1 जून से 30 जून तक मनाया जायेगा मलेरिया रोधी माह

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बरेली। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ विश्राम सिंह ने बताया कि शासन के निर्देशों के क्रम में माह जून 1 जून से 30 जून तक को मलेरिया रोधी माह के रूप में मनाए जाने हेतु निर्देशित किया गया है। उक्त के अन्तर्गत जन समुदाय में मलेरिया रोग से बचाव एवं नियंत्रण के सम्बन्ध में जागरूकता लायी जायेगी तथा रोग नियंत्रण हेतु की जा रही गतिविधियों में जन समुदायों की सहभागिता सुनिश्चित की जायेगी। मलेरिया रोग की पहचान हेतु समस्त ज्वर रोगियों का शीघ्र निदान किया जायेगा एवं धनात्मक पाये गये रोगियों का आमूल उपचार सुनिश्चित किया जायेगा। मलेरिया रोग के उन्मूलन हेतु आवश्यक है कि समस्त ज्वर रोगियों की मलेरिया की जांच अनिवार्य रूप से कराई जायेगी। कुल जनसंख्या के सापेक्ष कम से कम 10 प्रतिशत व्यक्तियों की जांच सम्पादित कराई जायेगी, ताकि भारत सरकार द्वारा अपेक्षित आवश्यक एबीईआर के लक्ष्य को प्राप्त किया जा सके। आशा, एएनएम, सीएचओ व अन्य स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित कर लक्ष्य के सापेक्ष एबीईआर प्राप्त किये जाने हेतु आवश्यक कार्यवाही की जायेगी। समस्त मलेरिया धनात्मक रोगियों के सापेक्ष उक्त परिवार के समस्त व्यक्तियों की एवं आस-पास के कम से कम 50 घरों में सर्वेक्षण कर केस-बेस्ड सर्विलांस (बुखार से ग्रसित व्यक्तियों की खोज एवं जांच) एवं रिडक्शन गतिविधियां संपादित कराई जायेंगी। अन्तर्विभागीय समन्वय समिति के अन्तर्गत संचालित अन्य सहयोगी विभागों के सहयोग से ब्लाको में मच्छर रोधी गतिविधियां कराई जायेंगी। समस्त धनात्मक मलेरिया रोगियों की माइक्रोस्कोप द्वारा स्लाइड बनाकर फॉलो-अप जांच अनिवार्य रूप से कराई जायेगी एएनसी जांच हेतु आने वाली समस्त गर्भवती महिलाओं की मलेरिया जांच अनिवार्य रूप से कराई जायेगी। मलेरिया रोधी माह को रैली, बैठकें, गोष्ठी, चौपाल, पैम्फ्लेट वितरण, सोशल मीडिया, रेडियो, विज्ञापन, कार्यशालायें, नुक्कड़ नाटक एवं अन्य प्रचलित स्थानीय संसाधनां द्वारा मलेरिया रोग से बचाव, शीघ्र जांच एवं उपचार, रोकथाम एवं नियंत्रण हेतु व्यापक प्रचार-प्रसार किया जायेगा। जन सामान्य को मच्छर के प्रजनन स्थलों के विषय में अवगत कराते हुये घरों के अन्दर एवं आस-पास उपलब्ध जल पात्रों यथा कुलर की टंकी, रेफ्रिजरेटर की ट्रे, गमलों के नीचे उपलब्ध प्लेट, टूटे-फूटे एवं अनुपयोगी पात्र, नारियल के खोल, छतों पर पड़े कबाड़, पुराने टायर इत्यादि को हटाने अथवा उनमें से जल निकाल कर रगड़कर साफ हेतु व्यवहार परिवर्तन करते हुये जन समुदाय का अपेक्षित सहयोग प्राप्त करते हुये सामुदायिक सहभागिता सुनिश्चित की जायेगी। जन-समुदाय में ‘‘हर रविवार-मच्छर पर वार‘‘ लार्वा पर प्रहार, मलेरिया का संहार एवं बुखार में देरी पड़ेगी भारी‘‘ आदि संदेशों को एसएमएस, सोशल मीडिया आदि के माध्यम से प्रसारित किया जायेगा। ग्राम स्तर पर मलेरिया रोग की त्वरित पहचान करते हुये उपचार हेतु निकटतम उपचार केन्द तक पहुंचाने का कार्य आशा एवं एएनएम द्वारा किया जायेगा। ग्राम स्वास्थ्य, स्वच्छता एवं पोषण समिति (वीएचएसएनसी) के माध्यम से मलेरिया रोग से बचाव हेतु समय से रोगी का सन्दर्भन एवं जनपद में अवशेषी कीटनाशक का छिड़काव का कार्य यदि चल रहा है, तो उस पर सतत् निगरानी किये जाने के कार्य में सहयोग प्राप्त किया जायेगा। इस बात का विशेष ध्यान रखा जायेगा कि मलेरिया रोग की शीघ्र पहचान तथा मलेरिया पी0एफ0 रोगी जिन्हें उपचार में समुचित लाभ न प्राप्त हो अथवा गम्भीर स्थिति होने पर अविलम्ब निकटम उपचार केन्द्र पर पहुंचाया जायेगा। मलेरिया रोधी माह में प्रचार-प्रसार का सर्वाधिक महत्व है, अतः सार्वजनिक स्थलों पर वॉल पेंटिंग आदि के द्वारा स्लोगन के माध्यम से लोगों को जागरूक किया जायेगा। हमने अब यह ठाना है, मलेरिया रोग मिटाना है। दूर होगी मलेरिया की बीमारी, जब होगी सभी की भागीदारी। जन-जन का यही है नारा, मलेरिया मुक्त हो प्रदेश हमारा। पानी ठहरेगा जहां, मच्छर पनपेगा वहां। छोटी सी मछली गम्बूसिया है नाम, करती है मच्छरों का काम तमाम। संकल्प है हमारा, पाना है मलेरिया से छुटकारा। जच्चा-बच्चा को मलेरिया से न होगी हानि, यदि गर्भवती महिला बरतेगी सावधानी।

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