बी.आर.बी मॉडल स्कूल में विज्ञान गतिविधियों का समापन
बदायूं। बी.आर.बी मॉडल स्कूल में विगत माह से चल रहे “एक सप्ताह- एक विषय ” के अंतर्गत, विषयों
की गतिविधियों को निखारा व संवारा जा रहा है। इसी के परिप्रेक्ष्य में आज विज्ञान गतिविधि का समापन
हुआ। आज तक कि गतिविधियों में विद्यालय के छात्र /छात्राओं का कौशल उनका उघम निश्चित रूप
से अत्यंत सराहनीय है विज्ञान की गतिविधि में भी चार चाँद लगाने में बच्चों ने कोई कसर नहीं छोड़ी।
गीत, नाटिका ,कविता, प्रदर्शन व प्रदर्शनी के माध्यम से विज्ञान गतिविधि को मूर्तरूप दिया।

पानी में आग
लगाना, धूएं का बवंडर पैदा करना, गिलास में रखे पानी का रंग बदलना जैसे अनेकों विज्ञान के
चमत्कारों का प्रदर्शन किया गया। एक लघु नाटिका “मंगल मिशन “का भी मंचन किया गया। भारतीय वैज्ञानिकों द्वारा कैसे मंगल मिशन पूरा किया गया|

अनेकों
बाधाओं और आर्थिक समस्याओं बावजूद दूसरों के वैज्ञानिक मंगल पर यान भेजने में सफल हुए। इस
नाटिका में बच्चों के सफल, अभियान तथा पुष्ट संवादों ने इस मंचन को हृदय स्पर्शी बना दिया।
वृक्षों की व्यथा उनका दुख-दर्द और काटे जाने पर उनको होने वाली पीड़ा को प्रदर्शित करने वाला “मत
काटो मुझे दुखता है ” लघु नाटिका का छात्र/ छात्राओं ने सफल मंचन किया। इस नाटिका के माध्यम से
यह बताने का प्रयास किया गया कि वृक्ष है तो हम हैं। इस अवसर पर विज्ञान के छात्र/ छात्राओं ने
विज्ञान प्रदर्शनी का भी आयोजन किया।

विद्यालय की प्रधानाचार्या वंदना सक्सेना नें बच्चों का उत्साह बढ़ाते हुए कहा- दुनिया के लिए
विज्ञान नया होगा नई-नई खोजें दुनिया कर रही है लेकिन भारत का विज्ञान अत्यंत प्राचीन है जब
दुनिया हवाई जहाज की कल्पना भी नहीं कर पाती थी। हमने तब पुष्पक विमान उड़ाए थे। आज हम
जिन नए-नए अस्त्रों का निर्माण कर रहे हैं उनका नाम प्राचीन अस्त्रों पर ही रखे हैं –
ब्रह्मास्त्र,वरूणास्त्र,अग्नियास्त्र / समुद्र से लेकर आसमान तक और पृथ्वी से लेकर अंतरिक्ष तक हमने
विज्ञान के द्वारा ही अपनी शक्ति को बढ़ाया है। कोरोना काल में भारत ही ऐसा देश था, जिसने सबसे
पहले कोरोनारोधी टीके की खोज की और ना सिर्फ खोज की, बल्कि पूरी दुनिया के देशों को कोरोना रोधी
टीका उपलब्ध भी करवाया। इस अवसर पर विद्यालय के सभी अध्यापक / अध्यापिकाएँ उपस्थित रहे।














































































