कोविड-19 प्रबंधन हेतु गठित टीम-09 को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के दिशा-निर्देश

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भाग-एक

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कोविड-19 प्रबंधन हेतु गठित टीम-09 को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के दिशा-निर्देश

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  • विगत 24 घंटो की अवधि में प्रदेश में कोविड के 30317 नए केस आए, इसी अवधि में जबकि 38826 लोग उपचारित होकर स्वस्थ हो चुके हैं। यह स्थिति सुखद है। प्रदेश में संक्रमण कम हो रहा है जबकि रिकवरी बेहतर हो रही है। हमें इसी प्रकार टेस्ट, ट्रैक और ट्रीट की नीति को प्रभावी ढंग से लागू रखना होगा। यह बहुत जरूरी है कि प्रदेशवासी कोविड विहैवियर को जीवनशैली का हिस्सा बनाएं।
  • बीते 24 घंटों में प्रदेश में 2,66,326 कोविड टेस्ट संपन्न हुए हैं। इसमें 1,14,172 टेस्ट केवल आरटीपीसीआर माध्यम हुए हैं। अब तक उत्तर प्रदेश में 4.10 करोड़ टेस्ट हो चुके हैं। यह देश के सभी राज्यों में सर्वश्रेष्ठ है। सीएचसी और पीएचसी स्तर पर एंटीजन टेस्ट बढ़ाये जाने की जरूरत है। स्वास्थ्य विभाग इस संबंध में कार्यवाही सुनिश्चित कराए।
  • आज 01 मई से प्रदेश में 18 वर्ष से अधिक आयु के लोगों के कोविड टीकाकरण की प्रक्रिया प्रारंभ हो गई है। वैक्सीन वेस्टेज को न्यूनतम रखने के प्रयासों और नए टीकाकरण सॉफ्टवेयर के ट्रायल के दृष्टिगत अधिक संक्रमण दर वाले सात जनपदों में 85 केंद्रों पर 18-44 आयु वर्ग का टीकाकरण किया जा रहा है। इसे चरणबद्ध रूप से पूरे प्रदेश में लागू किया जाएगा। इसी के साथ-साथ प्रदेश में 2500 केंद्रों पर 45 वर्ष से अधिक आयु के लोगों का टीकाकरण पूर्ववत जारी है।
  • कोविड से लड़ाई में टीकाकरण अहम है। देश मे सर्वाधिक टीकाकरण उत्तर प्रदेश में हुआ है। निःशुल्क टीकाकरण की घोषणा करने वाला उत्तर प्रदेश प्रथम राज्य है। हम सभी नागरिकों के वैक्सीनेशन के लिए नियोजित भाव से कार्य कर रहे हैं।
  • बदलती परिस्थितियों के बीच हमें अस्पतालों में प्रशिक्षित मानव संसाधन की आवश्यकता होगी। ऐसे में, एक्स सर्विस मैन, सेवानिवृत्त चिकित्सक, आर्मी के रिटायर्ड लोग, अनुभवी पैरामेडिकल स्टाफ, मेडिकल/पैरामेडिकल के अन्तिम वर्ष के छात्र/छात्राओं की सेवाएं ली जानी चाहिए। बेहतर हो कि प्रदेश में मैन पॉवर बैंक जैसा प्रयास किया जाए। जहां जैसी आवश्यकता हो, मानव संसाधन को उपलब्ध कराया जा सकेगा। चिकित्सा शिक्षा मंत्री इस दिशा में कार्यवाही सुनिश्चित कराएं।
  • उत्तर प्रदेश में रेमेडेसीवीर की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए भारत सरकार द्वारा प्रतिदिन 50,000 वॉयल का नया आवंटन किया गया है। यह नवीन आवंटन प्रदेश में रेमेडेसीवीर की आपूर्ति सुचारु रखने में बहुत उपयोगी होगी। स्वास्थ्य मंत्री इस जीवनरक्षक दवा की मांग और आपूर्ति के वितरण की स्वयं मॉनिटरिंग करें। मांग, आपूर्ति और वितरण की पूरी प्रक्रिया पारदर्शी ढंग से संपन्न होनी चाहिए।
  • लखनऊ के आरएमएल में 100 कोविड बेड का विस्तार किया जाए। केजीएमयू में जल्द ही डेढ़ सौ बेड जल्द ही और कोविड मरीजों के लिए उपलब्ध हो जाएंगे। कैंसर हॉस्पिटल और डीआरडीओ द्वारा तैयार विशेष हॉस्पिटल भी बहुत जल्द क्रियाशील हो जाएगा। लखनऊ सहित सभी जिलों में कोविड बेड को बढ़ाये जाने की कार्य किया जाए। चिकित्सा शिक्षा मंत्री इसकी हर दिन मॉनिटरिंग करें। बेड में बढ़ोतरी बहुत आवश्यक है।
  • कतिपय जिलों में वेंटिलेटर उपलब्ध हैं किंतु प्रशिक्षित मानव संसाधन के अभाव में इनके क्रियाशील न होने की जानकारी मिली है। स्वास्थ्य विभाग ऐसे सभी अस्पतालों के लिए तत्काल एनेस्थेटिक व अन्य टेक्नीशियन की उपलब्धता सुनिश्चित कराए। यह कार्य प्राथमिकता के साथ किया जाए। जिन जिलों में सीएमओ अथवा सीएमएस के पद रिक्त हैं, वहां 24 घंटे के भीतर नियुक्ति कर दी जाए।
  • मरीज के परिजनों के साथ संवेदनशील व्यवहार किया जाना अपेक्षित है। हमारा सहयोगपूर्ण रवैया परिजन के लिए इस आपदाकाल में बड़ा सम्बल होगा। हेल्पलाइन में सेवाएं दे रहे कार्मिकों समुचित जानकारी दें। यदि कोई व्यक्ति किसी मरीज़ के लिए ऑक्सीजन सिलिंडर की रीफिलिंग के लिए जा रहा है तो उसे यथासंभव सहयोग करे उसे रोका न जाए
    अस्पताल में भरती मरीज़ों के परिजनों को दिन में कम से कम एक बार उनके मरीज के स्वास्थ्य की जानकारी जरूर दी जाए। स्वास्थ्य मंत्री इस व्यवस्था को सुनिश्चित कराएं।
  • प्रदेश में ऑक्सीजन की आपूर्ति सुनिश्चित कराई जा रही है। मांग और आपूर्ति में संतुलन के लिए सभी जरूरी प्रयास किये जा रहे हैं। जामनगर (गुजरात) दुर्गापुर, बरजोरा (पश्चिम बंगाल) राउरकेला से ऑक्सीजन की आपूर्ति कराई जा रही है। निजी अस्पतालों को सीधे भी आपूर्ति कराई जा रही है। आगरा में आज नया ऑक्सीजन प्लांट प्रारंभ हो रहा है। सभी जिलों की स्थिति पर शासन स्तर से सीधी नजर रखी जानी चाहिए।

भाग-दो

  • राज्य सरकार द्वारा ऑक्सीजन जेनरेशन प्लांट लगाए जाने की दिशा में तेजी से प्रयास किये जा रहे हैं। भारत सरकार द्वारा भी ऑक्सीजन प्लांट लगवाए जा रहे हैं। इसके साथ ही हमें नए विकल्पों की तलाश करने की भी आवश्यकता है। आईआईटी कानपुर सहित अन्य तकनीकी संस्थानों के विशेषज्ञों से संवाद स्थापित कर नाइट्रोजन को ऑक्सीजन में कन्वर्ट करने की संभावनाओं को तलाशा जाए।झांसी में एक क्रशर यूनिट ने ऑक्सीजन उत्पादन शुरू किया है। चीनी मिलों में थोड़े तकनीकी सहयोग से ऑक्सीजन उत्पादन भी किया जा सकता है, इस संबंध में विशेषज्ञों की मदद लेते हुए कार्यवाही की जाए।
  • पंचायत चुनाव की मतगणना के सुचारु क्रियान्वयन के लिए सभी जरूरी प्रयास किये जायें। हर मतगणना स्थल के बाहर रैपिड एंटीजन टेस्ट की व्यवस्था रहे। स्वास्थ्य विभाग इस संबंध में आवश्यक कार्यवाही तत्काल सुनिश्चित कराए। मतगणना, कोविड प्रोटोकॉल का पालन करते हुए ही सम्पन्न हो। सभी जिलों के लिए शासन स्तर से एक-एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी को नामित किया जाए।
  • कोविड की पीक के दृष्टिगत देश के विभिन्न विशेषज्ञों द्वारा आकलन प्रस्तुत किया गया है। आईआईटी कानपुर से समन्वय बनाते हुए उत्तर प्रदेश के संबंध में जिलेवार गहन अध्ययन कराया जाए।
  • कंटेनमेंट ज़ोन को प्रभावी बनाएं। साप्ताहिक तीन दिवसीय बन्दी के दौरान आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति सुचारु हो, इसके लिए डोर स्टेप डिलीवरी व्यवस्था को मजबूत किया जाना चाहिए।इसके लिए व्यवस्थित कार्ययोजना बनाई जाए। साप्ताहिक बन्दी में व्यापक सैनीटाइजेशन, फॉगिंग और स्वच्छता संबंधी कार्य कराए जाएं।
  • सभी जिलाधिकारी/सीएमओ जनप्रतिनिधियों से सतत संपर्क में रहें। उनसे मार्गदर्शन लेते रहें। जनप्रतिनिधियों के अनुभव व्यवस्था को सुदृढ़ रखने में उपयोगी होगा। मुख्यमंत्री कार्यालय और मुख्य सचिव कार्यालय इस संबंध में जिलाधिकारियों को यथावश्यक निर्देशित करें।
  • गर्भवती महिलाओं और अन्य गम्भीर रोगियों के इलाज के लिए विशेष प्रबंध किए जाएं। इन्हें जरूरत पड़ने पर तत्काल एम्बुलेंस मिले, चिकित्सकीय सहायता तुरंत मिले।
  • पुलिसकर्मियों की स्वास्थ्य सुरक्षा के दृष्टिगत विशेष प्रयास की जरूरत है। गृह विभाग और स्वास्थ्य विभाग के परस्पर समन्वय से पुलिस लाइन में आवश्यक प्रबंध किए जाएं। प्रत्येक पुलिस लाइन में कोविड सहायता केंद्रो तथा आइसोलेशन वार्ड की सुविधा होनी चाहिए।
  • होम आइसोलेशन में इलाजरत लोगों की जरूरतों का पूरा ध्यान रखा जाए। सीएम हेल्पलाइन से इन लोगों से हर दिन संवाद बनाया जाए। तय प्रोटोकॉल के अनुरूप इन्हें दवाओं का मेडिकल किट उपलब्ध कराया जाए। ऐसे मरीजों के लिए टेलीकन्सल्टेशन व्यवस्था को और बेहतर किया जाए।
  • टेलीकन्सल्टेशन को और प्रभावी बनाने की जरूरत है। होम आइसोलेशन में उपचाराधीन मरीजों को हर दिन स्वास्थ्य संबंधी सलाह दी जाए। नॉन कोविड मरीजों को भी टेलीकन्सल्टेशन की सुविधा मिले। चिकित्सकों से संपर्क नम्बर, समय और विशेषज्ञता के बारे में व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए। इसके लिए जिले स्वास्थ्य विभाग द्वारा जिलों में विशेष टीम गठित की जाए।
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