विश्व जल दिवस के अवसर पर गोष्ठी का आयोजन किया
शाहजहांपुर। स्वामी शुक्रदेवानंद कालेज की एनसीसी यूनिट के तत्वाधान में विश्व जल दिवस के अवसर पर गोष्ठी का आयोजन किया गया। मुख्य वक्ता के रूप में बोलते हुए प्रोफ़ेसर आलोक मिश्रा ने कहा कि हमारे देश में प्राचीन काल से ही जल संरक्षण पर विशेष बल दिया जाता रहा है। तालाब बनाए जाते थे एवं कुएं खोदे जाते थे। वर्षा का जल तालाबों आदि में एकत्रित हो जाता था। इन तालाबों से मनुष्य ही नहीं, जीव-जंतु भी लाभान्वित होते थे। किन्तु कालांतर में प्राकृतिक एवं मनुष्य निर्मित जल स्रोत समाप्त होते जा रहे हैं। ऋग्वेद में जल संरक्षण के विषय में यह भी कहा गया है-
आपो अस्मान्मातरः शुन्ध्यन्तु द्यृतेन ना द्यृत्प्वः पुनन्तु।
अर्थात जल हमारी माता के समान है। जल घृत के समान हमें शक्तिशाली एवं उत्तम बनाता है। इस प्रकार का जल जहां कहीं भी हो, उसका संरक्षण करना चाहिए।
इस अवसर पर बोलते हुए डॉ दुर्गविजय ने बताया कि
बुद्ध के समय वाराणसी में अवस्थित एक ऐसे ही कूप पर यह निर्देश लिखा था कि जो कोई भी मनुष्य इस कूप से जितना जल निकाले उतना ही पास में बने एक नाद या लघु कुंड में भी डाल देवे जिससे जानवरों एवं विकलांगों की भी प्यास बुझे। कार्यक्रम संयोजलेफ्टिनेंट आलोक सिंह ने कहा कि
ग्लेशियर पहले से कहीं अधिक तेजी से पिघल रहे हैं।
जैसे-जैसे ग्रह गर्म होता जा रहा है, हमारी जमी हुई दुनिया सिकुड़ती जा रही है, जिससे जल-चक्र और अधिक अप्रत्याशित होता जा रहा है।अरबों लोगों के लिए पिघले पानी का प्रवाह बदल रहा है, जिससे बाढ़, सूखा, भूस्खलन और समुद्र स्तर में वृद्धि हो रही है। लेफ्टिनेंट आलोक ने कहा कि चूंकि हम जलवायु परिवर्तन को कम करने और उससे अनुकूलन के लिए मिलकर काम कर रहे हैं, इसलिए ग्लेशियरों का संरक्षण हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है।
हमें हिमनदों के पिघलने की गति को धीमा करने के लिए ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को कम करना होगा।
और, हमें पिघले पानी का अधिक टिकाऊ ढंग से प्रबंधन करना होगा। इस अवसर पर उपस्थिति एनसीसी कैडेट्स और विद्यार्थीओं को जल संरक्षण कि प्रतिज्ञा दिलाई गई। अंडर अफसर लव के संचालन में हुए कार्यक्रम में कैडेट रिया वर्मा, काजल, वीर सिंह, राजन और कैडेट आशु सिंह का विशेष योगदान रहा।













































































