बरेली में वेंकटेश्वर मंदिर में 54वा वार्षिक हवन पूजन के बाद निकाली पालकी यात्रा

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बरेली। तिरुपति वेंकटेश्वर मंदिर में आज 54 वा वार्षिक पूजा को दक्षिण भारत से आए प्रकांड पंडित रंगनाथ आचार्य ने विधि विधान से पूजा कराई। हवन पूजा में मंदिर कमेटी के राजेश सिंह उर्फ विपुल जी, प्रवीण शर्मा, शंकर दास, निर्भय सक्सेना एस के त्यागी,अरोरा राज कुमार गुप्ता, प्रांजल यादव, मधुरिमा सक्सेना, रत्ना दरयाना आदि भक्तो ने हवन में भाग लिया। सायंकाल मंदिर में भगवान वेंकटेश्वर जी को पालकी में बैठाकर परिसर में यात्रा निकाली गई। और गोविंदा के उद्घोष से परिसर गुंजायमान रहा। मंदिर को फूलो से सजाया गया । प्रत्येक आस्थावान व्यक्ति की यह कामना होती है कि वह कम से कम एक बार भगवान ‘तिरुपति वेंकटेश्वर मंदिर’ महाराज के दर्शन करके अपने मानव जीवन को धन्य कर लें। दक्षिण भारत में तिरुमला की पहाड़ियों पर स्थापित भगवान ‘तिरुपति वेंकटेश्वर मंदिर’ को कलियुग में साक्षात वैकुण्ठ माना जाता है। पर महंगी व कष्टसाध्य यात्रा होने के कारण अधिकांश परिवार कलियुग के वैकुण्ठ का दर्शन पूजन करने से वंचित रह जाते हैं । उनकी आस्था में आने वाली इस कभी को पूर्ण करने के लिए बरेली के राजेन्द्रनगर के पटेलनगर क्षेत्र में लगभग 54 वर्ष पूर्व ‘तिरुपति वेंकटेश्वर मंदिर’ की स्थापना की गयी थी। दक्षिण भारतीय वास्तुकला के अद्भुत नमूने के रूप में विख्यात पटेलनगर स्थित ‘तिरुपति वेंकटेश्वर मंदिर’ का वार्षिकोत्सव जून माह में प्रतिवर्ष परम्परागत ढंग से धूमधाम से मनाया जाता है। मंदिर कमेटी से जुड़े प्रवीण शर्मा के अनुसार इस बार 54वा वार्षिक पूजन हवन एवम पालकी यात्रा के साथ हुआ। बरेली में बने इस ‘तिरुपति वेंकटेश्वर मंदिर’ का उत्तर प्रदेश के तत्कालीन राज्यपाल जी. सी. रेड्डी ने 15 अप्रैल 1970 को उद्घाटन किया था। इस मंदिर की विशेषता यह है कि यहां सभी पूजा अर्चना आंध्र प्रदेश में स्थापित मुख्य देव स्थान के अनुसार दक्षिण भारतीय ढंग से पुजारियों के द्वारा ही सम्पन्न करायी जाती है। दक्षिण भारतीय लोगों की भावनाओं का ध्यान रखते हुए आई. वी. आर. आई. कर्मियों ने वर्ष 1969 में ‘तिरूपति बाला जी समिति’ बनायी थी। बाद में इस कमेटी में मुख्य रूप से डा. एम.एस. शास्त्री, वैज्ञानिक डा. सदागोपालन, डा. जे. आर. राव, पूर्व एम. एल. सी. स्वर्गीय डा. ए पी सिंह, एम.आर. लघाटे, निर्भय सक्सेना, शंकर दास आदि को शामिल किया गया। वर्ष 1977 में मंदिर के साथ ही ‘मालती दलाल मंडपम’ का निर्माण कराया गया।

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दूर से ही लाल रंग के मंडपम वाले इस वेंकटेश्वर मंदिर की छटा देखते ही बनती है। स्थापत्य की दृष्टि से भी इसमें वास्तु शास्त्र का भी ध्यान रखा गया है। भगवान वेंकटेश्वर की विशाल मूर्ति के दर्शन से भक्तों को आत्मिक शांति मिलती है। मंदिर के दरवाजे पर ही तिलक, शंख, चक्र उत्र्कीण किये गये हैं बाद में मंडप के दायीं ओर गणेश जी और वायीं ओर अंडाल देवी, अन्नपूर्णा देवी की स्थापना की गई। इसके बाद मंदिर परिसर में पदमावती देवी, वजरंग बली, भगवान शंकर, दुर्गा माता, राधा कृष्ण के मंदिरों के साथ ही शनिदेव महाराजा एवं तुलसी का स्थल भी बनाया गया। मुख्य मंदिर और परिसर में अन्य मंदिरों का वास्तुशिल्प दक्षिण शैली का ही है और मंदिर के गेट पर दक्षिण भारत की परंपरा के अनुसार एक विशाल गोपुरम् भी बनाया गया है। मंदिर का संचालन कैम्फर का मालती दलाल ट्रस्ट करता है। मंदिर ट्रस्टी राजेश उर्फ विपुल सिंह के अनुसार मंदिर परिसर में शीघ्र हीअन्य कार्य कराने की भी योजना है। मंदिर के पुजारी मध्यम कुमार हैं।

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