बरेली । भारत में फ्रांस के दूतावास में वैज्ञानिक सहयोग के लिए नामित डॉ. डिडिएर राबोइसन ने भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (आई वी आर आई) का दौरा किया। उनकी यात्रा का उद्देश्य भारत-फ्रांस वैज्ञानिक सहयोग की संभावनाओं, विशेष रूप से फ्रांस की PREZODE (जूनोटिक रोग उद्भव की रोकथाम) पहल के संबंध में चर्चा करना था। इस अवसर पर संस्थान के निदेशक डॉ. त्रिवेणी दत्त ने आईवीआरआई की गतिविधियों और भारत में पशु स्वास्थ्य और उत्पादकता में संस्थान के नेतृत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने संकाय और छात्र आदान-प्रदान, क्षमता निर्माण, और फ्रांस के पशु चिकित्सा स्कूलों और आई सी ए आर – आईवीआरआई के बीच संयुक्त अनुसंधान परियोजनाओं के माध्यम से पशु स्वास्थ्य अनुसंधान में भारत-फ्रांस सहयोग को मजबूत करने के महत्व पर बल दिया। प्रारंभिक कदम के रूप में, डॉ दत्त ने शोधकर्ताओं के बीच रुचि के सामान्य क्षेत्रों की पहचान करने के लिए एक संयुक्त कार्यशाला करने का सुझाव दिया । संयुक्त निदेशक (शोध) डॉ. एस. के. सिंह ने वन हेल्थ थीम के तहत संस्थान के बुनियादी ढांचे और चल रही गतिविधियों पर एक संक्षिप्त प्रस्तुति दी। इसके बाद भारत-फ्रांसीसी समझौते के तहत चल रही विभिन्न योजनाओं और अनुसंधान प्रस्ताव डॉ. राबोइसन की प्रस्तुति हुई। उन्होंने आईवीआरआई संकाय को प्रतिस्पर्धी परियोजना वित्त पोषण के लिए आवेदन करने के लिए प्रोत्साहित किया। प्रस्तुतियों के बाद प्रतिभागियों के बीच चर्चा हुई, जिसके दौरान वैक्सीन अनुसंधान एवं विकास, खाद्य सुरक्षा, रोगाणुरोधी प्रतिरोध (एएमआर), रोग जोखिम विश्लेषण, मेजबान-रोगज़नक़ इंटरैक्शन और रोगजनकों की जीनोमिक निगरानी जैसे संभावित अनुसंधान क्षेत्रों की पहचान की गई। इन सहयोगी गतिविधियों की दिशा में पहले कदम के रूप में निकट भविष्य में एक संयुक्त कार्यशाला का प्रस्ताव करने पर सहमति हुई। इस अवसर पर डॉ एस. के सिंह, संयुक्त निदेशक (शोध ), डॉ. सोहिनी डे, संयुक्त निदेशक (केडराड); डॉ जी. साई कुमार, प्रभारी, पीएमई सेल, डॉ. केएन भीलेगांवकर, पशुजन स्वास्थ्य विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. आरवीएस पवैया, पैथोलॉजी के विभागाध्यक्ष, डॉ. पी दंडपत, बी एंड एम के विभागाध्यक्ष और डॉ. सुमन कुमार, पशुजन स्वास्थ्य विभाग के वैज्ञानिक उपस्थित रहे।