शिक्षक हितों के लिए मरते दम तक जारी रहेगा संघर्ष ।। व्यास
बरेली। उप्र माध्यमिक शिक्षक संघ (चंदेल गुट) के वरिष्ठ प्रदेश उपाध्यक्ष एवं शिक्षक नेता जगदीश प्रसाद व्यास ने कहा है कि जब विधायिका और न्यायपालिका को पेंशन मिल सकती है तो कार्यपालिका को क्यों नहीं। कार्यपालिका में अधिकारी और कर्मचारी भी शामिल हैं, जिसमें प्रदेश के 4512 इंटरमीडिएट विद्यालयों में नियुक्त हजारों शिक्षक भी निहित हैं। उन्होंने कहा कि 1992 से वह शिक्षक हितों के लिए मरते दम तक संघर्ष करते रहें गे। प्रदेश में 2238 तदर्थ शिक्षकों के विनियमितिकरण, 2303 विषय विशेषज्ञों को स्थायी व पेंशन और करीब 500 व्यवसायिक शिक्षकों को भी पुरानी पेंशन दिलाने की मांग वह समय-समय पर हर मंच पर उठाते हैं। श्री व्यास उप्र माध्यमिक शिक्षक संघ (चंदेल गुट) के 58वे तीन दिवसीय सम्मेलन में भाग लेने हमीरपुर से बरेली आये थे। उन्होंने शिक्षकों से संबंधित प्रमुख समस्याओं पर बिंदुवार बुधवार को पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे। पुरानी पेंशन के मुद्दे पर उन्होंने दो टूक कहा कि जब विधायिका और न्यायपालिका को पुरानी पेंशन मिल सकती है तो कार्यपालिको को क्यों नहीं। दशकों से कार्यरत शिक्षकों को इससे कैसे वंचित रखा जा सकता है। बोले, लोकतंत्र में समता और समानता मुख्य बिंदु है। इसका पालन पुरानी पेंशन में भी होना चाहिए। तदर्थ शिक्षकों पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि निश्चित रूप से उनका विनियमितिकरण होना चाहिए। चिकित्सीय सुविधा के बिंदु पर उन्होंने कहा कि राज्य कर्मियों की तरह शिक्षकों को भी यह सुविधा मिलनी चाहिए। इसके लिए वह हमेशा मंचों पर आवाज उठाते हैं। बेतहाशा महंगाई के इस दौर में इलाज कराना काफी खर्चीला है। इलाज के अभाव में लोग मर रहे हैं। मौजूदा समय यह सबसे ज्वलंत मुद्दा है। इसके अलावा पदोन्नति से संबंधित मांग जुलाई 2024 में गठित आयोग के समय से ही लंबित है। इसके लिए भी लड़ाई जारी है। विषय विशेषज्ञों का चयन और व्यवसायिक शिक्षकों को पेंशन दिए जाने सहित स्थानान्तरण प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए प्रदेश सरकार से लगातार मांग की जा रही है। श्री व्यास ने कहा कि इस तीन दिवसीय सम्मेलन से निकले निचोड़ को मांगपत्र के रूप में सरकार को सौंपते हुए पूरा करने की मांग करेंगे। अन्यथा शिक्षक हितों के लिए संघर्ष तो मेरा नारा है ही।













































































