एसएस कॉलेज के वाणिज्य विभाग का नोबल एकेडमी नेपाल के साथ पोखरा में 6 दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन शुरू

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शाहजहांपुर। एस० एस० कॉलेज के वाणिज्य विभाग द्वारा नोबल एकेडमी, नेपाल के साथ पोखरा में 6 दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया गया। जिसका विषय था वर्तमान भौतिकवादी युग में धार्मिक पर्यटन के अवसर और चुनौतियां। सम्मलेन में 22 और 23 जून को अकादमिक सत्र आयोजित किये गए जबकि 24 और 25 जून को पोखरा तथा 26 और 27 जून को काठमांडू के प्रमुख धार्मिक स्थलों का भ्रमण करके अवलोकन किया गया।
सम्मेलन का उद्घाटन गंडकी प्रदेश के राज्यपाल दिलीराज भट्ट ने मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्वलित करके किया। इस अवसर पर अयोध्या के पं० सुरेश पांडेय और प्रयागराज के पं० संतोष कुमार ओझा ने मंगलाचरण एवं गणेश वंदना करके सम्मेलन के सफल आयोजन की कामना की। मुख्य अतिथि के रूप में बोलते हुए राज्यपाल महोदय ने कहा कि धार्मिक पर्यटन भारत और नेपाल दोनों देशों की अर्थव्यवस्था का प्रमुख आधार है। उन्होंने कहा कि अयोध्या और जनकपुर के कारण भारत और नेपाल के सांस्कृतिक संबंध अत्यंत प्राचीन और अटूट हैं। आज सभी नेपालवासी अयोध्या जाकर रामलला का दर्शन करने को ललायित हैं। भारतवासी भी बड़ी संख्या में सीताजन्म स्थान, बुद्ध जन्मस्थली, पशुपतिनाथ, मुक्तिनाथ तथा अन्य धार्मिक स्थलों का दर्शन करने नेपाल आते हैं। जिससे दोनों देशों की आय में वृद्धि होने के साथ-साथ संबंधों में मजबूती आती है। नेपाल के पर्यटन में भारत का 60 प्रतिशत से अधिक योगदान है। उन्होंने कहा कि अपनी प्राकृतिक सुन्दरता के कारण नेपाल के पर्यटन में पोखरा का विशेष महत्व है इसीलिए नेपाल सरकार ने पोखरा को नेपाल की पर्यटन राजधानी घोषित किया है। इससे पूर्व सेमिनार के प्रारंभ में विषय स्थापना करते हुए संयोंजक डॉ० अनुराग अग्रवाल ने कहा कि भौतिक सुख की चाहत ने पर्यटन उद्योग को जन्म दिया और शांति की खोज ने धार्मिक पर्यटन को प्रोत्साहित किया। पर्यटकों की बढती संख्या ने यद्यपि आर्थिक विकास के अनेक अवसर प्रदान किये हैं किन्तु वर्तमान भौतिकवादी युग में धार्मिक पर्यटन में आचरण की पवित्रता, संस्कृति की सुरक्षा और शारीरिक-मानसिक शुद्धता बनाये रखना पर्यटकों के लिए एक बड़ी चुनौती हैं। पर्यटन उद्योग के लिए भी विभिन्न प्रकार के पर्यटकों की मांग के अनुसार कम लगत पर उच्च कोटि की सुविधाएँ उपलब्ध कराना एक चुनौती है।

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भारत से मुख्य वक्ता के रूप में महात्मा ज्योतिबा फुले रूहेलखंड विश्वविद्यालय, बरेली के प्रो० पुष्पेंद्र बहादुर सिंह ने बोलते हुए कहा कि धार्मिक पर्यटन के क्षेत्र में युवाओं के बड़ते रुझान ने रोजगार तथा विकास के अनेक अवसर उत्पन्न किये हैं किन्तु वृद्धों, युवाओं और महिलाओं को उनकी अवस्था और मनोविज्ञान के अनुसार सुविधाएँ व सेवाएँ उपलब्ध कराने की चुनौती भी पर्यटन उद्योग के सामने उठ खड़ी हुयी है। धार्मिक पर्यटन को बढावा देने के लिए सरकारी स्तर पर भी काम किये जाने की आवश्यकता है। उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता करते हुए नोबल एकेडमी, पोखरा के प्रबंध समिति के अध्यक्ष विशेश्वर आचार्य ने कहा कि भारत और नेपाल के बीच धार्मिक पर्यटन को और अधिक सुविधाजनक बनाने के लिए भारत के प्रमुख धार्मिक स्थलों से नेपाल को सीधे हवाई यात्रा प्रारंभ की जानी चाहिए। अभी भारत से सामान्यतः हवाई यात्रा सुविधा केवल दिल्ली से काठमांडू को है। उद्घाटन सत्र में विशिष्ट अतिथि के रूप में नेपाल से पोखरा विश्वविद्यालय के कुल सचिव प्रो० दीपक भंडारी, डॉ० संदेशदास श्रेष्ठ, डॉ० दयाराज धाकल, प्रो० सरोज कोइराला, सियालामी छामे तथा भारत से प्रो० अर्चना चंद्रा, प्रो० मधु अरोड़ा, डॉ० प्रियंका सक्सेना, डॉ० अजय वर्मा आदि उपस्थित रहे। राज्यपाल तथा अन्य अतिथियों ने एस०एस० कॉलेज के अंग्रेजी विभाग की डॉ० बरखा सक्सेना, डॉ० अरुण कुमार यादव और आर्य महिला डिग्री कॉलेज की डॉ० रानू दुबे द्वारा सम्पादित पुस्तक, इंग्लिश एंड ग्लोबल डेवलपमेंट तथा रूहेलखंड विश्वविध्यालय के कुलपति प्रो० के पी सिंह, प्रो० तुलिका सक्सेना, राघवेन्द्र और विशेष कुमार गंगवार द्वारा सम्पादित पुस्तक कंटेम्पररी इनसाइट्स ऑन एनवायर्नमेंटल सस्टेनेबिलिटी फॉर अचिविंग सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल्स तथा प्रो० तुलिका, राघवेन्द्र एवं प्रो० नीतू सिंह द्वारा सम्पादित पुस्तक उत्तर प्रदेश रोल इन अचिविंग इंडीयाज फाइव ट्रिलियन इकॉनमी का विमोचन भी किया। इस सत्र में नावेल एकेडमी पोखरा के साथ न्यू देहली इंस्टिट्यूट ऑफ़ मैनेजमेंट, व्यावसायिक प्रशासन विभाग रूहेलखंड विश्वविद्यालय बरेली, वाणिज्य विभाग, ख्वाजा मुइनुद्दीन चिश्ती भाषा विश्वविद्यालय लखनऊ और राजेंद्र सिंह रज्जू भैय्या विश्वविद्यालय, प्रयागराज ने एम०ओ०यु० भी हस्ताक्षर किये। एस०एस० कॉलेज के वाणिज्य विभाग के डॉ० अनुराग अग्रवाल ने भी न्यू देहली इंस्टिट्यूट ऑफ़ मैनेजमेंट, व्यावसायिक प्रशासन विभाग रूहेलखंड विश्वविद्यालय बरेली और ग्लोबल कॉलेज इंटरनेशनल नेपाल के साथ एम०ओ०यु० हस्ताक्षर किये। उद्घाटन सत्र के उपरांत सम्मेलन के विषय पर विषय विशेषज्ञों की परिचर्चा आयोजित की गई। जिसमें नेपाल की ओर से पर्यटन विशेषज्ञ डॉ० रामजी शर्मा, लकी क्षेत्री, टीकाराम सपकोटा, नबीन पोखराल तथा भारत की ओर से दिल्ली की प्रो० आभा मित्तल, बरेली विश्वविद्यालय की प्रो० तुलिका सक्सेना ने अपने विचार प्रस्तुत किए।

अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन के दूसरे दिन दो तकनीकि सत्रों का आयोजन किया गया। जिसमें शिक्षक वर्ग से 24 और शोधार्थी वर्ग से 21 प्रतिभागियों को शोध पत्र प्रस्तुत करने का अवसर दिया गया। प्रथम तकनीकि सत्र की अध्यक्षता नेपाल के डॉ० जी०सी० सूर्या ने की और मुख्य वक्ता के रूप में जयपुर के डॉ० एस०एस० यादव ने अपने विचार प्रस्तुत किए। द्वितीय तकनीकी सत्र की अध्यक्षता नेपाल के डॉ० उमेश यादव ने की, जबकि मुख्य वक्ता के रूप में लखनऊ के डॉ० नीरज शुक्ल ने प्रतिभागियों को संबोधित किया। मूल्यांकक मंडल के निर्णय के अनुसार शिक्षक वर्ग में नेपाल से लूना थापा और समीक्षा कंडेल को तथा भारत से प्रयागराज की डॉ. प्रियंका सक्सेना और बिजनौर के डॉ. राजीव अग्रवाल को एवं शोधार्थी वर्ग में नेपाल से आशीष पहारी और मंदीप गुलाल को तथा भारत से शाहजहांपुर के देवेन्द्र प्रताप सिंह और अयोध्या के रामलखन को बेस्ट पेपर अवार्ड प्रदान किया गया। सम्मेलन के समापन सत्र में मुख्य अतिथि के रूप में दिल्ली की डॉ० बिंदु कुमार ने बोलते हुए कहा कि धार्मिक और आध्यात्मिक पर्यटन में मानव को सुख और शांति दोनों एक साथ प्राप्त होती हैं। इस प्रकार के पर्यटन से न केवल सांस्कृतिक और आर्थिक लाभ होते हैं अपितु राजनीतिक संबंध भी सहयोगात्मक बनते हैं। कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में डॉ. एहेतेशाम अंसारी, डॉ. राजेश शर्मा, डॉ. त्रिलोचन शर्मा, डॉ. मनीष कुमार, डॉ. वेद प्रकाश, डॉ. सौरभ वर्मा, डॉ. अमित देवल आदि उपस्तिथ रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए अयोध्या के डॉ० बी०के० झा ने कहा कि भारत और नेपाल का रोटी-बेटी का संबंध है, जिसे धार्मिक पर्यटन ने और अधिक मजबूत किया है। उन्होंने कहा चूंकि नेपाल में हिंदू धर्म के अनेक धार्मिक स्थल है इसलिए नेपाल भारतीय पर्यटकों की पहली पसंद है। संयोजन सचिव डॉ० कमलेश गौतम ने सेमिनार की रिपोर्ट प्रस्तुत करते हुए कहा कि सेमिनार में भाग लेने हेतु भारत के विभिन्न क्षेत्रों से 148 लोग पोखरा आए किंतु समयाभाव के कारण उत्कृष्ट 45 शोध पत्रों को ही प्रस्तुतीकरण का अवसर दिया जा सका शेष प्रतिभागियों को ऑनलाइन शोध-पत्र प्रस्तुत करने का अवसर दिया जाएगा। समापन सत्र में विभिन्न विषयों के साहित्य सृजन के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान करने वाले विद्वानों, शिक्षको तथा शोधार्थियों को अनेक सम्मानों से अलंकृत भी किया गया। साहित्य भूषण सम्मान से डॉ. बिंदु कुमार, बिशेस्वर आचार्य, प्रो. आर.के. आजाद, डॉ. पुलकित अग्रवाल, डॉ. प्रमोद नाग, जिगीशाबेन मारुतिसेन परमार, प्रो. तूलिका सक्सेना, कृष्णा केसी और डॉ. पंकज यादव को सम्मानित किया गया। साहित्य रत्न सम्मान से डॉ. रुचि द्विवेदी, प्रो० मधु अरोड़ा, डॉ. राजीव कुमार अग्रवाल, डॉ. कोमल मित्तल, राघवेंद्र, प्रो. त्रिलोचन शर्मा को सम्मानित किया गया। साहित्य श्री सम्मान से बृज लाली और विनय देवलाल को सम्मानित किया गया। साहित्य शिरोमणि सम्मान से डॉ. अंजू सिंह को तथा साहित्य सेवा सम्मान से डॉ. ऊषा सिंह को विभूषित किया गया। समापन सत्र में नेपाल की छात्राओं कविता, बिनीता, अलीजा, चीना, सूर्या, ईश्वरी, अंजलि आदि ने नेपाली लोक नृत्य प्रस्तुत किये। जबकि नितेश गुप्ता और अंकित मिश्रा के निर्देशन में भारतीय छात्राओं सिद्धि दुबे और वैष्णवी मिश्रा ने राजस्थानी कालबेलिया, द्रोपदी चीरहरण और महिषासुर वध विषयों पर आधारित नृत्य प्रस्तुत करके दर्शको का दिल जीत लिया। नेपाल के डॉ० दिपेंद्र पहाड़ी के संचालन में हुए कार्यक्रम के अंत में भारत की ओर से अयोध्या के प्रो० मिर्जा साहब शाह ने सभी का धन्यवाद ज्ञापित किया। और शीघ्र ही पुन: एक और अंतर्राष्ट्रीय सेमिनार नेपाल में आयोजित किये जाने की आशा व्यक्त की। दो दिवसीय अकादमिक सत्र पूर्ण होने के पश्चात चार दिवसीय धार्मिक पर्यटन का आयोजन किया गया। जिसमे पोखरा के विंध्यवासिनी मंदिर, गुप्तेश्वर गुफा, महादेव मंदिर, शांति मंदिर, बौद्ध स्तूप और काठमांडू के पशुपतिनाथ, बुद्धेश्वर, पार्वती शक्ति पीठ, संघ महादेव, दोलेश्वर महादेव, कृष्णा मंदिर, स्वयंभूनाथ, जल नारायण आदि मंदिरों के दर्शन के साथ सम्मलेन समाप्त हुआ। सम्मलेन के संयोजक डॉ अनुराग अग्रवाल ने बताया कि वाणिज्य विभाग द्वारा अगले वर्ष मार्च के प्रथम सप्ताह में त्रिभुवन विश्वविद्यालय काठमांडू नेपाल में तीन दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया जाना प्रस्तावित है।

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