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स्वामी शुकदेवानंद महाविद्यालय में शिक्षको के दायित्व विषय पर हुई कार्यशाला

September 22, 2021By sharad kumar0 comments
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शाहजहांपुर। स्वामी शुकदेवानंद महाविद्यालय की आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ द्वारा राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अंतर्गत विभिन्न समितियों एव प्रकोष्ठों में शिक्षकों का दायित्व विषय पर एक कार्यशाला का आयोजन किया गया। जिसकी अध्यक्षता महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ अनुराग अग्रवाल ने की।

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कार्यक्रम का शुभारंभ आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ के अध्यक्ष डॉ आदित्य कुमार सिंह के स्वागत भाषण से हुआ। डॉ आदित्य कुमार सिंह ने अपने उद्बोधन में कहा, “आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ का कार्य गुणवत्ता में वृद्धि के लिए संस्थागत कामकाज में स्पष्टता का स्तर बढ़ाना और ध्यान केंद्रित शिक्षा को सुनिश्चित करना है, इस दिशा में राष्ट्रीय शिक्षा नीति के विशेष संदर्भ में यह कार्यशाला शिक्षकों को वर्तमान सत्र में कार्य करने के लिए एक दिशा प्रदान करेगी।”

इसके उपरांत पुस्तकालयाध्यक्ष श्रीप्रकाश डबराल ने आगामी नैक के मूल्यांकन के दौरान पुस्तकालय के महत्त्व पर अपने विचार रखते हुए कहा, ” महाविद्यालय के पुस्तकालय का नवीनीकरण तथा डिजिटलाइजेशन लगभग पूर्ण हो चुका है। महाविद्यालय ने यू जी सी द्वारा प्रदत्त इन्फ्लिबनेट लाइब्रेरी की सदस्यता ले रखी है । हमारे पास हज़ारों की संख्या में ई-जर्नल, ई-बुक और शोध पत्र की उपलब्धता है, जिनका उपयोग शोधार्थी अपने शोध में कर सकते हैं।”

इसके उपरांत महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ अनुराग अग्रवाल ने आगामी परीक्षाओं से संबंधित आवश्यक दिशानिर्देश दिए तथा राष्ट्रीय शिक्षा नीति के सफलता पूर्वक लागू करने हेतु आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ की संस्तुति पर कुल 50 समितियों और प्रकोष्ठों का गठित की हैं जो वर्तमान सत्र में महाविद्यालय को भली भांति संचालित करने में अपना योगदान देगी। आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ ने इस क्रम में, परिवेदना निवारण समिति, स्टूडेंट सैटिस्फैक्शन सर्वे कमेटी, हरित अंकेक्षण समिति, महिला प्रकोष्ठ, शैक्षिक अंकेक्षण समिति, छात्र संतुष्टि एवम अभिभावक प्रतिपुष्टि समिति, पुरातन छात्र समिति, लॉ क्लब आदि महत्वपूर्ण समितियों एवम उनके दायित्वों के बारे में विस्तृत रूप से प्रकाश डाला।

इस कार्यशाला में आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ की वरिष्ठ सदस्य डॉ मीना शर्मा ने भी अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा, “हर महाविद्यालय को राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद् (नैक) से ग्रेड हासिल करने से पहले खुद ही अपना मूल्यांकन करना चाहिए अब नैक मूल्यांकन की पद्धति बदल चुकी है अतः हमें वर्तमान सत्र में नई रणनीति बना कर इन समितियों और प्रकोष्ठों के माध्यम से नैक से मूल्यांकन करा कर अच्छा ग्रेड प्राप्त करना है।

शारीरिक शिक्षा विभाग के अध्यक्ष एवम प्रकोष्ठ के सदस्य डॉ अजीत सिंह चारग ने कहा, “नैक के द्वारा संस्थानों का एक गहन विश्लेषण करके उनकी ताकत, कमजोरी, अवसर तथा जिन क्षेत्रों में सुधार की आवश्यकता है वहां आवश्यक सुझाब दिए जाते हैं। यह मूल्यांकन करा के अच्छा ग्रेड प्राप्त करना हर अच्छे महाविद्यालय का उद्देश्य होता है। हमें भी अपने संस्थान को इन प्रकोष्ठों और समितियों के माध्यम से सभी सरकारी गैर सरकारी कार्यक्रमो को संचालित कर महाविद्यालय की अंतः कार्यप्रणाली को विकसित करना है। “

कार्यक्रम में आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ के वरिष्ठ सदस्यों के साथ साथ महाविद्यालय के वरिष्ठ शिक्षक डॉ मधुकर श्याम शुक्ल, डॉ प्रभात शुक्ला, डॉ देवेंद्र सिंह, डॉ आलोक सिंह, प्रांजल शाही, डॉ आदर्श पांडेय आदि शिक्षक समेत महाविद्यालय के सभी शिक्षकों, शिक्षणेत्तर कर्मचारी, कमलेश त्रिवेदी, झरना रस्तोगी ने भी प्रतिभाग किया।

कार्यक्रम का सफल संचालन जूलॉजी विभागाध्यक्ष एवम प्रकोष्ठ के सदस्य डॉ रमेश चंद्रा ने किया और कार्यक्रम के अंत मे अंग्रेजी विभागाध्यक्ष डॉ शालीन सिंह ने सभी शिक्षकों एवम शिक्षणेत्तर कर्मचारियों का आभार व्यक्त किया।

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