हिमालय के समान अटल और चंद्रमा के समान शीतल: यही है हिंदू की पहचान :प्रभाकर त्रिपाठी

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बरेली । प्राचीनतम एवं भव्यतम बाबा त्रिवटीनाथ महादेव मंदिर में आयोजित श्रीरामचरितमानस कथा के दूसरे दिवस श्री धाम वाराणसी के परम पूज्य कथा व्यास पंडित प्रभाकर त्रिपाठी जी ने हिंदू शब्द का अर्थ का तात्पर्य बताते हुए कहा कि हिंदू मतलब हि +इंदु अर्थात हि मतलब हिमालय और इंदु मललब चंद्रमा, जो हिमालय के समान अटल हो और चंद्रमा के समान शीतल हो वह हिंदू होता है‌। कथा व्यास कहते हैं कि हिंदू धर्म में सदैव धर्म के अनुसार आचरण करने की शिक्षा दी जाती है जहां बिना किसी भेद भाव के समाज के अनुकूल व्यवहार किया जाता है‌। कथा व्यास ने कहा कि सभी देवों में महादेव शिवशंकर का सबसे उच्च स्थान है।इसकी व्याख्या करते हुए बताया कि एक बार ब्रह्म जी अपनी समस्या लेकर माता पार्वती के पास जा कर कहते हैं कि भाग्य लिखने का जो कार्य उन्हें मिला हुआ है ,उसको अब वो नहीं करेंगे ।माता पार्वती के पूछने पर ब्रह्मा जी बताते हैं कि किसी भी मनुष्य का भाग्य नियत उनके द्वारा किया जाता है।किसी को दुख,दारिद्र,विसंगति आदि नकारात्मकतायें दी जाती हैं।वही मनुष्य जब शंकर जी की शरण में जाता है तब शंकर जी उस मनुष्य को अपने आशीर्वाद से सुख,वैभव तथा ऐश्वर्य प्रदान करके भाग्य को बदल देते हैं। कथा व्यास बताते हैं इसको वेदों में ब्याज स्तुति कहते हैं।ब्रह्मा जी के अनुसार यह भगवान शंकर की कमियों के बारे में कहा जा रहा है जबकि यह भोलेनाथ शिवशंकर की कृपा स्वरूप है जो कि उनकी शरण में आने वाले भक्तों को प्राप्त होती है। कथा व्यास कहते हैं कि भीष्म पितामह ने भरी सभा में द्रौपदी के अपमान होने पर भी राजगद्दी से बंधे होने के कारण कोई विरोध अन्याय के विरुद्ध नहीं किया इसलिए उन्हें बाणों की सरशैय्या प्राप्त हुई वहीं जटायु ने सीता माता की रक्षा हेतु रावण का विरोध किया जिसके फल स्वरूप जटायु को परमब्रह्म परमात्मा प्रभु श्रीराम की गोद में मोक्ष की प्राप्ति होती है। कथा व्यास कहते हैं कि स्त्री पर संकट कथा व्यास कहते हैं कि किसी भी परिस्थिति में अपना धर्म नहीं भूलना चाहिए।धर्म का सीधा अर्थ है प्राणी मात्र का किसी भी अवस्था में कितने जाने वाला न्यायोचित कर्म। कथा व्यास प्रभु श्री राम और केवट की कथा के बारे में बताते हुए कहते हैं कि जब केवट की नाव पर बैठ कर प्रभु ,माता सीता और लक्ष्मण जी गंगा पार करते हैं तब प्रभु केवट से गंगा पार कराने का पराश्रमिक लेने के लिए कहते हैं।केवट भावविह्वल हो कर विनती करते हैं कि आप मुझे भवसिंधु पार करा दीजिएगा।
कथा व्यास कहते हैं कि हम लोगों को अपनी आसक्ति माया जाल से मुक्त करके प्रभु के चरणों में लगाकर ही हम लोगों का कल्याण संभव हो सकता है। आज की कथा के उपरांत वहां उपस्थित काफी संख्या में भक्तजनों ने श्री रामचरितमानस की आरती करी तथा प्रसाद वितरण हुआ। आज के कार्यक्रम में मंदिर सेवा समिति के प्रताप चंद्र सेठ , मीडिया प्रभारी संजीव औतार अग्रवाल तथा हरिओम अग्रवाल का मुख्य सहयोग रहा।

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