मुमुक्षु महोत्सव का शुभारम्भ

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शाहजहांपुर।स्वामी शुकदेवानन्द महाविद्यालय, मुमुक्षु आश्रम में भारत वर्ष की स्वतंत्रता के 75 वर्ष पूर्ण होने तथा मुमुक्षु शिक्षा संकुल के मुख्य अधिष्ठाता स्वामी चिन्मयानन्द सरस्वती की आयु के 75 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में ‘‘मुमुक्षु महोत्सव’’ का शुभारम्भ दिनांक 25 फरवरी को हुआ। कार्यक्रम का आरंभ प्रातः 7ः00 बजे श्री दैवी सम्पद महामण्डल की दैनिक प्रार्थना से हुआ। प्रार्थना में स्वामी शुकदेवानन्द स्मृति सभागार में संस्कृत महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ0 हरिनाथ झा, श्री प्रकाश डबराल, स्वामी शुकदेवानन्द महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ0 अनुराग अग्रवाल तथा शिक्षक, शिक्षिकाएँ सम्मिलित हुए।

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विश्वशांति हेतु रूद्रमहायज्ञ एवं सुन्दरकाण्ड का पाठ
प्रार्थना के उपरान्त संकुल के मुख्य अधिष्ठाता स्वामी चिन्मयानन्द जी के सान्निध्य में विश्वशांति एवं मानव कल्याण की कामना हेतु श्री रूद्र महायज्ञ का आयोजन किया गया। यज्ञ का आयोजन आश्रम परिसर में निर्मित दिव्यधाम की यज्ञशाला में किया गया। यज्ञ एवं पूजन अमरकंटक मध्य प्रदेश से पधारे स्वामी हरिहरानन्द सरस्वती जी के संरक्षण में हुआ। यज्ञ के मुख्य यजमान जागेेश्वर, उत्तराखण्ड से पधारे स्वामी धर्मात्मानन्द जी एवं मैनपुरी से पधारे सपत्नीक श्री संजीव कुमार वैद्य जी रहे। रूद्रमहायज्ञ में हरिद्वार मैनपुरी एवं मुमुक्षु आश्रम, शाहजहाँपुर के यज्ञाचार्यो के द्वारा मंत्रोच्चारण के साथ विश्व को दुखों एवं आपदाओं से मुक्त करने की प्रार्थना के साथ आहुतियों का अर्पण किया गया। यज्ञ निरतंर सात दिन चलेगा। दिनांक 03 मार्च को पूर्ण आहुति होगी।
यज्ञ के उपरान्त संकुल परिसर में निर्मित श्रीराम कथा मंडप में श्री तुलसी मानस सेवा समिति, शाहजहाँपुर के द्वारा सुन्दर काण्ड का पाठ किया गया। सुन्दरकाण्ड के संयोजन में डॉ आलोक सिंह, श्री शिशिर शुक्ला, डॉ0 रामशंकर पाण्डेय, श्री संदीप अवस्थी श्री चंदन गिरिस्वामी, डॉ0 प्रभात शुक्ला, डॉ0 मधुकर शुक्ला आदि का योगदान रहा।


कलश शोभा यात्रा

श्रीराम कथा प्रारम्भ होने से पूर्व श्री शंकर मुमुक्षु विद्यापीठ के प्रधानाचार्य नरेन्द्र शर्मा एवं शिक्षिका ममता सिंह के निर्देशन में कलश शोभा यात्रा का आयोजन किया गया। पं0 आदर्श पाण्डेय ने विधि-विधान से कलश पूजन कराया। तदुपरांत श्री शकर मुमुक्षु विद्यापीठ से कलश यात्रा प्रारंभ की गई। यह यात्रा स्वामी धर्मानन्द सरस्वती इण्टर कॉलेज के परिसर से होते हुए श्रीराम कथा मंडप तक जाकर पूर्ण हुई जहाँ पर कलश स्थापना की गई। कलश यात्रा के दौरान संकुल की शिक्षिकाओं के द्वारा पुष्प वर्षा की गई। स्वामी शुकदेवानन्द महाविद्यालय से डॉ0 मीना शर्मा, डॉ0 रीता दीक्षित, डॉ0 कविता भटनागर, डॉ0 प्रतिभा सक्सेना, जागृति गुप्ता आदि शिक्षिकाएँ सम्मिलित हुई।

श्री राम कथा का शुभारंभ
कलश शोभायात्रा के उपरांत कथा मंडप परिसर में स्थापित श्री हनुमान मंदिर में समस्त साधु-संतों के द्वारा पूजन एवं प्राण प्रतिष्ठा की गई। इसके बाद कलश स्थापना एवं श्री रामायण स्थापना हुई। तदुपरांत कथा व्यास पूज्य श्री विजय कौशल जी महाराज एवं अन्य सभी आमंत्रित संतों ने कथा मंच पर अपना आसन ग्रहण किया। इसके बाद महाविद्यालय की प्रबंध समिति के पूर्व सचिव सुरेश सिंघल के द्वारा जगतगुरु रामानुजाचार्य, श्री वासुदेवाचार्य, श्री विजय कौशल जी महाराज, स्वामी हरिहरानंद सरस्वती जी एवं स्वामी अभेदानंद सरस्वती जी का पूजन किया गया। मुमुक्षु शिक्षा संकुल के मुख्य अधिष्ठाता स्वामी चिन्मयानंद सरस्वती ने स्वागत उद्बोधन में कहा कि मेरे जीवन के 75 वर्ष पूर्ण होने के शुभ अवसर पर मुमुक्षु आश्रम में शिक्षा के साथ-साथ धर्म का संगम दृष्टिगोचर हो रहा है। जगतगुरु रामानुजाचार्य, स्वामी वासुदेवाचार्य जी के द्वारा श्रोताओं को आशीष वचनों से अभिसिंचित किया गया। श्री रामायण वंदना एवं श्री गणेश वंदना के साथ पावन श्री राम कथा का शुभारंभ हुआ। श्री राम कथा का आरंभ श्रीरामचरित मानस की चौपाई “मंगल भवन अमंगल हारी द्रवहु सो दशरथ अजिर बिहारी” से हुआ। कौशल जी महाराज ने भगवान की भक्ति को प्राप्त करने के लिए गुरु के आशीर्वाद को परम आवश्यक बताया और कहा कि बिना गुरु की कृपा से भक्तों के लिए ईश्वर की भक्ति का पूर्ण फल नहीं मिलता। उन्होंने कहा कि भगवान की कृपा प्राप्त करने का सबसे सरल मार्ग प्रभु की कथा का श्रवण है।भगवत कथा को सुनकर भक्त गण बहुत ही सरलता से भगवान की कृपा को प्राप्त कर सकते हैं।एक प्रसंग का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि एक बार किसी ने विभीषण से पूछा कि तुम तो लंका के निवासी हो, राक्षस राज रावण के भाई हो ऐसे माहौल में रहने के बाद भी तुम राम के भक्त कैसे हो गए ? तुम राम की शरण में कैसे आ गए? इस पर विभीषण ने कहा जब हनुमान लंका गए और लंका में वह मेरे निज निवास पर पहुंचे तब मैंने हनुमान के मुख से श्री राम जी की कथा को सुना ।हनुमान जी ने श्री राम जी की कथा को इतना तन्मय होकर इतनी मीठी आवाज में सुनाया कि मैं श्री राम की कथा की सुंदरता और उसकी महानता पर मंत्रमुग्ध हो गया। मेरे मन में विचार आया जिस भगवान की कथा इतनी प्यारी है तो वह साक्षात कितने प्यारे होंगे, यही लालसा मुझे भगवान श्री राम जी के चरणों में लेकर आई है। उन्होंने एक भजन गाया- नाम तुम्हारा तारणहारा जाने कब दर्शन होगा, जिसकी महिमा इतनी सुंदर, वह कितना सुंदर होगा। कथा व्यास ने कहा कि राम की कथा और कृष्ण की कथा दोनों एक दूसरे के पूरक हैं अर्थात भगवत की कथा का श्रवण करके भक्तगण भगवान के चरणों को प्राप्त कर सकते हैं जिसके लिए गुरु की कृपा भी अति आवश्यक है। बिना गुरु के मार्गदर्शन के भगवान की भक्ति को प्राप्त करना कठिन है। उन्होंने कहा भगवान का स्वभाव बड़ा कोमल है। कौशल जी महाराज ने भगवान की भक्ति को भक्तगण कैसे प्राप्त करें? इस संदर्भ में अनमोल वचनों से श्रोता गणों को मंत्रमुग्ध कर दिया ।उन्होंने कहा भगवान की लीला बड़ी अपरंपार है और उसकी कथा को सुनने मात्र से ही भक्त भगवान की कृपा को पा लेते हैं, इसलिए सभी को अपने कानों से कथा को सुनना चाहिए, उसी कथा पर बात करनी चाहिए। वैसे भी बड़े बुजुर्ग भी कहते हैं कि अच्छा ही सुनना चाहिए और अच्छा ही बोलना चाहिए। बोलने के लिए सुनना बहुत आवश्यक होता है, तो जैसा सुनोगे वैसा बोलोगे, तभी हम भगवान के श्री चरणों में तन मन धन से समर्पित हो पाएंगे। हमारा आचरण जिन चीजों से निर्मित होता है उनमें से अच्छी और ज्ञान की बातों का श्रवण या फिर जो ज्ञान की बातें हैं उनका श्रवण इन दोनों चीजों का महत्वपूर्ण योगदान होता है। इसलिए हमारा आचरण यदि पवित्र होगा तभी हम निश्छल मन से भगवान की भक्ति में कथा श्रवण के उत्तम मार्ग के माध्यम से उनकी कृपा को प्राप्त कर सकेंगे। राधे राधे रटो चले आएंगे बिहारी गीत पर पंडाल में मौजूद अनगिनत श्रोता भाव विभोर होकर झूमने लगे। कथा का समापन हे राजाराम तेरी आरती उतारू के साथ हुआ। कथा कार्यक्रम में महाविद्यालय की प्रबंध समिति के सचिव डॉ अवनीश मिश्रा, महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ अनुराग अग्रवाल, विधि महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ जयशंकर ओझा, श्रीशंकर मुमुक्षु विद्यापीठ के प्रधानाचार्य श्री नरेंद्र शर्मा, मुमुक्षु शिक्षा संकुल के सभी शिक्षक शिक्षिकाओं सहित हजारों की संख्या में श्रोतागण उपस्थित रहे। कथा के उपरांत प्रसाद वितरण हुआ।

भजन संध्या

कथा के समापन के पश्चात स्वामी शुकदेवानन्द महाविद्यालय के संगीत विभाग के द्वारा स्वामी शुकदेवानन्द स्मृति सभागार में भजन संध्या का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्जवलन एवं पुष्पांजलि से हुआ। इसके उपरान्त गुरू वंदना एवं अतिथियों का चंदन तिलक तथा पुष्पगुच्छ भेंटकर स्वागत किया गया। श्री शंकर मुमुक्षु विद्यापीठ एवं स्वामी शुकदेवानंद महाविद्यालय के संगीत विभाग की अध्यक्ष डॉ0 कविता भटनागर के निर्देशन में विद्यार्थियों के द्वारा भजन प्रस्तुत किये गये। स्वामी शुकदवानंद विधि महाविद्यालय के छात्र हर्षित सिंह के द्वारा प्रस्तुत भजन ‘‘सांवरी सूरत पै मोहन दिल दीवाना हो गया’’ पर श्रोतागत उत्साहित होकर खुशी एवं भक्तिभाव से झूम उठे। राष्ट्रीय सेवा योजना के छात्रों के द्वारा लघु नाटिका का मंचन किया गया। कार्यक्रमांत में संगीत विभाग की प्राध्यापिका डॉ0 प्रतिभा सक्सेना के द्वारा धन्यवाद ज्ञापन किया गया।
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