बिल्सी। तहसील क्षेत्र के गांव बादशाहपुर स्थित कस्तूरबा गाँधी बालिका आवासीय विद्यालय में आज मंगलवार को कस्तूरबा गांधी की पुण्यतिथि धूमधाम से मनाई गई। यहां सबसे पहले स्कूल की वार्डेन भारती मालपाणी ने उनके चित्र पर माल्यर्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित की। इसके बाद उनके जीवन पर प्रकाश डालते छात्राओं को बताया कि महात्मा गांधी का नाम भारत में ही नहीं विदेशों में भी प्रसिद्ध है। उन्हें देश का राष्ट्रपिता कहा जाता है। उनकी सीख, सत्य और अहिंसा के बारे में सब ने सुना होगा लेकिन मोहनदास करमचंद गांधी के महात्मा गांधी, राष्ट्रपिता और बापू बनने के पीछे एक महिला के त्याग का अहम रोल है। अगर ये महिला न होती तो आज गांधी जी महात्मा न होते। यह महिला कोई और नहीं, बल्कि महात्मा गांधी की पत्नी कस्तूरबा गांधी थी। एक संपन्न परिवार की बेटी ने जब गांधीजी को अपना जीवन साथी माना तो पग-पग पर उनके साथ चलती रहीं। कस्तूरबा गांधी का जीवन कठिन संघर्षों में गुजरा। उन्होंने कभी गांधी जी से एक पति और पिता के कर्तव्यों को पूरा करने के लिए नहीं कहा। गांधी जी देश सेवा में जुट गए। साधारण सूती धोती पहन आश्रमों में रहे। सादा जीवन जिया लेकिन वह नाजों से पली कस्तूरबा ने इन सभी संघर्षों को बिना किसी शिकायत के जिया। उन्होने बताया कि कस्तूरबा गांधी का जन्म 11 अप्रैल 1869 में हुआ था। वह गुजरात के काठियावाड़ की रहने वाली थीं। कस्तूरबा गांधी के पिता व्यापारी थे। वह एक संपन्न परिवार की बेटी थीं, जिनकी मात्र 13 साल की उम्र में शादी कर दी गई। कस्तूरबा के पिता और गांधी जी के पिता दोनों करीबी मित्र थे। ऐसे में जब कस्तूरबा सात साल की थीं तभी उनकी सगाई गांधी जी से कर दी गई और बाद में शादी। गांधी जी कस्तूरबा से एक साल छोटे थे। उन दिनों गांधी जी को शादी का मतलब भी नहीं पता था लेकिन बाद में वह बाल विवाह के विरोध में हो गए। इस मौके पर भारती मालपाणी, सुनीती कश्यप, रश्मि यादव, स्वर्णरूपा,…