इमाम हुसैन के पैगाम व तालीमात से दुनिया में अमन व शांति कायम हो सकती है : डॉ कमाल मियां नियाज़ी

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बरेली । फैजान-ए-नियाज़िया वेलफेयर सोसाईटी की जानिब से ऐवाने नियाज़िया ख्वाजाकुतुब में गमे हुसैन व मोहब्बते हुसैन के उनवान विषय पर तकरीरी जलसा मुनाकिद किया गया। तकरीरी जलसे का आगाज हाफिज साजिद नियाजी ने कुराने पाक की तिलावत से किया, वहीं सय्यद मुबारक नियाज़ी ने बारगाहे रसूल में नातो मनकबत का नज़राना पेश किया। जलसे की सरपरस्ती सोसाईटी के बानी डॉ कमाल मियां नियाज़ी ने की और उन्होंने कहा कि ‘आज के इस दौर में किरदारे इमाम हुसैन को समझने और उनके पैगाम को पूरी दुनिया में फैलाने की जरूरत है। कर्बला में अपनी ईमानी ताकत और शहादत देकर लोगों को बता दिया कि आतंकवाद व जुल्म से कभी डरना नहीं चाहिए। इसलिए कर्बला से हमें इज्जत के साथ जिन्दगी गुजारने का सबक मिलता है। इमाम ने कलमा-ए-हक और दीने मुस्तफा बथाने के लिए अपनी व अपने साथियों की कुरबानी देकर दीने इस्लाम को जिन्दा किया और इस्लाम का सर बुलंद कर दिया। इस मौके पर सोसाईटी के अध्यक्ष हमज़ा मियां नियाज़ी ने कहा कि आज के दौर में इमाम हुसैन की तालीमात को सारी दुनिया को बताने की ज़रूरत है। इमाम हुसैन के पैगाम व सीरत से दुनिया में अमन व शांति कायम हो सकती है। क्योंकि इनसे हमें इंसानियत का पैगाम मिलता है। आज जो पूरी दुनिया में हम जलील हो रहे हैं वह हमारी बदअकीदगी व बदआमालिया का नतीजा है। वहीं जलसे की निज़ामत करते हुये यूसुफ हुसैन फ़हमी ने कहा कि गमे हुसैन मनाना सुन्नते रसूल है। और हमें ज्यादा से ज्यादा गमे हुसैन मनाना चाहिए। क्योंकि इनकी कुर्बानी वो कुर्बानी है जो आज तक किसी ने पेश नहीं की और न ताकयामत तक कर सकता है। क्योंकि इमाम हुसैन अपने 72 जांनिसारों के साथ जो शहादत पेश की कल कयामत तक कोई पेश नहीं कर सकता। वहीं फैज़ नियाज़ी ने इमाम हुसैन की सीरत पर तफसील से बयान किया और उनके किरदार पर चलने की हिदायत दी। यहीं फरीद नियाजी ने इमाम हुसैन की शहादत पर फज़ीलत डालते हुये उनके 72 जांनिसारों की कुर्बानी को बयां किया। वहीं जलसे में तकरीर पेश करने वालों में हसीन नियाज़ी, मुस्लिम नियाजी, हाफिज साजिद नियाज़ी,अशरफ नियाज़ी, मुजाहिद नियाज़ी, चाँद नियाज़ी, ज़ैद नियाज़ी, उज़ैफ़ नियाज़ी सैय्यद कैफ़े नियाज़ी, हसीब नियाज़ी, शुजा नियाज़ी, वसीम नियाज़ी, रूफ़ी नियाज़ी ने बारी-बारी इमाम हुसैन की शहादत, उनकी अजमत, उनके किरदार, उनकी सीरत पर अपने-अपने जज़्बात पेश किये,जलसे में जाहिद मियां नियाज़ी, रज़ी मियां नियाज़ी, जामी मियां नियाज़ी, ज़ैन मियां नियाज़ी, मुत्तक़ी मियां नियाज़ी आदि बड़ी तादात में लोग मौजूद रहे। यह जलसा बाद नमाज़ इशा शुरू हुआ जो देर रात तक चलता रहा। आखिर में सलातो सलाम पढ़ा गया और दुआये खैर की गई। इस मौके पर सोसाईटी की जनीब से मौजूदा लोगों को तबर्रुक तकसीम किया गया और तमाम तकरीर करने वालों को हरे रंग की चादर व ईनामात से नवाज़ा गया।

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