बदायूं। बिसौली विधानसभा क्षेत्र की सियासत इन दिनों ऐसे मोड़ पर पहुंचती दिखाई दे रही है, जहां 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले टिकट की तस्वीर से ज्यादा नेताओं के राजनीतिक ठिकाने को लेकर सवाल उठने लगे हैं। कभी भाजपा के मजबूत चेहरे रहे पूर्व विधायक कुशाग्र सागर और मौजूदा सपा विधायक आशुतोष मौर्य—दोनों ही बिसौली की राजनीति के प्रमुख नाम हैं। खास बात यह है कि वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में दोनों के बीच मुकाबला बेहद करीबी रहा था। सपा के आशुतोष मौर्य को 1,10,569 वोट मिले थे, जबकि भाजपा के कुशाग्र सागर को 1,08,735 वोट मिले। यानी जीत का अंतर महज 1,834 वोट रहा था।
अब 2027 का चुनाव करीब आने के साथ बिसौली की राजनीतिक बिसात पर सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगली बार दोनों प्रमुख दल किस चेहरे पर भरोसा करेंगे। इस सवाल को इसलिए भी हवा मिल रही है क्योंकि राज्यसभा चुनाव 2024 में सपा विधायक आशुतोष मौर्य के क्रॉस वोटिंग करने की खबर सामने आई थी। उस समय उनके भाजपा के पक्ष में मतदान करने की बात सामने आई और इसके बाद बिसौली की स्थानीय राजनीति में उनके रुख को लेकर लगातार चर्चा बनी रही।
इस घटनाक्रम के बाद आशुतोष मौर्य और भाजपा के बीच बढ़ती राजनीतिक नजदीकियों की चर्चाएं समय-समय पर सामने आती रही हैं। वर्ष 2024 में उनके परिवार के कुछ सदस्यों के भाजपा में शामिल होने की भी रिपोर्ट प्रकाशित हुई थी। इसी पृष्ठभूमि में यह सवाल लगातार उठता रहा कि 2027 में भाजपा बिसौली सीट पर किस चेहरे के साथ मैदान में उतरेगी। अप्रैल 2026 की एक रिपोर्ट में भी बिसौली के राजनीतिक समीकरणों में आशुतोष मौर्य के परिवार और पूर्व विधायक कुशाग्र सागर के बीच संभावित प्रतिस्पर्धा को लेकर चर्चा दर्ज की गई थी।
22 सितंबर की मुलाकात ने फिर बढ़ाई चर्चा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से लखनऊ स्थित उनके आवास पर भाजपा जिलाध्यक्ष राजीव कुमार गुप्ता, सदर विधायक महेश चंद्र गुप्ता, दातागंज विधायक राजीव कुमार सिंह और बिल्सी विधायक हरीश शाक्य के साथ बिसौली विधायक आशुतोष मौर्य की मौजूदगी ने स्थानीय राजनीतिक हलकों में नई चर्चा छेड़ दी है। आधिकारिक तौर पर यह मुलाकात बदायूं के विकास से जुड़े मुद्दों को लेकर बताई गई है। इसमें मेडिकल कॉलेज, कछला पर्यटन स्थल, ट्रॉमा सेंटर और स्पोर्ट्स कॉलेज जैसे विषयों पर चर्चा की गई। मुख्यमंत्री के जल्द बदायूं आने का आश्वासन मिलने की बात भी सामने आई है।
हालांकि इस मुलाकात को सीधे तौर पर 2027 के टिकट से जोड़ना अभी जल्दबाजी होगी। भाजपा या सपा की ओर से आशुतोष मौर्य के भविष्य अथवा 2027 में किसी संभावित टिकट को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा सामने नहीं आई है। इसलिए फिलहाल यह राजनीतिक संकेतों और संभावनाओं का विषय है, न कि तय हो चुका फैसला।
लेकिन बिसौली के मौजूदा राजनीतिक इतिहास को देखें तो मामला साधारण नहीं है। वर्ष 2017 में कुशाग्र सागर ने आशुतोष मौर्य को हराकर भाजपा के लिए सीट जीती थी। इसके बाद 2022 में आशुतोष मौर्य ने वापसी करते हुए कुशाग्र सागर को सिर्फ 1,834 वोट से पराजित किया। यानी पिछले दो विधानसभा चुनावों में दोनों नेता एक-दूसरे के आमने-सामने रहे और एक-एक बार जीत हासिल कर चुके हैं।
यही वजह है कि अब यदि भाजपा और आशुतोष मौर्य के बीच राजनीतिक समीकरण आगे बढ़ते हैं तो सबसे बड़ा सवाल कुशाग्र सागर को लेकर उठना स्वाभाविक है। भाजपा के लिए वह बिसौली का जाना-पहचाना चेहरा हैं और 2017 में इसी सीट से विधायक रह चुके हैं। दूसरी ओर आशुतोष मौर्य मौजूदा विधायक हैं और 2022 में भाजपा के मजबूत उम्मीदवार को बेहद कम अंतर से हराकर विधानसभा पहुंचे थे। ऐसे में दोनों की राजनीतिक उपयोगिता और स्थानीय पकड़ को लेकर पार्टी स्तर पर किस तरह का निर्णय होगा, यह आने वाले समय में महत्वपूर्ण होगा।
दूसरी तरफ यदि आशुतोष मौर्य और भाजपा के बीच नजदीकियां आगे बढ़ती हैं तो सपा के सामने भी बिसौली में नए चेहरे को लेकर निर्णय की स्थिति बन सकती है। वहीं अगर कुशाग्र सागर को भाजपा से टिकट नहीं मिलता और वह पार्टी के साथ बने रहते हैं, तो उनके समर्थकों के सामने भी राजनीतिक भविष्य को लेकर सवाल खड़े होंगे। यदि वह किसी दूसरे दल का रुख करते हैं तो बिसौली में चुनावी समीकरण और अधिक दिलचस्प हो सकते हैं। लेकिन फिलहाल कुशाग्र सागर के सपा में जाने या आशुतोष मौर्य के भाजपा से चुनाव लड़ने की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं है।
बिसौली की राजनीति इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित विधानसभा सीट है और यहां पिछले चुनाव में भाजपा-सपा के बीच मुकाबला बेहद करीबी रहा। 2024 के लोकसभा चुनाव के विधानसभा-खंडवार आंकड़ों के एक प्रकाशित विश्लेषण के मुताबिक बिसौली विधानसभा क्षेत्र में भाजपा को सपा पर 11,795 वोट की बढ़त मिली थी। इससे यह संकेत जरूर मिलता है कि 2027 में 2022 के विधानसभा परिणाम को जस का तस दोहराना जरूरी नहीं होगा और नए राजनीतिक समीकरण महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
विधायक आशुतोष मौर्य के मौजूदा कार्यकाल को लेकर भी क्षेत्र में राजनीतिक बहस जारी है। अगस्त 2026 की एक रिपोर्ट में बिसौली में सड़क, जाम, रोडवेज, शिक्षा और रोजगार जैसे मुद्दों को लेकर जनता की अपेक्षाओं और कुछ अधूरे कार्यों का उल्लेख किया गया है। रिपोर्ट में विधायक की ओर से बाईपास, पुल, ग्रामीण सड़कों और बिजली परियोजनाओं के लिए शासन स्तर पर प्रयास किए जाने की बात भी दर्ज है।
इस पूरे घटनाक्रम का सबसे दिलचस्प पहलू यह है कि बिसौली में फिलहाल चुनाव घोषित नहीं हुआ है, टिकट घोषित नहीं हुए हैं और कोई औपचारिक दल-बदल भी सामने नहीं आया है, लेकिन राजनीतिक गतिविधियां संभावित समीकरणों की जमीन जरूर तैयार कर रही हैं। एक तरफ आशुतोष मौर्य का भाजपा नेताओं के साथ सार्वजनिक मेलजोल चर्चा में है तो दूसरी तरफ कुशाग्र सागर के सामने अपनी राजनीतिक भूमिका और भविष्य की चुनौती का सवाल है।
ऐसे में बिसौली की सियासत में आने वाले महीनों में तीन सवाल सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण रहेंगे—भाजपा का अगला चेहरा कौन होगा, सपा किसे अपना उम्मीदवार बनाएगी और क्या 2027 से पहले दोनों प्रमुख चेहरों में से कोई अपना राजनीतिक ठिकाना बदलेगा? इन तीन सवालों के जवाब ही बिसौली की अगली सियासी तस्वीर तय करने में अहम होंगे। फिलहाल इतना जरूर कहा जा सकता है कि 2027 की लड़ाई शुरू होने से पहले ही बिसौली में टिकट की सियासी शतरंज बिछ चुकी है और हर नई मुलाकात, हर राजनीतिक गतिविधि और हर बयान को इसी नजर से देखा जा रहा है।
बिसौली की सियासत में फिर गरमाया ‘पाला बदलने’ का सवाल, आशुतोष मौर्य की भाजपा नेताओं से बढ़ती नजदीकियों ने बढ़ाई कुशाग्र सागर की बेचैनी?


























































































