बरेली। दिल्ली में एसआईआर प्रक्रिया रद्द कराने और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन के दौरान कथित दमन और सैकड़ों लोगों को हिरासत में लिए जाने के विरोध में इंकलाबी मजदूर केंद्र ने आवाज उठाई। संगठन के शहर सचिव ध्यान चंद्र मौर्य के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन जिला अधिकारी कार्यालय में एसडीएम कुमारी पूनम भास्कर को सौंपा। ध्यान चंद्र मौर्य ने कहा कि एसआईआर के नाम पर मतदाता सूचियों से बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाने से लोकतंत्र और संविधान में प्रदत्त मताधिकार पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कई स्थानों पर मतदाताओं को स्थानांतरित या अनुपस्थित बताकर सूची से बाहर किया गया है, जबकि वे संबंधित स्थानों पर मौजूद हैं। दिल्ली के चांदनी चौक क्षेत्र स्थित बेला एस्टेट का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि एसआईआर से पहले यहां मतदाता सूची में 729 नाम थे, जबकि 31 अगस्त की मसौदा सूची में केवल एक नाम शेष रहने का दावा किया गया।
उन्होंने कहा कि दस्तावेजों की कमी के कारण गरीबों, भूमिहीनों, प्रवासी मजदूरों, दलितों, आदिवासियों और अल्पसंख्यकों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। संगठन का आरोप है कि दिल्ली में 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर प्रस्तावित शांतिपूर्ण प्रदर्शन को रोकने के लिए भारी संख्या में सुरक्षा बल तैनात किए गए और प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया। इससे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार का हनन हुआ है।
ज्ञापन के माध्यम से मांग की गई कि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दमनात्मक कार्रवाई तत्काल बंद की जाए, इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों और मंत्रियों को पद से हटाया जाए, एसआईआर प्रक्रिया रद्द की जाए तथा मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को तत्काल पद से बर्खास्त किया जाए। संगठन ने इसे लोकतांत्रिक और संवैधानिक अधिकारों से जुड़ा गंभीर मामला बताया। ज्ञापन के दौरान ध्यान चंद्र मौर्य , कृष्णपाल , कैलाश आदि मौजूद थे।
एसआईआर रद्द करने और मुख्य चुनाव आयुक्त को बर्खास्त करने की मांग, राष्ट्रपति को भेजा ज्ञापन

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