बरेली । कायस्थ सेना कल्याण परिवार द्वारा वृद्धाश्रम में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के प्रथम दिन कथा व्यास आचार्य मुमुक्षु दद्दा जी महाराज वृंदावन वालों ने भागवत महात्म्य का भावपूर्ण वर्णन किया। उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत केवल ग्रंथ नहीं, बल्कि साक्षात भगवान श्रीकृष्ण का वाङ्मय स्वरूप है। इसके श्रवण से मनुष्य के भीतर भक्ति, ज्ञान और वैराग्य का जागरण होता है। महाराज जी ने नारद जी और भक्ति देवी के संवाद तथा ज्ञान-वैराग्य के पुनर्जागरण का प्रसंग सुनाया। उन्होंने कहा कि जीवन में केवल भक्ति पर्याप्त नहीं, बल्कि विवेक और अनासक्ति भी आवश्यक हैं। गोकर्ण-धुंधुकारी प्रसंग के माध्यम से उन्होंने बताया कि सच्चे मन से भागवत की शरण लेने वाले जीव का उद्धार संभव है। सात गांठ वाले बांस का प्रसंग बताते हुए उन्होंने काम, क्रोध, लोभ, मोह, मद, मत्सर और अज्ञान जैसे विकारों से मुक्ति का संदेश दिया। कथा के दौरान श्रद्धालु भावविभोर हो उठे। इस अवसर पर आलोक प्रधान एडवोकेट, रविन्द्र श्रीवास्तव, आलोक सक्सेना एडवोकेट, डॉ. नितिन सक्सेना, श्यामदीप सक्सेना एडवोकेट, आलोक कुमार सक्सेना, आलोक वर्मा, ईशान इशू, प्रदीप श्रीवास्तव, प्रीति सक्सेना, सीमा प्रधान, डॉ. सोनिया सक्सेना, नीरा श्रीवास्तव, योगेश सक्सेना, आर्यन प्रधान, डॉ. सुबोध अस्थाना, रवि सक्सेना, सुनील कुमार सक्सेना एडवोकेट, अश्वनी जौहरी और मयंक श्रीवास्तव सहित अनेक श्रद्धालु उपस्थित रहे।