बरेली। हिरोशिमा दिवस के अवसर पर गुरुवार को राजीव गांधी स्टडी सर्किल के तत्वावधान में चौकी चौराहा स्थित कैंप कार्यालय पर विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। गोष्ठी में वक्ताओं ने परमाणु हथियारों के दुष्परिणामों पर चिंता जताते हुए विश्व शांति और मानवता की रक्षा का संदेश दिया।मंडल कोऑर्डिनेटर डॉ. चारू मेहरोत्रा ने कहा कि 6 और 9 अगस्त 1945 को अमेरिका द्वारा जापान के हिरोशिमा और नागासाकी पर परमाणु बम गिराए जाने की त्रासदी पूरी मानव सभ्यता के लिए चेतावनी है। उन्होंने कहा कि यदि परमाणु हथियारों का प्रयोग स्वार्थ और युद्ध की मानसिकता के साथ होता रहा तो भविष्य में न विजेता बचेगा और न ही पराजित। मुख्य वक्ता एवं राजीव गांधी स्टडी सर्किल के प्रदेश अध्यक्ष प्रो. अलाउद्दीन खान ने कहा कि आज विश्व बारूद के ढेर पर खड़ा है। विभिन्न देशों के बीच बढ़ते युद्ध और तनाव मानवता, अर्थव्यवस्था तथा सामाजिक व्यवस्था के लिए गंभीर खतरा बन चुके हैं। उन्होंने कहा कि परमाणु संघर्ष की आशंका पूरी दुनिया के अस्तित्व पर प्रश्नचिह्न लगा सकती है। रामदेव पांडे ने विश्व शांति की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि यदि समय रहते विश्व समुदाय नहीं जागा तो तृतीय विश्व युद्ध की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। कुंवर मनोज सिंह ने कहा कि आधुनिक परमाणु और हाइड्रोजन बम मानव सभ्यता को पूरी तरह नष्ट करने की क्षमता रखते हैं। सरदार इकबाल सिंह वाले ने प्रेम, भाईचारे और शांति को आज की सबसे बड़ी जरूरत बताया। गोष्ठी में असलम चौधरी, सुरेश दिवाकर, मनोज कुमार और डॉ. अलका मेहरोत्रा सहित अन्य वक्ताओं ने भी अपने विचार रखे। कार्यक्रम के अंत में हिरोशिमा और नागासाकी के पीड़ितों की स्मृति में दो मिनट का मौन रखकर मोमबत्तियां जलाकर श्रद्धांजलि अर्पित की गई।