1470वें जन्मदिवस के अवसर पर हज़रत मौला अली के जशन में नज़्र पेश
बरेली । हजरत मौला अली (अ.स.) का 1470वां जन्मदिवस (यौम-ए-विलादत) अदब ओ एतराम के साथ मनाया गया।
बरेली के नौमहला मस्जिद स्थित दरगाह ख्वाजा नासिर मियां रहमतुल्लाह अलैह पर हजरत मौला अली (अ.स.) की विलादत का 1470वां जश्न मनाया गया।
जशन की सरपरस्ती दरगाह ख्वाजा नासिर मियाँ रहमतुल्लाह अलेह के सज्जादानशीन हज़रत ख्वाजा सुल्तान अहमद नासरी ने की।यह कार्यक्रम दरगाह के खादिम सूफी वसीम मियां साबरी और शाने अली कमाल मियां साबरी के नेतृत्व में आयोजित हुआ। अकीदत्मंदों को तबर्रुक वितरित किया गया। नमाज़-ए-अस्र के बाद हजरत मौला अली की नज़्र पेश की गई। जिसमें बड़ी संख्या में अकीदतमंद शामिल हुआ। अकीदत्मंदो ने दरगाह पर गुलपोशी की
उलेमा-ए-इकराम हजरत अली (अ.स.) की ज़िंदगी, उनके इल्म, न्याय और मुश्किल कुशा होने पर रोशनी डाली हजरत अली को “इल्म का दरवाज़ा” कहा जाता है और उनके बताए रास्ते पर चलकर ज़िंदगी को खूबसूरत व आसान बनाया जा सकता है।उलेमा-ए-इकराम ने हजरत अली अलैहिस्सलाम की जिंदगी, उनके इल्म-ओ-दानिश, न्यायप्रियता और मुश्किलात दूर करने वाले गुणों पर प्रकाश डाला। उन्हें “इल्म का दरवाज़ा” (दरवाज़ा-ए-इल्म) कहा जाता है, और उनके बताए रास्ते पर चलकर जीवन को सुंदर और सरल बनाया जा सकता है।
समाजसेवी पम्मी खाँ वारसी ने बताया कि हजरत मौला अली अलैहिस्सलाम की विलादत इस्लामी कैलेंडर के 13 रजब को मनाई जाती है, और यह आयोजन अकीदत व मुहब्बत का एक खूबसूरत नमूना है। अल्लाह तआला सभी अकीदतमंदों की हाजतें पूरी फरमाए और हजरत अली की शफाअत नसीब हो। आमीन।नज़्र पेश करने के बाद मुल्क, अवाम की खुशहाली, तरक्की और कामयाबी के लिए खास दुआएं की गई।
इस मौके पर मुफ़्ती अब्दुल बाक़ी मरकज़ी,सूफी वसीम मियाँ साबरी,कमाल मियाँ साबरी,पम्मी ख़ाँ वारसी,शाहिद रज़ा नूरी,रिज़वान साबरी नन्ना मियाँ,मोहम्मद शाहिद मियाँ साबरी, सलीम साबरी,सय्यद शाहनवाज़,ज़िया उर रहमान,मोहम्मद दानिश,नईम साबरी, हसनैन,दिलशाद कल्लन मियाँ आदि सहित बड़ी संख्या में अकीदतमंद शामिल रहे।














































































