तीन दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार का समापन
शाहजहांपुर, स्वामी शुकदेवानंद स्नातकोत्तर महाविद्यालय के वाणिज्य संकाय में “वोकल फॉर लोकर- स्वावलंबी भारत की ओर एक कदम” विषय पर चल रहे तीन दिवसीय सेमिनार का समापन हो गया। समापन सत्र के मुख्य अतिथि हिंदू कॉलेज मुरादाबाद के वाणिज्य विभाग के अध्यक्ष प्रो एन यू खान का स्वागत डॉ0 के के वर्मा ने और विशिष्ट अतिथि हिंदू कॉलेज मुरादाबाद के ही वाणिज्य विभाग के प्रो संजय रस्तोगी का स्वागत डा सन्तोष प्रताप सिंह ने अंगवस्त्र एवं स्मृति चिन्ह भेंट करके किया। सत्र के आरंभ में, “अनुभूति” शीर्षक से स्वामी धर्मानन्द सरस्वती के प्रवचनों पर आधारित एक पुस्तक का विमोचन भी किया गया जिसका संपादन इलाहाबाद विश्विद्यालय की संस्कृत विभाग की अध्यक्ष प्रो राज लक्ष्मी वर्मा ने किया है।

सत्र की अध्यक्षता प्रो0 ए0 के0 मिश्र ने की। डा कमलेश गौतम के संचालन में हुए कार्यक्रम में बोलते हुए डा मिश्रा ने आत्मनिर्भर भारत के लिए वोकल फॉर लोकल नीति को अतिआवश्यक बताया। महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो0 आर0 के0 आजाद जी ने कहा कि देश के तीव्र विकास के लिए भारत का आत्मनिर्भर होना जरूरी है। मुख्य अतिथि प्रो0 एन0 यू0 खान ने कहा कि वोकल फॉर लोकल प्रोग्राम देश की निर्मित वस्तुओं को प्रचारित कर रहा है ।

अब भारत की जनता देशी वस्तुओं का प्रयोग बढ़ा रही है। स्टार्टअप के माध्यम से भी देश में रोजगार बढ़ा है। पहले इलेक्ट्रॉनिक सामान को आयात किया जाता था अब बहुत कुछ भारत में बन रहा है। अधिकतर सरकारी रिकॉर्ड डिजिटल हो गए हैं एवं भ्रष्टाचार निमंत्रण में है। विशिष्ट अतिथि प्रो0 संजय रस्तोगी ने कहा कि वोकल फॉर लोकल कार्यक्रम देश की अर्थव्यवस्था को गति प्रदान कर रहा है। स्वदेशी वस्तुओं को समर्थन देना अति आवश्यक है।उन्होंने कहा कि पुरानी कहावत “नेकी कर दरिया में डाल” आज बदल चुकी है और वर्तमान में यह कहावत है कि “कार्य कर आसमां में उछाल” । ताकि सारी दुनिया काम को जान सके।

सेमीनार संयोजक उप प्राचार्य एवं वाणिज्य विभागाध्यक्ष प्रो0 अनुराग अग्रवाल ने कहा कि कोरोना जैसी महामारी के काल में, वोकल फॉर लोकल ही स्वावलंबन का मूल मंत्र सिद्ध हुआ। कार्यक्रम के अंत में प्रोफेसर देवेंद्र सिंह ने आभार व्यक्त किया ।कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान से हुआ। इस अवसर पर डॉ0 सचिन खन्ना, डॉ0 अजय कुमार वर्मा, अंकुर अवस्थी, तुषार रस्तोगी आदि छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।














































































