प्रदेश सरकार द्वारा वन्यजीवों को दिये गये संरक्षण से उनकी संख्या में हुई बढ़ोत्तरी

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बदायूँ। वन और वन्यजीव इस धरती की प्राकृतिक धरोहर है। वनों और वन्यजीवों से पारिस्थितिकीय संतुलन बना रहता है, जो मानव जीवन को समृद्ध और सुखमय बनाते हैं। भारत में विभिन्न प्रजातियों के कई वन्यजीवों का वास है। वन्यजीव भी प्राणी हैं। मानव की तरह उनमें भी शरीर के सभी अंग होते है। वन्य प्राणियों में हृदय की धड़कन भी आम मनुष्यों की तरह ही धड़कते है। आज वन्य प्राणियों के प्रभावी संरक्षण व संवर्द्धन हेतु व्यापक जन जागरूकता करते हुए उनके प्रति करूणा व स्नेह का भाव जागृत करना जरूरी है। वन्यजीवों को सुरक्षित रखने की हमारी समृद्ध परम्परा का ही परिणाम है कि इस धरती पर शहरीकरण एवं औद्योगिक विकास होने तथा अत्यधिक जैविक दबाव होने पर भी विभिन्न प्रकार के वन, वनस्पतियों एवं वन्यजीव की प्रजातियां जीवित पाई जाती है। धरती की प्राकृतिक सुन्दरता का संतुलन बनाये रखने के लिए विभिन्न प्रजाति के जीवों में समन्वय जरूरी होता है। वन्य जीव उस हर वृक्ष, पौधे, जानवर, पक्षी और अन्य जीव को कहा जाता है, जो मानव द्वारा पालतू न बनाया गया हो। जंगली जीव दुनिया के सभी क्षेत्रों रेगिस्तान, वन, घास भूमि, मैदान, पर्वत, जलीय क्षेत्र और शहरी क्षेत्र में भी पाये जाते हैं और मानव बसेरों से दूर वनों-पर्वतों आदि प्राकृतिक वासों में रहतें है। प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में वन्यजीवों के प्राकृतिवासों संरक्षण एवं संवर्द्धन हेतु विशेष कार्य किये जा रहे है। वन्य प्राणियों के प्राकृतिकवास देने और अनुकूल वातावरण बनाये रखने के लिए प्रदेश सरकार ने वृहद वृक्षारोपण अभियान चलाकर पौधरोपण कराया है। प्रदेश सरकार के गत 8 वर्षों के कार्यकाल में पूरे प्रदेश में 204.65 करोड़ पौधे रोपित करते हुए वनावरण/वृक्षावरण बढ़ाया है। प्रदेश सरकार द्वारा कराये गये वृक्षारोपण से प्रदेश में 91 वर्ग किलोमीटर से अधिक वन क्षेत्र में बढ़ोत्तरी हुई है। प्रदेश सरकार ने वन्यजीवों को प्राकृतिक वास देकर उनकी आबादी में बढ़ोत्तरी की है। वन्यजीवों को जब प्राकृतिक और उनकी प्रकृति, स्वभाव सहित भरपेट भोजन मिलता रहेगा और नर-मादा प्राकृतिक रूप से मिलेगे तो उनका कुनबा निश्चय ही बढ़ेगा। प्रदेश सरकार द्वारा की गई व्यवस्था का ही परिणाम है कि प्रदेश में राष्ट्रीय पशु बाघों की संख्या जो 173 थी वह बढ़कर 205 हो गई है। प्रदेश में बाघों की संख्या में 18 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी हुई है।
प्रदेश सरकार ने झीलों, तालाबों की संख्या में बढ़ोत्तरी की है। जो झीले, नदियां, तालाब आदि जल के क्षेत्रों में भराव, घास उगे थे उनकी सफाई, मरम्मत आदि कराकर मूल स्वरूप में लाया गया हैं। प्राकृतिक वातावरण और पूर्ण संरक्षण देने का ही परिणाम है कि ’राज्यपक्षी सारस’ की संख्या गत 08 वर्षों में 17586 से बढ़कर 19616 हो गई है। राज्यपक्षी सारस को प्रदेशवासी बहुत प्यार करते है और उनके वास से छेड़छाड़ नहीं किया जाता। इसी प्रकार प्रदेश में हाथी की संख्या 265 से बढ़कर 352 हो गई है। प्रदेश के वन क्षेत्रों में हाथियों को पूर्ण संरक्षण दिया जा रहा है। प्रदेश सरकार प्रदेश के 27 वन्यजीव विहार व पक्षी विहार को संरक्षित कर रही है। इन विहारों में वन्यजीवों को प्राकृतवास मिल रहा है और उनका कुनबा बढ़ रहा है। प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ने जनपद चित्रकूट के अन्तर्गत विन्ध्य पर्वतमाला में स्थित लगभग 53000 हेक्टेयर का विशालकाय तथा रमणीय वन क्षेत्र, जैव विविधता की दृष्टि से महत्वपूर्ण होने के कारण 19 अक्टूबर 2022 को ’रानीपुर टाइगर रिजर्व’ के नाम से प्रदेश का चौथा टाइगर रिजर्व क्षेत्र के रूप में अधिसूचित किया है। प्रदेश के जनपद गोरखपुर में कैम्पियरगंज रेंज के अन्तर्गत ’रेड हंेडेड गिद्ध संरक्षण एवं प्रजनन केन्द्र’ बनाकर गिद्धों की संख्या में बढ़ोत्तरी की जा रही है। उत्तर प्रदेश में ’वेटलैण्डस’ की संख्या में बढ़ोत्तरी हुई है। इन ’वेटलैण्ड रामसर साइट’ में पक्षी सहित विभिन्न जलीय जीव-जन्तु निवास करते है।। प्रदेश में 10 वेटलैण्ड रामसर साइट घोषित हुए है, जो देश में सर्वाधिक हैं प्रदेश सरकार द्वारा वन्यजीव सुरक्षा तथा संरक्षित क्षेत्रों के समुचित संरक्षण तथा तकनीकी नवाचार के प्रयोग से वन्यजीवों के संरक्षण में नई दिशा मिली है।

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