बाबा भोलेनाथ मेरी नैया को उबारो ना..राम कथा में उमड़ रही है श्रद्धालुओं की भारी भीड़

WhatsApp-Image-2024-02-28-at-19.12.13
WhatsAppImage2026-02-15at42216PM1
previous arrow
next arrow

शाहजहांपुर। मुमुक्षु आश्रम में श्रीराम कथा के चौथे दिन श्रद्धालुओं की भारी भीड़ के बीच कथा व्यास कौशल जी महाराज ने कथा को आगे बढ़ाते हुए कहा कि ऋषि वाल्मीकि के आश्रम में प्रभु श्रीराम, माता सीता एवं लक्ष्मण आदिकवि वाल्मीकि जी से पूछते हैं कि ऋषिवर हमें किस दिशा में जाना चाहिए । तब ऋषि वाल्मीकि जी ने प्रभु श्रीराम से कहा कि आप तो त्रिकालदर्शी हैं, आप को भला हम क्या बताएंगे। फिर भी राम के आग्रह करने पर उन्होंने कहा कि प्रभु आप चित्रकूट में जाकर निवास करो।

ReferralCodeLLVR11
previous arrow
next arrow
WhatsAppImage2023-12-28at122820
previous arrow
next arrow
WhatsAppImage2024-06-13at122213
previous arrow
next arrow

श्रीराम सीता व लक्ष्मण सहित चित्रकूट की ओर चल पड़े। चित्रकूट में श्रीराम जी के आने की खबर एक क्षण में चहुं ओर पहुंच गई। चित्रकूट के सभी साधु संत श्रीराम का दर्शन करने आ गये। सभी संतो को राम ने सादर प्रणाम करके उनका आशीष प्राप्त किया। चित्रकूट के कोल किरात भी राम जी के चित्रकूट पधारने का संदेश पाते ही दौड़े चले आए और कुछ न कुछ भेंट प्रभु राम के चरणों में रखकर पूरे मनोभाव से कुछ दूरी पर बैठ गये। कोल किरात बोले- प्रभु आप हमारे स्वामी हो।कथा व्यास ने मातृ पितृ भक्त श्रवण कुमार की कथा के प्रसंग को सुनाया। श्रवण कुमार अपने माता पिता की अंतिम इच्छा की पूर्ति के लिए उन्हें कंधे पर बिठाकर चारों धाम की यात्रा कराने के लिए चले। राह में जंगल पड़ा और माता पिता को प्यास लगी। तब वे अपने प्यासे माता-पिता के लिए जल लेने निकल पड़े। अयोध्या के राजा दशरथ भी वहाँ शिकार खेलने गये थे। दशरथ ने समझा कि कोई हाथी जल पी रहा है और इसी भ्रम में उन्होंने शब्दभेदी बाण चला दिया जिससे श्रवण कुमार स्वर्ग सिधार गए। श्रवण कुमार के अंधे माता पिता ने पुत्र वियोग में विलाप करते करते वन में ही अपने प्राण त्याग दिए। किंतु उन्होंने अपने पुत्र की मौत का जिम्मेदार दशरथ को ठहराया और उन्हें श्राप दिया कि जैसे आज मैं अपने पुत्र वियोग में प्राण त्याग रहा हूं, हे राजन ठीक वैसे ही तुम्हें भी अपने पुत्र के वियोग में प्राण त्यागने पड़ेंगे। आगे चल यही श्राप फलीभूत हुआ। भरत विश्वामित्र का संदेश पाकर अयोध्या आते हैं। वहाँ के सूनेपन को देखकर भरत माता कैकेई से इसका कारण पूछते हैं। भरत को जैसे ही अपने पिता दशरथ के गोलोकवासी होने की बात मालूम पड़ी, वे विलाप करते हुए पछाड़ खाकर भूमि पर गिर पड़े। कथा व्यास ने कहा आप जैसा कर्म करोगे वैसा ही फल पाओगे, भले ही आप राजा महाराजा या भगवान ही क्यों न हों। कथा का समापन आरती एवं प्रसाद वितरण से हुआ।

प्रसाद वितरण में राजीव मेहरोत्रा , राम कुमार सिंह भदौरिया का योगदान रहा। आरती रामचंद्र सिंघल ,उमा सिंघल, कटरा के विधायक वीर विक्रम सिंह प्रिंस,राम मोहन अग्रवाल ,सुषमा अग्रवाल,हरेंद्र नाथ त्रिपाठी विभा त्रिपाठी, कमलेश त्रिवेदी,मधुलिका त्रिवेदी, गोपाल मोहन रस्तोगी, विनय शर्मा ने की। संचालन डा. अनुराग अग्रवाल ने किया।इस अवसर पर महामंडलेश्वर स्वामी हरिहरानंद सरस्वती, स्वामी अभेदानंद, स्वामी वेदांत प्रकाश, स्वामी पूर्णानंद, स्वामी हरिदास, स्वामी आदित्य चैतन्य , बाबूराम गुप्ता, राजीव अग्रवाल, विनोद सर्राफ, राधे मोहन सक्सेना,अलका सेठ,पिंकी सेठ,रवि बाजपेयी, मनोज अग्रवाल, नीतू चौहान, नरेश मेहरोत्रा,अश्लेषा अवस्थी, जगदीश प्रसाद वर्मा, प्रदीप कुमार वर्मा, हरिश्चंद्र श्रीवास्तव , श्री प्रकाश डबराल, राम निवास गुप्ता, मीना शर्मा, आदि उपस्थित रहे।

WhatsAppImage2024-10-20at41111PM1
previous arrow
next arrow
WhatsAppImage2023-04-17at53854PM4
previous arrow
next arrow

You may have missed

Home
Live TV
VIDEO NEWS
Verified by MonsterInsights