लंबे इंतज़ार के बाद भक्तों को महाकाल की भस्म आरती के द्वार, शिवरात्रि के बाद कर सकेंगे दर्शन

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उज्जैन। लंबे इंतज़ार के बाद उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग महाकाल मंदिर मंदिर समिति की आज हुई बैठक में ये फैसला लिया गया. लेकिन भक्तों को थोड़ा सा और इंतज़ार करना होगा. आरती में प्रवेश की इजाज़त शिवरात्रि के बाद से मिलेगी.कोरोना संक्रमण के कारण पिछले साल मार्च से मंदिर की भस्म आरती में श्रद्धालुओं का प्रवेश बंद था.

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उज्जैन में आज महाकाल मंदिर समिति की बैठक हुई. इसमें समिति ने बड़ा फैसला किया. समिति ने तय किया कि भस्म आरती और शयन आरती के कपाट अब आम श्रद्धालुओं के लिए खोल दिये जाएंगे. शिवरात्रि के बाद श्रद्धालुओं को भस्म आरती में शामिल होने की अनुमति मिलने लगेगी. उज्जैन भी कोरोना संक्रमण के मामले में काफी आगे था. इसलिए एहतियात के तौर पर मार्च से मंदिर के पट बंद थे. बाद में पट तो आम श्रद्घालुओं के लिए खोले गए लेकिन भस्म और शयन आरती में प्रवेश की इजाज़त उन्हें नहीं थी.

सुबह 6 से रात 10 तक दर्शन
आज हुई मंदिर समिति की बैठक में और भी कई फैसले लिए गए.अब महाकाल मंदिर में फॉरेन करेंसी अकाउंट खोला जाएगा इसमें विदेश से आने वाला दान श्रद्धालु जमा कर सकेंगे.अब मंदिर में आने वाले श्रद्धालु सुबह 6 बजे से रात 10 बजे तक बाबा के दर्शन कर सकेंगे.

लॉकडाउन में बंद हुए थे पट
बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक ज्योतिर्लिंग बाबा महाकालेश्वर की अल सुबह होने वाली भस्म आरती में श्रद्धालुओ के दर्शन की व्यवस्था लॉक डाउन के समय से बंद है. मंदिर में फिलहाल केवल परंपरा का निर्वहन पुजारी ही कर रहे हैं. भस्म आरती में श्रद्धलुओं के दर्शन पर पूर्णतः प्रतिबंध है. चूंकि अब कोरोना की स्थिति सामान्य है इसलिए श्रद्धालुओं और व्यपारियों की मांग थी कि दर्शन व्यवस्था को सुचारू रूप दिया जाए. उसके बाद चलते कलेक्टर आशीष सिंह ने मन्दिर समिति के सामने प्रस्ताव रखा था कि कुछ नियम के साथ सप्ताह भर में दर्शन व्यवस्था शुरू की जाए.

यूथ कांग्रेस ने किया था प्रदर्शन
यूथ कांग्रेस ने भस्म आरती में प्रवेश की मांग को लेकर पिछले दिनों प्रदर्शन किया था. कार्यकर्ताओं ने मंदिर प्रांगण के बाहर नारे बाजी की थी. उनका आरोप था कि भस्मार्ती की शुरुआत इतने दिन से क्यों नहीं की गई. आज जब 12 से भाजापा विद्यायक दल का शिविर शुरू होने वाला है तो मंदिर समिति जल्दबाज़ी में फैसला लेने जा रही है.

क्या है मान्यता
पूरे विश्व में सिर्फ महाकाल ज्योतिर्लिंग ही दक्षिणमुखी है. बाबा महाकालेश्वर को तांत्रिक क्रिया के कारण दक्षिण मुखी पूजा का लाभ प्राप्त है. इसलिए हर हिंदू तीज त्योहार और नये साल की शुरुआत भी बाबा के दरबार से ही की जाती है. यहां हर पर्व पूरी दुनिया से एक दिन पहले मना लिया जाता है. इसे देखने अल सुबह 4 बजे से श्रद्धलुओं की भीड़ मंदिर प्रांगण में उमड़ती है. श्रद्धाकुयों के लिए विशेष ड्रेस कोड होता है. जिसमें महिलाओं को साड़ी और पुरुषों को केवल धोती पहनने पर ही प्रवेश मिलता है. बाबा को भस्म से स्नान करवाया जाता है. उस वक्त महिलाओं को घूंघट लेना अनिवार्य होता है. बाबा को भस्म से मंदिर के मुख्य पुजारी स्नान करवाते हैं. कहते है एक समय था जब बाबा को चिता की ताजी राख से स्नान करवाया जाता था. लेकिन अब बाबा को कंडे की राख से स्नान करवाया जाता है. उसके बाद बाबा का पंचाभिषेक कर भांग से तिथि के हिसाब से श्रृंगार किया जाता है.

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