मानवाधिकार दिवस पर महिलाओं और बच्चों के अधिकार सुरक्षित रखने को मंथन

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बदायू। आवास विकास स्थित राजकीय महाविद्यालय में राजनीतिक विज्ञान विभाग के तत्वावधान में अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार दिवस का आयोजन किया गया। इस अवसर पर विचार गोष्ठी के साथ एक कार्यशाला का भी आयोजन किया गया जिसमें विभागाध्यक्ष डॉ राकेश कुमार जायसवाल ने
भारतीय दंड विधि के अनुसार महिलाओं की गरिमा के विरुद्ध हो रहे प्रमुख अपराधों का उल्लेख करते हुए उसके विरुद्ध शिकायत करने के तौर तरीकों से परिचित कराया तथा अपराधी को दंडित करने वाली विभिन्न धाराओं का भी उल्लेख किया। डॉ जायसवाल ने आईपीसी एक्ट की धारा 294, 304,313, 314 ,326, 354 ए, 354बी के साथ ही 366ए और बी 372, 373, 376, 498ए और 509 पर प्रकाश डाला।
इतिहास विभाग के प्रभारी डॉ अनिल कुमार ने घरेलू हिंसा से पीड़ित को अनुतोष देने तथा हेल्पलाइन नंबर 1090, 112 एवम 181 से परिचित कराया। डॉ संजय कुमार ने दहेज प्रतिषेध अधिनियम 1961 का उल्लेख किया तथा यौन उत्पीड़न की जांच व कार्रवाई की विधि से परिचित कराया। डॉ सचिन कुमार राघव पॉक्सो एक्ट 2012 पर प्रकाश डालते हुए दंड प्रक्रिया से छात्राओं को अवगत कराया।

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राजनीति विज्ञान के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ दिलीप कुमार वर्मा ने बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006 एवम किशोर न्याय अधिनियम 2015 पर विशेष प्रकाश डाला।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए प्राचार्य डॉ श्रद्धा गुप्ता ने कहा कि मानवाधिकार का उल्लंघन अधिकांश कमजोर व्यक्तियों के विरुद्ध होता है, जिसमें महिलाएं और बच्चे ज्यादा पीड़ित हैं। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि नए नए कानूनों का सहारा लेकर मानव अधिकारों की रक्षा की जाए।
इस अवसर पर डॉ अंशु सत्यार्थी, डॉ संजीव राठौर, डॉ सारिका शर्मा, डॉ गौरव कुमार सिंह, डॉ मितिलेश, डॉ सरिता यादव आदि ने अपने विचार व्यक्त किए।

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