजीवन का कार्य छोड़ दिया था। उसके बाद ही मुंशी प्रेम नारायण ने मुझे ‘नवजीवन’ समाचार पत्र में एवं कौसर शम्सी को दैनिक ‘कौमी आवाज’ में बरेली के समाचार भेजने को कहा था। मुझे अब भी याद है लखनऊ में जब मैं श्री आर. के. अवस्थी से कार्यालय में मिला था। उन्होंने मुझे युवा होने के नाते सलाह दी की समाचार पत्र से पार्ट टाइम जुड़ो और अपना कोई और कार्य देखों क्योंकि हैराल्ड ग्रुप में पत्रकारों का भविष्य ठीक नहीं है। हम लोग खुद वेतन के लिए संघर्ष करते रहते हैं।
बाद में उपजा के कई कार्यक्रमों में एस. पी. निगम व आर.के. अवस्थी के साथ देश भर में घूमने का अवसर भी मुझे मिला था। उन्होंने पत्रकारिता संबंधी कई टिप दिये व हमेशा कुछ न कुछ पढ़ते रहने पर जोर दिया। आज भले ही वह संसार में नहीं है पर उनकी बात आज भी धरातल पर खरी उतरती है। श्री अवस्थी व एस.पीे.निगम कहते थे कि नेशनल हैराल्ड के निकालने वाले ए. जे. एल. ग्रुप ने 1977 में अखबार बंद कर दिये थे जिसके बाद श्रम विभाग व श्रम अदालतें के चक्कर में उन्होंने अपने कई वर्ष खराब किये पर नतीजा नहीं निकाला। आज भी अखबार कर्मियों की नेशनल हैराल्ड पर वेतन संबंधी देनदारी का काफी बकाया पड़ा है। बाद में एक बार पुनः प्रधानमंत्री राजीव गांधी के कार्यकाल में कानपुर के श्रमिक नेता विमल मेहरोत्रा आदि के कहने पर अखबार ने पुनः रेगना प्रारंभ किया था पर वह दौर भी इस अखबार को आर्थिक संकट से नहीं उबार सका था। वर्ष 2008 में यह समाचार पत्र पूरी तरह बंद हो गया था। हिंद मजदूर सभा से जुड़े कानपुर के कांग्रेसी नेता अब स्वर्गीय विमल मेहरोत्रा मेरे पिता अब स्वर्गीय श्री सुरेश चंद सक्सेना के मित्र होने के नाते कई बार मेरे निवास पर भी रुके थे। श्री एस. पी. निगम व अवस्थी बताते थे कि एक दौर ऐसा भी था कि नेशनल हैराल्ड के संपादक चेलापति राव के कमरे में जाने से पूर्व तत्कालीन प्रधानमंत्री व नेशनल हैराल्ड समूह के मालिक जवाहर लाल नेहरू भी चपरासी के माध्यम से श्री चेलापति राव से पुछवाते थे कि क्या मैं उनसे मिल सकता हूं। उसके बाद ही प्रधानमंत्री श्री जवाहर लाल नेहरू उनसे मिलने जाते थे। यह था नेशनल हैराल्ड के संपादक चेलापति राव का रूतवा। पर आज के दौर में दैनिक समाचार पत्रों में संपादक जैसा पद ही गौण हो गया है। जहां तक यू. पी. जर्नलिस्ट एसोसिएशन (उपजा) की बात है उसने हमेशा ऐसोसियेट जनरल लिमिटेड (ए.जे.एल.) ‘नेशनल हैराल्ड’ के संघर्ष में भाग लिया। इसके बाद नेशनल हैराल्ड के कर्मचारियों ने लखनऊ से सहकारिता के आधार पर ‘वर्कर्स हैराल्ड’ समाचार पत्र अमीनाबाद लखनऊ से प्रकाशित किया। जिसमें कई उपजा से जुड़े पत्रकारों ने आर्थिक सहयोग दिया। आज भले ही एस. पी. निगम व आर. के. अवस्थी जीवित न हों पर उनके द्वारा निकाला गया दैनिक अखबार ‘वर्कर्स हैराल्ड’ को लखनऊ से उनके साथी लोग आदि निकालते रहे थे। फिर वह बंद हो गया। बरेली में पहले इसके प्रतिनिधि शंकर दास थे ।
निर्भय सक्सेना

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