बरेली। बरेली मंडल के अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में कार्यरत लगभग पांच सौ आउटसोर्सिंग कर्मचारियों को चार माह से लंबित मानदेय का भुगतान दीपावली के पावन पर्व पर भी नहीं किया गया। इससे कर्मचारियों और उनके परिवारों में भारी आक्रोश एवं निराशा व्याप्त है। त्योहार के अवसर पर भी कर्मचारियों को उनका मेहनताना न मिलना विभागीय व्यवस्था की संवेदनहीनता और कर्मचारियों के प्रति उदासीनता को उजागर करता है। शिक्षणेत्तर कर्मचारी संयुक्त परिषद के वरिष्ठ प्रदेश उपाध्यक्ष हरिशंकर ने कड़े शब्दों में नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है कि लगभग पांच सौ कर्मचारी चार माह से अपने मानदेय की प्रतीक्षा कर रहे हैं। कई बार अधिकारियों के समक्ष मांग उठाने और ध्यान आकृष्ट कराने के बावजूद कर्मचारियों को उनका हक नहीं मिल सका। आखिर कर्मचारी अपने परिवार का भरण-पोषण कैसे करें और बिना मानदेय के दीपावली की खुशियां कैसे मनाएं?
हरिशंकर ने कहा कि कर्मचारियों से नियमित रूप से सेवाएं ली जा रही हैं, लेकिन उनके पारिश्रमिक का भुगतान समय से नहीं किया जा रहा है। कर्मचारियों का मानदेय कोई सरकारी एहसान नहीं, बल्कि उनके श्रम का अधिकार है। दीपावली पर भी भुगतान न होना उन कर्मचारियों के साथ घोर अन्याय है, जो सीमित मानदेय में अपने परिवार की जिम्मेदारियां निभाते हैं। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि कर्मचारियों की इस पीड़ा और आर्थिक बदहाली को देखते हुए शिक्षणेत्तर कर्मचारी संयुक्त परिषद ने इस वर्ष दीपावली का पर्व नहीं मनाने का निर्णय लिया है। जब लगभग पांच सौ कर्मचारियों के घरों में आर्थिक संकट और निराशा का माहौल है, तब परिषद के लिए दीपावली की खुशियां मनाना उचित नहीं है।
परिषद ने शासन एवं संबंधित विभागीय अधिकारियों से मांग की है कि बरेली मंडल के सभी प्रभावित आउटसोर्सिंग कर्मचारियों का चार माह का लंबित मानदेय तत्काल निर्गत कराया जाए तथा भुगतान में लापरवाही बरतने वाले जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए। भविष्य में प्रत्येक माह नियमित रूप से मानदेय भुगतान सुनिश्चित किया जाए।
इस वर्ष दिवाली नहीं मनाएगा शिक्षणेत्तर कर्मचारी संयुक्त परिषद

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