बरेली में जंतु उद्यान, लाइट मेट्रो, एम्स योजना कब आएंगी फाइल से बाहर: केंद्रीय बजट में भी बरेली के विकास को खजाना सीधे नहीं मिला

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बरेली। लोकसभा चुनाव 2024 के बाद केंद्रीय वित्त मंत्री ने अपना विकसित भारत वाला बजट भी प्रस्तुत कर दिया। बजट के बाद भी के बरेली में जंतु उद्यान, लाइट मेट्रो, एम्स योजना जैसे मुद्दे फाइल से ही बाहर नहीं आ सके। बरेली का राजनीतिक पटल पर तो हर जगह नाम है ही पर केंद्र से बजट में खजाना सीधे नहीं मिल सका। बरेली में अभी एम्स, जंतु उद्यान, लाइट मेट्रो योजना भी बीते चुनाव में चुनावी मुद्दे नहीं बन सके थे । बरेली में इसलिए ही वाहन पार्किंग, लाइट मेट्रो, एम्स, जंतु उद्यान की योजना फाइल में ही सिमट कर रह गई है। लोकसभा चुनाव के बाद भी नए बने बीजेपी सांसद छत्र पाल गंगवार एवम जनप्रतिनिधि लाइट मेट्रो की योजना, सौ बेड हॉस्पिटल में सरकारी केंसर हॉस्पिटल खोलने, ई इस आई सी का सौ बेड हॉस्पिटल, स्पाईनल इंजुरी सेंटर, जंतु उद्यान, इज्जतनगर में नया बस स्टेशन बनाने की योजनाएं भी सब भूले गए हैं । यह बरेली महानगर का दुर्भाग्य है की बरेली में आज तक सरकारी मेडिकल कॉलेज, सरकारी डिग्री कॉलेज एवम 187 वर्ष पूरा कर चुका बरेली कॉलेज को केंद्रीय विश्व विद्यालय का दर्जा देने को मांग सिरे नही चढ़ सकी। सभी सत्तारूढ़ के जनप्रतिनिधि मोन ही हैं। बरेली कॉलेज कर्मी वर्षो से केवल प्रदर्शन ही कर रहे हैं। बरेली न तो मेडिकल हब और न ही शिक्षा का हब बन सका। अलबत्ता उद्योग-व्यापार भी खूब फला फूला। बरेली विकास प्राधिकरण की कई आवासीय योजनाएं भी जमीन पर आईं। अब नाथ सर्किट एवम पर्यटन के जरिए भी यहां के कथित विकास के नाम पर नए कोरिडोर के नाम पर मात्र डिवाइडर की ऊंचाई बढ़ाकर, पुरानी सड़को की ही लीपा पोती करके ही विकास की संभावना बनाई जा रही हैं। सावन माह में कावरिया गंदगी एवम जल जमाव वाले मार्ग पर परेशान हो रहा है। टूटी गड्डा वाली सड़को पर गंदगी जलभराव अधिकांश जगह देखा जा सकता है। वाहन पार्किंग, लाइट एंड साउंड अरवन हॉट की योजना भी सिरे नहीं चढ़ सकी। स्मार्ट सिटी में हाइड्रोलिक वाहन पार्किंग, स्काई वाक केवल सरकारी धन की बरबादी का नमूना हैं । कई संगठन इसकी जांच की माग भी कर चुके हैं । विकास की धीमी गति से कई योजनाएं प्रसव की पीड़ा झेल रही हैं । कभी यहां सिन्थेटिक एंड कैमिकल की रबर फैक्ट्री, विमको नाम की माचिस फैक्ट्री, आईटीआर की तारपीन फैक्ट्री, किसान कंपनी की जैम एवं जैली फैक्ट्री की धूम थी पर अब यह सब फैक्ट्रियां बंद हो चुकी हैं।

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रबर फेक्ट्री की जमीन का मामला कोर्ट से सरकार के पक्ष में आने से फिर एम्स खोलने की मांग उठी है।पर केवल हवा हवाई बयान ही जारी हुए। बरेली महानगर का दुर्भाग्य है की बरेली में आज तक सरकारी मेडिकल कॉलेज, सरकारी डिग्री कॉलेज एवम बरेली कॉलेज को केंद्रीय विश्व विद्यालय का दर्जा देने को मांग सिरे नही चढ़ सकी। वर्ष 2022 की संभावित जनगणना रिपोर्ट के अनुसार बरेली जिले की आवादी अब 54 लाख 72 हजार 071 हो चुकी है। जिसमें 29 लाख 00243 पुरूष तथा 25 लाख 71 हजार 828 महिलाएं बताई गई हैं। पिछले विधानसभा चुनाव में बरेली की 2022 के विधान सभा चुनाव में सात सीटों पर भारतीय जनता पार्टी के विधायकों की जीत हुई थी। बीजेपी ने दो सीट गंवा दी । यही नहीं नगर निगम में मेयर व जिला पंचायत अध्यक्ष भी भाजपा का ही बना रहा। पर निगम के कर बढ़ाने के जाल में सभी उलझ कर निगम में प्रदर्शन को मजबूर हैं सभी करदाता बढ़े बिल को लेकर निगम में भटक रहे हैं। 2022 के विधानसभा चुनाव में बरेली जिले में 32 लाख 73 हजार 298 मतदाता थे जिसमें 17 लाख 70 हजार 0015 पुरूष और 15 लाख 30 हजार 193 महिलाएं थीं। जिले में 3791 मतदान केन्द्र बनाए गऐ थे। लोक सभा 2024 के चुनाव में आठ बार के सांसद रहे संतोष कुमार गंगवार का पत्ता कट दिया गया था। बीजेपी के बहेड़ी से पूर्व विधायक रहे छत्रपाल गंगवार बीजेपी के बरेली सांसद बन ही गए। जबकि बीजेपी ने अपनी आंवला सीट गवां दी। बीते 7 साल में बरेली में आई. वी. आर. आई का पुल, चोपला एवम लालफटक का पुल ही बन सका था। जिस पर भी अंधेरे की समस्या आज भी बनी हुई है। वनमंत्री पुल की गुणवत्ता एवम दुर्दशा पर नाराजगी भी जता चुके हैं । नगर निगम का नया भवन भी सभासद कक्ष को छोड़ कर बन गया। कोहाड़ापीर का महादेव पुल बनने के बाद भी नीचे जाम ने पीछा नहीं छोड़ा। जी आई सी का ऑडिटोरियम भी बन गया। इसमें पहला कार्यक्रम राधेश्याम कथावाचक स्मृति के रूप में हुआ था। पटेल चौक के स्काईवॉक, अर्बन हॉट का निर्माण कार्य जारी है। लाइट साउंड शो भी सरकारी धन फूंक कर स्थान परिवर्तन के दौर में है। जनप्रतिनिधि अब उन पर चर्चा भी नही करते। बरेली विकास प्राधिकरण ने राम गंगा नगर एवम ग्रेटर बरेली जैसी आवास योजनाएं दी । पिछले वर्ष 7 दिसंबर 2022 को मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ ने बरेली कॉलेज मैदान पर 1459 करोड़ की 188 योजनाओं का लोकार्पण एवम शिलायन्यास किया था। साथ ही कहा नाथ नगरी अब स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार का हब बनेगी। मुख्यमंत्री योगी जी ने बरेली आकर महादेव पुल, डमरू चौराहा आदि कुछ योजना को आचार संहिता लगने से कुछ दिन पूर्व लोकार्पित भी कर दिया था । अधिकांश कार्य बजट अभाव में अधूरे ही पड़े है। स्मरण रहे आंवला का रामनगर स्थित जैन मंदिर पर्यटन मानचित्र पर शामिल हो गया है। अहिच्छत्र का द्रोपदी का किला को भी भारतीय पुरातत्व विभाग सड़क से जोड़ने की दिशा में धीमी गति से ही कार्यरत है। उत्तर प्रदेश में जब नारायण दत्त तिवारी केन्द्र में मंत्री थे तो बरेली मंडल के आंवला में इफको, बदायंू के बबराला में टाटा की टाटा फर्टिलाइजर, शाहजहांपुर में कृभको की फैक्ट्री लगी थी। बरेली में यहां सरकारी क्षेत्र में एयरफोर्स का त्रिशूल हवाई अड्डा, आर्मी का जाट एवं अन्य के हेड क्वार्टर, रेलवे का इज्जतनगर मंडल कार्यालय, आईवीआरआई जैसे बड़े संस्थान के साथ ही बैंक आॅफ बड़ौदा सहित कई बैंकों के क्षेत्रीय कार्यालय भी बरेली में है। वर्तमान में उद्योग क्षेत्र में बी एल एग्रो, खंडेलवाल इडेबिल आयल, बजरंग फ्लौर मिल, अशोका फोम, सलेक्शन पाइंट, इंडियन बुड प्रोडक्ट, मेंथा उद्योग के साथ ही रेडिसन, स्वर्ण टॉवर, उबेराय आनंद, पंचम होटल, खान-पान में क्वालिटी रेस्त्रां, गूंज, दीनानाथ की लस्सी, किप्स, दीपक, अजंता की मिठाई, जैसे खान पान के सेंटर भी हैं। कुटीर उद्योग में काष्ठ फर्नीचर उद्योग, हाशमी का सुर्मा उद्योग, बरेली का माझा एवं पतंग उद्योग के साथ ही चावल मिलें, दाल मिलें कई चीनी मिलें भी बरेली में हैं। पर्यटन की दृष्टि से आंवला का जैन मंदिर, अहिच्छत्र में पांचाल काल का द्रौपदी का किला, चुन्ना मियां का मंदिर, बरेली के अलखनाथ, धोपेश्वरनाथ मंदिर, त्रिवटीनाथ मंदिर, तपेश्वरनाथ मंदिर, वनखंडीनाथ मंदिर के अलावा पशुपतिनाथ मंदिर, तुलसी स्थल भी बरेली में है। जिस कारण इसे नाथ नगरी भी कहा जाता है। इसके अलावा आनंद आश्रम, हरीमंदिर, बांकेबिहारी मंदिर, दरगाह मंदिर, रामायण मंदिर, हनुमान मंदिर, बड़ा बाग का मंदिर, भगवान वेंकटेश्वर मंदिर, साहूकारा का नौदेवी मंदिर, नरियाबल मंदिर, खानकाए नियाजिया, दरगाह आला हजरत, नौमहला मस्जिद, श्रीफ्रीवेल वैपटिस्ट, चूड़ी वाली गुरूद्वारा एवं अन्य कई धार्मिक स्थलों की भी काफी मान्यता है। बरेली कमिश्नरी कार्यालय परिसर में क्रांतिकारियों का फांसी पर लटकाने वाला पेड़, अकब कोतवाली, जिला कारागार में नवाब खान बहादुर खां की मजार भी है। बरेली कालेज भी ऐतिहासिक प्राचीनतम कालेज है। इसी के पास बरेली का मानसिक चिकित्सालय भी है। बरेली से फिल्मी जगत में महावीर राना, प्रियंका चोपड़ा, दिशा पाटनी, विजय कमांडो, राजेश शर्मा, सुनील ओबराय के अलावा कई नाम चर्चित हुये। बरेली में अलीगढ़ फिल्म, मुक्केबाज आदि की भी शूटिंग हुई थी। बरेली का झुमका गीत एवं बरेली की वर्फी फिल्म भी काफी चर्चित रही। कई वेव सीरीज की भी शूटिंग हो चुकी है। इसी कारण बरेली में अब झुमका चौराहा भी बन गया। नाथ सर्किट के नाम पर शहर के चौराहे पर धार्मिक निशान शंख, त्रिशूल, डमरू आदि भी लग गए हैं। बरेली के गंगाशील आर्ट कालेज नबावगंज में डॉ शशि वाला राठी ने कला गैलरी बनवाई है। डॉ केशव अग्रवाल ने बरेली को आधुनिक कैंसर हॉस्पिटल दिया। प्रधानमंत्री श्रीमती इन्द्रा गांधी के चुनाव संबंधी फैसला लेने पर इलाहाबाद हाई कोर्ट के जज जगमोहन लाल सिन्हा, उपराष्ट्रपति रहे गोपाल स्वरूप पाठक, उ.प्र. के पहले मुख्यमंत्री रहे गोविन्द बल्लभ पंत के अलावा मुख्यमंत्री रहे नारायण दत्त तिवारी, कैप्टन सुभाष सक्सेना का बरेली से काफी जुड़ाव रहा।

निर्भय सक्सेना

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