बरेली। खानकाह-ए-आलिया नियाजिया में बुधवार को जश्न-ए-चिरागां का आयोजन अकीदत और श्रद्धा के साथ किया गया। इस मौके पर खानकाह परिसर में मन्नतों के चिराग रोशन किए गए। चारों ओर जगमगाते चिरागों का दृश्य बेहद आकर्षक रहा। बड़ी संख्या में अकीदतमंदों ने चिराग हासिल कर अपनी मन्नतों और दुआओं के साथ कार्यक्रम में शिरकत की। खानकाह से जुड़े लोगों के अनुसार करीब 250 वर्ष पूर्व हजरत गौस-ए-आजम रजि. ने हजरत शाह नियाज रजि. को ख्वाब में बिशारत दी थी कि 17 रबीउस्सानी, यानी गौस-ए-पाक के विसाल के दिन उनके नाम का चिरागां किया जाए। मान्यता है कि इस दिन गौस-ए-पाक के नाम का मन्नत का चिराग लेने वाले की मन्नत अल्लाह तआला गौस-ए-पाक के सदके और हजरत शाह नियाज के वसीले से पूरी फरमाता है। इसी परंपरा के तहत हर वर्ष जश्न-ए-चिरागां का आयोजन किया जाता है।
बुधवार को खानकाह में उमड़ी भीड़ में विभिन्न समुदायों के लोग शामिल रहे। अकीदतमंद हाथों में चिराग लिए अपनी बारी का इंतजार करते नजर आए। मन्नत का चिराग हासिल करने के लिए लंबी कतारें लगी रहीं। भारी भीड़ के बावजूद लोग अदब, संयम और अनुशासन के साथ कतारों में खड़े रहे। सज्जादानशीन हजरत मेहंदी मियां साहब की ओर से देर रात तक अकीदतमंदों को मन्नत के चिराग वितरित किए जाते रहे। इस दौरान खानकाह परिसर में कव्वाली और मनकबतों का सिलसिला भी जारी रहा। देर रात कव्वाली के बाद हजरत गौस-ए-आजम और हजरत महबूब-ए-इलाही निजामुद्दीन औलिया रजि. का कुल शरीफ संपन्न हुआ। सज्जादानशीन ने अमन-ए-आलम, मुल्क, कौम और जायरीन के लिए दुआ की। जश्न-ए-चिरागां की व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी प्रबंधक जुनैदी मियां नियाजी ने संभाली। खानदान के अन्य सदस्यों, मुरीदीन और सचिव मौलाना कासिम का भी विशेष सहयोग रहा। कतार में लगे अकीदतमंदों के लिए शर्बत का इंतजाम किया गया। मेडिकल कैंप में लोगों का उपचार भी किया गया। कार्यक्रम के दौरान माइक से लगातार आवश्यक घोषणाएं की जाती रहीं। वहीं हजरत गौस-ए-पाक और हजरत महबूब-ए-इलाही की शान में मनकबतें पेश की जाती रहीं। चिरागों की रोशनी, अकीदतमंदों की भीड़ और दुआओं के बीच खानकाह परिसर का माहौल देर रात तक रूहानी और श्रद्धामय बना रहा।
खानकाह-ए-नियाजिया में जश्न-ए-चिरागां, जलाये मन्नतों के चिराग़

6.8K views

























































































