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ईश्वर को जाने बिना मानना अंधविश्वास को जन्म देता है : आचार्य संजीव रूप

October 4, 2026By admin0 comments
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बदायूँ। ओम स्वरूप लॉन, डीएम रोड पर चल रहे वेद कथा एवं योग महोत्सव में शनिवार को प्रातः पतंजलि योगपीठ हरिद्वार से पधारे योगाचार्य डॉ. संजय योगी ने साधकों को योग, व्यायाम एवं प्राणायाम कराया तथा स्वस्थ और निरोगी जीवन के उपाय बताए। दोपहर 2 से 4 बजे तक अंतर्राष्ट्रीय वेद कथाकार आचार्य संजीव रूप ने वेद कथा प्रस्तुत की। रात्रि 7 से 10 बजे तक भी वेद कथा एवं आध्यात्मिक कार्यक्रम आयोजित हुआ। कथा में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया। आचार्य संजीव रूप ने कहा कि “ईश्वर को जाने बिना केवल मान लेना अंधविश्वास को जन्म देता है।” उन्होंने कहा कि समाज में फैली अनेक कुरीतियों, अंधविश्वासों और सामाजिक समस्याओं का एक प्रमुख कारण अज्ञान है। जो व्यक्ति ईश्वर को मानता तो है, लेकिन उसके वास्तविक स्वरूप और गुण-कर्म-स्वभाव को नहीं जानता, वह अनजाने में अनेक अंधविश्वासी मान्यताओं का शिकार हो सकता है। इसलिए पहले ईश्वर को जानना और उसके बाद मानना आवश्यक है। उन्होंने अवतारवाद, फलित ज्योतिष, मूर्ति पूजा, भूत-प्रेत, झाड़-फूंक तथा तथाकथित चमत्कारी उपचारों पर तार्किक विचार रखते हुए कहा कि गंभीर बीमारी की स्थिति में योग्य चिकित्सकों से उपचार कराने के बजाय अंधविश्वास के कारण अनेक लोग झाड़-फूंक के चक्कर में पड़ जाते हैं। उन्होंने इसे व्यक्ति और समाज दोनों के लिए चिंताजनक बताया। आचार्य रूप ने कहा कि विज्ञान और वैज्ञानिक दृष्टिकोण ने मानव जीवन को अनेक सुविधाएँ और उपयोगी आविष्कार दिए हैं। धर्म का आधार अंधविश्वास नहीं, बल्कि ज्ञान, सत्य, विवेक और सदाचार होना चाहिए। उन्होंने कहा कि ईश्वर मनुष्य को सदाचारी, सत्यवादी और परोपकारी बनने की प्रेरणा देता है। पूजा के वास्तविक स्वरूप की व्याख्या करते हुए उन्होंने कहा कि ईश्वर की उपासना केवल फूल चढ़ाने अथवा बाहरी कर्मकांड तक सीमित नहीं है, बल्कि जीवन में सत्य, अहिंसा, अस्तेय, ब्रह्मचर्य, अपरिग्रह, शौच, संतोष, तप, स्वाध्याय और ईश्वर-प्रणिधान जैसे सद्गुणों को धारण करना ही सच्ची आध्यात्मिक साधना है। उन्होंने कहा कि जब तक हमारे जीवन में सत्य, अहिंसा और सद्गुण नहीं आएँगे, तब तक व्यक्ति, परिवार और समाज का वास्तविक सुधार संभव नहीं है। कार्यक्रम में पं प्रणव मिश्र ने भी अपने विचार रखे ।पंडित उदयराज आर्य ने भजन प्रस्तुत किए, जबकि संगीताचार्य पंडित मुकेश आर्य ने अपने मधुर संगीत से श्रोताओं को भाव-विभोर किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता स्वामी पूर्ण प्रकाश जीने की । कार्यक्रम में पतंजलि योगपीठ एवं भारत स्वाभिमान के सैकड़ों सदस्य सहित विवेक जौहरी, ज्ञानेन्द्र नाथ मिश्रा, गिरधारी सिंह, योगाचार्य आचार्य सोना शर्मा, हार्टफुलनेस संस्था के लखन सिंह, झब्बू सिंह, आवेश आर्य, रामप्रकाश सिंह, अवधेश सिंह, बृजभूषण सिंह, मदनलाल सिंह, योगेंद्र पाल सिंह, सतीश चंद्र, श्रीमती राठौर, श्रीमती चंद्रावती आदि उपस्थित रहे।

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