बदायूं। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा राज्य के आउटसोर्सिंग कर्मचारियों के मानदेय में की गई डेढ़ गुना की ऐतिहासिक बढ़ोतरी को लागू हुए महीनों बीत चुके हैं, लेकिन धरातल पर स्थानीय प्रशासन की लापरवाही और तानाशाही की एक गंभीर तस्वीर सामने आई है। बदायूं जिले की बिसौली नगर पालिका से अधिकारियों की घोर अनदेखी का बड़ा मामला प्रकाश में आया है, जहाँ कर्मचारियों को इस महीने भी पुरानी दर पर ही वेतन देकर टरका दिया गया। राज्य सरकार ने 2 सितंबर 2026 को एक स्पष्ट शासनादेश जारी कर निर्देश दिया था कि आउटसोर्सिंग कर्मचारियों को सितंबर और अक्टूबर महीने का बढ़ा हुआ मानदेय तथा बकाया एरियर नवंबर के भुगतान के साथ दिया जाए। लेकिन 6 नवंबर 2026 को जब कर्मचारियों के बैंक खातों में वेतन आया, तो उनके होश उड़ गए। खातों में बढ़ा हुआ वेतन तो दूर, एरियर की एक पाई तक नहीं पहुंची और कर्मचारियों को वही पुरानी घिसी-पिटी दर पर ही मानदेय दे दिया गया।
कागजों तक सीमित शासनादेश या स्थानीय साजिश? दिन-रात मेहनत करके शहर की स्वच्छता और व्यवस्था संभालने वाले आउटसोर्सिंग कर्मचारी आज खुद को पूरी तरह ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। त्योहारों और बढ़ती महंगाई के बीच बढ़ा हुआ वेतन मिलने की उम्मीद लगाए बैठे कर्मचारियों के परिवारों में इस कदम से भारी निराशा फैल गई है।
इस पूरे मामले के सामने आने के बाद स्थानीय प्रशासन पर कई गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं:
क्या योगी सरकार का शासनादेश सिर्फ कागजों तक सीमित था?
या फिर यह स्थानीय अधिकारियों की सोची-समझी लापरवाही है, जिसके जरिए सरकार की जनकल्याणकारी नीतियों को आम जनता और कर्मचारियों तक पहुंचने से रोका जा रहा है?
कर्मचारियों में आक्रोश, कार्रवाई की मांग
अधिकारियों की इस कार्यशैली से कर्मचारियों में भारी आक्रोश व्याप्त है। स्थानीय लोगों और कर्मचारी संघों का मानना है कि इस प्रकार की तानाशाही से न केवल कर्मचारियों का शोषण हो रहा है, बल्कि सरकार की छवि को भी नुकसान पहुँचाने की कोशिश की जा रही है।
बिसौली नगर पालिका में योगी सरकार के आदेशों की धज्जियां, आउटसोर्सिंग कर्मचारियों को थमाया पुराना वेतन; बढ़ा मानदेय और एरियर गायब

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