बरेली। अपनी 13 सूत्रीय लंबित मांगों को लेकर आंदोलन कर रहीं राजकीय नर्सेज संघ की नर्सों ने शनिवार, 7 नवंबर को पूरे उत्तर प्रदेश में शासन के समझौता पत्र की प्रतियां जलाकर काला दिवस मनाया। आंदोलन के 30वें दिन भी नर्सों का विरोध जारी रहा। प्रदेश के विभिन्न जनपदों के जिला चिकित्सालयों और मेडिकल कॉलेजों में नर्सिंग संवर्ग के कर्मचारियों ने काली पट्टी बांधकर सरकार के प्रति नाराजगी जताई।
राजकीय नर्सेज संघ उत्तर प्रदेश के आह्वान पर आयोजित इस विरोध प्रदर्शन में बरेली सहित प्रदेश के सभी जनपदों की नर्सें शामिल हुईं। संघ के अनुसार, 9 अक्टूबर 2026 से नर्सिंग संवर्ग का शांतिपूर्ण आंदोलन शुरू हुआ था, जो अब 30वें दिन में पहुंच गया है। इससे पहले 21 अक्टूबर से प्रतिदिन दो घंटे का कार्य बहिष्कार किया जा रहा है। वहीं, 22 अक्टूबर को लखनऊ स्थित स्वास्थ्य भवन का घेराव कर नर्सों ने अपनी मांगों को लेकर आवाज बुलंद की थी।
संघ ने सवाल उठाया कि उप मुख्यमंत्री एवं चिकित्सा स्वास्थ्य मंत्री ब्रजेश पाठक की ओर से एक वर्ष पूर्व आश्वासन दिए जाने और शासन स्तर पर पांच प्रमुख मांगों पर सहमति बनने के बावजूद अब तक शासनादेश जारी क्यों नहीं किया गया। नर्सेज का कहना है कि समझौते और आश्वासनों के बाद भी मांगें पूरी नहीं होना कर्मचारियों के साथ अन्याय है।
नर्सिंग संवर्ग की प्रमुख मांगों में गृह जनपद में तैनाती, पदोन्नति, पालनाघर की व्यवस्था, सवैतनिक अध्ययन अवकाश, मेडिकल कॉलेजों में परिवर्तित अस्पतालों में संवर्ग के हितों की रक्षा तथा केंद्र सरकार के समान भत्ते दिए जाने की मांग शामिल है।
राजकीय नर्सेज संघ की बरेली शाखा की जिला एवं मंडल अध्यक्ष सोनिया मसीह ने कहा कि नर्सिंग कर्मचारियों की मांगों को लंबे समय से लंबित रखा जा रहा है। अब केवल आश्वासन से काम नहीं चलेगा, बल्कि सरकार को मांगों के संबंध में शासनादेश जारी करना होगा।
वहीं, जिला मंत्री अनिता लाल ने भी मांगों के शीघ्र निस्तारण की आवश्यकता जताई। संघ ने स्पष्ट किया कि जब तक लंबित मांगों पर ठोस निर्णय लेकर शासनादेश जारी नहीं किया जाता, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।
30 दिन से आंदोलनरत नर्सों ने जलाईं समझौता पत्र की प्रतियां, पूरे प्रदेश में मनाया काला दिवस

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