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Uttarakhand

हरिद्वार की सायं कालीन गंगा आरती का भी है विशेष आकर्षण

April 10, 2023By admin0 comments
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हरिद्वार । भारत के सनातन धर्म को सबसे प्राचीन धर्म माना गया है। इसी प्राचीन सनातन धर्म वाली परपंरा में जिन सात पुरियों का उल्लेख होता आया है उस में वर्तमान के उत्तराखंड के हरिद्वार का भी सर्वाधिक महत्व है। हरिद्वार की सायं कालीन गंगा आरती का भी विशेष आकर्षण है। आज जरूरत इस बात की है धर्मस्थलों पर हम आप सभी लोग पर्यटक नही भक्त बन कर श्रद्धा के साथ जाएं और गंदगी भी नहीं फैलाएं तभी गंगा घाट की सफाई कायम रहेगी। आज हरिद्वार अपने धार्मिक महत्त्व के अतिरिक्त भी, राज्य के एक प्रमुख औद्योगिक केन्द्र के रूप में, तेज़ी से विकसित हो रहा है। यहां भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स तो था ही अब बाबा राम देव के योग के बाद उनकी पतंजलि के उत्पाद भी विश्व में धूम मचा कर बड़ी बड़ी एफ एम जी कंपनियों को भी टक्कर दे रहे हैं। केंद्र में नरेंद्र मोदी एवम उत्तराखंड में धामी सरकार इस धार्मिक नगरी के सुनियोजित विकास को कटिबद्ध है। नए नए उपरिगामी पुल, चोड़ी सड़क, वाहन पार्किंग, हरियाली भरे पार्क वाला वातावरण तथा विकास की कई योजनाएं यहां चल रही हैं। धार्मिक स्थल हरद्वार दो शब्दों हरि और उनके द्वार से मिलकर बना है जिसमें भगवान हरि का तात्पर्य भगवान विष्णु से है। चूंकि यहीं से होकर बद्रीनाथ ( विष्णु भगवान तीर्थ ) को मार्ग जाता है। इसी लिए इसे ‘हरिद्वार’ कहते हैं। भगवान शिव भक्त इसे ‘हरद्वार’ कहते हैं क्योंकि यहीं से भगवान केदारनाथ यानि (शिव भगवान तीर्थ) का भी रास्ता जाता है। उत्तराखंड का हरिद्वार जिला पवित्र हिंदू धाम है। 2011 की जनगणना के अनुसार 18 लाख की आबादी बाला हरिद्वार जिला नगर निगम बोर्ड से नियंत्रित है। आज हरिद्वार अपने धार्मिक महत्त्व के अतिरिक्त भी, राज्य के एक प्रमुख औद्योगिक केन्द्र के रूप में, तेज़ी से विकसित हो रहा है।

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यहां भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स तो था ही अब बाबा राम देव के योग की धूम रही। प्राचीन नगरी हरिद्वार हिन्दुओं के सात पवित्र स्थानों में से एक है। उत्तराखंड में बसे 3139 मीटर की ऊंचाई पर स्थित अपने स्रोत गोमुख (गंगोत्री) से निकली गंगा 253 किलोमीटर की यात्रा करके गंगा नदी हरिद्वार में मैदानी क्षेत्र में प्रथम प्रवेश करती है। इसलिए हरिद्वार को ‘गंगाद्वार’ के नाम से भी जाना जाता है। हरिद्वार का अर्थ “हरि (ईश्वर) का द्वार” भी होता है। प्राचीन हिंदू धार्मिक ग्रंथों एवम कथाओं में बताया गया है हरिद्वार वह स्थान है जहाँ समुंद्र मंथन के दौरान निकले अमृत कलश को लेकर जब महर्षि धन्वन्तरी जा रहे थे तो अमृत कलश को राक्षसों की छीना झपटी के दौरान उस पवित्र कलश से अमृत की कुछ बूँदें भूल से घड़े से गिर गयीं । धार्मिक मान्यता है कि अमृत कलश से जिन चार स्थानों पर अमृत की बूंदें गिरी थीं। वे स्थान हैं :- उज्जैन, हरिद्वार, नासिक और प्रयाग। इन चारों स्थानों पर क्रमबार से हर 12 वें वर्ष महाकुम्भ आयोजन होता है। विश्व से करोड़ों तीर्थयात्री और पर्यटक इन कुंभ स्थलों के अलावा हरिद्वार भी हर वर्ष आते रहते हैं और हरिद्वार में गंगा नदी के तट पर हर की पौड़ी पर स्नान कर पुण्य कमाते हैं। एक धार्मिक मान्यता है जहाँ पर अमृत कलश की बूंदें गिरी थीं उसे ही हर की पौड़ी पर ब्रह्म कुण्ड माना जाता है। ‘हर की पौड़ी’ हरिद्वार का सबसे पवित्र घाट माना जाता है। यहाँ स्नान करना मोक्ष प्राप्त करवाने वाला माना जाता है। इसके अलावा यहां गौ घाट, सुभाष घाट अस्थि विसर्जन के लिए अस्थि घाट भी है। हिंदुओं का हरिद्वार एक पवित्र स्थान है। हरिद्वार से गंगा पहाड़ों से उतर कर समतल मैदानों में अपनी यात्रा शुरू करती है | गंगा को पृथ्वी पर जल का पर्याय माना जाता है | ऐसी मान्यता है कि पृथ्वी पर जल का आगमन गंगा के रूप में राजा भगीरथ द्वारा संभव हुआ था इसलिए गंगा का एक नाम भागीरथी भी है | बीसवीं सदी की शुरुआत तक, देश भर से लोग हरिद्वार तक आते थे और फिर यहाँ से पैदल हिमालय की ऊंचाइयों पर स्थित तीर्थस्थानों के लिए गंगा के किनारे किनारे पैदल ही अपनी यात्रा किया करते थे | हरिद्वार में पूर्व में जैसे तखत बिछा कर हर की पौड़ी पर पण्डे बैठे दिखते थे, ऐसे ही पण्डे गंगा किनारे पूरे रास्ते में (दूर-दूर) अपने स्थान बना…

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