इस्लाम की बुनियाद पांच चीजो पर है,जिसमे एक बुनियाद रमज़ान के रोज़े है

WhatsApp Image 2025-03-03 at 15.53.59
WhatsAppImage2024-05-04at205835
previous arrow
next arrow

बरेली। हज़रत मौलाना मुफ़्ती मोहम्मद मोअज़्ज़म रज़ा बरकाती बुखारी खलीफा तौसीफ ए मिल्लत दरगाह आला हजरत ने बताया हर आक़िल बालिग़, मुसलमान लेडीज़ जेन्स पर फ़र्ज़ है,हदीस ए पाक – जन्नत के आठ दरवाज़े है इनसे से एक दरवाज़े का नाम रय्यान है उसमें वही दाखिल होंगे जो रोज़ा रखते है,हर चीज़ की एक ज़कात है बदन की ज़कात रोज़ा है। रोज़ेदार की दुआ इफ्तार के समय रदद् नही होती हैं। दुआ अपने परिवार के लिए करें, बीमारो के लिये करें, अपने मुल्क की अमन चैन खुशहाली के लिये करें। इफ्तारी के फोटो सोशल मीडिया पर न करें।क्योंकि गरीबो को एहसास होता हैं सहरी में लाऊड स्पीकर का इस्तेमाल कम से कम करें।किसी को तकलीफ नही होना चाहिए, बीमारो का खास ख्याल रखे।यह महीना अल्लाह की इबादत का तो है ही कुरआन शरीफ की तिलावत दुरुद शरीफ नफिल आदि करें, मगर गरीबी मोहताजी,बेवाओं का ख्याल रखें, इसका पहला अशरा रहमत का दूसरा अशरा मगफिरत का और तीसरा अशरा जहन्नम से निजात का है रोज़ा सिर्फ पेट का ही नही आंख,कान दिमाग हाथो का है।मालदारों के लिये नसीहत-मालदार हज़रात अपने माल का ढाई प्रतिशत देना फ़र्ज़ है,सोना साढे सात तोला होती चांदी 52 तोला होता है तो ज़कात फ़र्ज़ है,ईद की नमाज़ से पहले पहले इसकी अदा कर दे। सबसे पहले अपने रिश्तेदारों में देखे कौन ज़रूरतमंद हैं।फिर मोहल्ले में देखे और इस अंदाज से ज़कात दे कि उसे एहसास न हो। इमाम, हाफिजों को नवाज़े मस्जिदों के आसपास सफाई व्यवस्था पर ख़ास ध्यान दे इस्लाम मे पाकी सादगी पर खास दिया गया है,तरावीह का खास एहतराम करे क्योंकि तरावीह की नमाज़ साल में एक बार आती है। तरावीह की नमाज़ के बाद सीधे घर पर जाकर आराम करे और अगले रोज़े की तैयारी करे, बेवजह घूमने की इस्लाम इजाजत नही देता।दिखावे से परहेज करें।

ReferralCodeLLVR11
previous arrow
next arrow
WhatsAppImage2024-06-13at1242061
previous arrow
next arrow
WhatsAppImage2025-06-11at40003PM
previous arrow
next arrow
WhatsAppImage2024-10-20at41111PM1
previous arrow
next arrow
WhatsAppImage2023-04-17at53854PM4
previous arrow
next arrow
Home
Live TV
VIDEO NEWS
Verified by MonsterInsights