बदायूं क्लब, बदायूं में बासन्ती काव्य संध्या का सुरुचिपूर्ण आयोजन में कविताओं ने समां बांधा

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बदायूं। बदायूं क्लब, बदायूं एवं हिन्दी साहित्य भारती (अर्न्तराष्ट्रीय) के संयुक्त तत्वावधान में बसन्ती पंचमी के अवसर क्लब सभागार में बासन्ती काव्य संध्या का आयोजन किया गया। काव्य संध्या में कवियों ने कविताओं द्वारा मां सरस्वती का स्तवन भी किया एवं बसन्त के पर्व पर अपनी कवितायें प्रस्तुत कर समां बांध दिया। कार्यक्रम की मुख्य अतिथि श्रीमती दीपमाला गोयन अध्यक्ष, नगरपालिका, बदायँू, कार्यक्रम अध्यक्ष साहित्यकार डॉ. रामबहादुर व्यथित एवं पीलीभीत से पधारे अतिथि कवि श्री गीतेश राज ‘नक्श’ द्वारा मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्जवलित कर शुभारम्भ किया। कवि विशाल गाफिल ने सरस्वती वन्दना प्रस्तुत की।

कार्यकारिणी की ओर सभी अतिथियों एवं कवियों का माल्यार्पण कर एवं प्रतीक चिन्ह देकर सम्मान किया गया। मुख्य अतिथि न. पा. अध्यक्ष दीपमाला गोयल द्वारा बसन्त पंचमी की बधाई देते हुये कहा, मां सरस्वती ज्ञान की देवी है, साहित्यकार सरस्वती पुत्र हैं, और उनके बीच आकर मुझे गर्व हो रहा है, उन्होंने आयोजन के लिए सभी कार्यकारिणी सदस्यों को बधाई दी। तदनुपरान्त काव्य गोष्ठी का शुभारम्भ हुआ। पीलीभीत से पधारे शायर गीतेश राज नक्श ने कहा, न जाने कौन से कोने में जाकर मुंह छुपाता है, हमारे जुगनुओं से रोज़ सूरज हार जाता है। अध्यक्षता कर रहे वरिष्ठ कवि डॉ. रामबहादुर व्यथित ने कहा, किसमें ताकत है, जम्मू को बम से उड़ाये, किसमें हिम्मत है, लाल किले की प्राचीर गिराये। गीतकार कुमार आशीष ने कहा, ऋतुओं के राजा की आमद का अंदाज निराला है, पत्ता पत्ता, गुन्चा-गुन्चा शर्मीला हो जाता है। क्लब के सचिव एवं कवि डॉ. अक्षत अशेष ने कहा, हे माता स्वर स्वामिनी! दो मुझको वरदान, मेरे स्वर को सर्वदा मिले यहां सम्मान। ग़ज़लकार विशाल गाफिल ने कहा, खुद तुम सारी वारिश देखो खेत ये बंजर हम देखें, तुम देखो तालाब खुशी के ग़म के संमदर हम देखें। डॉ. शुभ्रा माहेश्वरी ने कहा, मेरी कलम को मेरी तलवार कर दे, नवचेतना की मां इसमें धार भर दे, चले सत्यता के लिए ही ये सदा, मां शारदे मेरी कलम में ऐसा संचार भर दे। कवि अनिल रस्तोगी ने कहा, सारी कलियां खिल उठीं महके सारे पात, बासन्ती दिन हो गये, हुई बसन्ती रात।। कवि अभिषेक अनंत ने कहा, आये हैं ऋतुराज करेंगे, कष्टों का बस अन्त, प्यार लुटाने खुशी बढ़ाने आया पुनः बसन्त।। कवियत्री डॉ. कमला माहेश्वरी ने कहा, सिद्ध पंचमी आ गई, ऋतु बसन्त की आज, भक्ति, शक्ति, मुक्ति प्रभा, सजा सुधा की साज।

कवियत्री सरिता चौहान ने कहा, बासन्ती अभिनंदन करने को हुआ सूर्य आदेश, आसमान की खुली अटैची से निकला परिवेश। कार्यक्रम के अन्त सांस्कृतिक सचिव रविन्द्र मोहन सक्सेना ने सभी का आभार व्यक्त किया। संयोजन डॉ. अक्षत अशेष एवं संचालन अभिषेक अनंत ने किया। आयोजन में क्लब पदाधिकारी अनूप रस्तोगी, दीपक सक्सेना, मनीष सिंघल, संजय रस्तोगी, वरिष्ठ सदस्य के. एस. गुप्ता, डॉ. भास्कर शर्मा, राजीव नारायण रायजादा, नरेश चन्द्र शंखधार, प्रदीप शर्मा सहित राहुल चौबे, सुमित मिश्रा, पंकज शर्मा, इकबाल असलम, अरविंद गुप्ता, ज्वाला प्रसाद गुप्ता, राजेश मौर्य, रजनीश शर्मा, ब्रजेश मिश्रा आदि उपस्थित रहे।

हिन्दी के उत्थान, प्रचार एवं प्रसार के 24 देशों में कार्यरत हिन्दी साहित्य भारती (अर्न्तराष्ट्रीय) संस्था के प्रान्तीय संगठन मंत्री जीतेश राज ने प्रांतीय मंत्री पद हेतु बदायूं गीतकार अभिषेक अनंत के नाम का प्रस्ताव दिया, जिस पर संस्था के प्रान्तीय संगठन महामंत्री एवं क्लब के सचिव डॉ. अक्षत अशेष सहर्ष सहमति व्यक्त की है। डॉ. अक्षत अशेष ने बताया कि जल्द बदायूंजनपद में संस्था की जनपदीय ईकाई का गठन कर हिन्दी के उत्थान के लिए विशेष आयोजन किये जायेंगे।

                                 
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