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Uttar Pradesh

उत्तर प्रदेश बना फार्मा और स्वास्थ्य क्षेत्र में निवेश, नवाचार और विश्वास का नया वैश्विक केंद्र

February 16, 2026By admin0 comments
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बदायूँ । आज उत्तर प्रदेश अपनी पहचान ‘ट्रस्ट, ट्रांसफॉर्मेशन और टाइमली डिलीवरी’ के रोल मॉडल के रूप में स्थापित कर रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘विकसित भारत’ के संकल्प को धरातल पर उतारने और प्रदेश को फार्मा सेक्टर में अग्रणी मैन्युफैक्चरिंग और इनोवेशन हब बनाने के लिए राज्य सरकार पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। वर्तमान में उत्तर प्रदेश के पास न केवल देश का सबसे बड़ा कंज्यूमर मार्केट है, बल्कि फार्मा सेक्टर के लिए जरूरी विश्वस्तरीय इन्फ्रास्ट्रक्चर और कुशल वर्कफोर्स भी प्रचुर मात्रा में उपलब्ध है। राज्य सरकार अपने प्रत्येक निवेशक को ‘ट्रिपल एस’ अर्थात् ‘सेफ्टी, स्टेबिलिटी और स्पीड’ की गारंटी प्रदान कर रही है, जो औद्योगिक विकास के लिए अनिवार्य शर्त है।
फार्मा और हेल्थकेयर के क्षेत्र में मौजूद असीमित संभावनाओं को देखते हुए राज्य के विभिन्न जनपदों में क्लस्टर आधारित विकास किया जा रहा है। प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध ललितपुर जनपद में प्रदेश के पहले फार्मा पार्क के लिए भूमि अधिग्रहण का कार्य सफलतापूर्वक संपन्न हो चुका है। वहीं, जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट के निकट लगभग 350 एकड़ क्षेत्र में मेडिकल डिवाइस पार्क का निर्माण युद्धस्तर पर जारी है। इस पार्क की सफलता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अब तक 100 से अधिक फार्मा कंपनियां इससे जुड़ चुकी हैं। निवेशकों की सुविधा के लिए यहाँ यू.एस.एफ.डी.ए. (न्ैथ्क्।) टेस्टिंग लैब स्थापित करने का कार्य भी प्रारंभ कर दिया गया है। ललितपुर के फार्मा पार्क को हब एंड स्पोक मॉडल के रूप में विकसित किया जा रहा है, जिसमें आर. एंड डी. (त्-क्) की अत्याधुनिक सुविधाएं उपलब्ध होंगी।
शिक्षा और अनुसंधान के क्षेत्र में भी प्रदेश लंबी छलांग लगा रहा है। लखनऊ में एक वर्ल्ड क्लास फार्मा इंस्टीट्यूट के निर्माण की दिशा में कदम बढ़ाए गए हैं, जबकि गौतमबुद्धनगर, बरेली और पूर्वी उत्तर प्रदेश में भी नए फार्मा पार्क विकसित करने की योजना पर कार्य हो रहा है। नवाचार को बढ़ावा देने के लिए आई.आई.टी. कानपुर के सहयोग से 1,200 करोड़ रुपये की लागत से ‘मेड-टेक सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ विकसित किया जा रहा है। इसके अतिरिक्त, एस.जी.पी.जी.आई. को दूसरे सेंटर के रूप में तैयार किया जा रहा है। लखनऊ पहले से ही सी.डी.आर.आई. और एन.बी.आर.आई. जैसी राष्ट्रीय स्तर की चार केंद्रीय प्रयोगशालाओं का केंद्र है, जो अनुसंधान के क्षेत्र में प्रदेश की स्थिति को मजबूत करती हैं।
नीतिगत मोर्चे पर उत्तर प्रदेश अब पॉलिसी पैरालिसिस के दौर से बाहर निकल चुका है। प्रदेश में वर्तमान में 34 सेक्टोरियल पॉलिसीज प्रभावी हैं, जो निवेशकों को स्पष्टता और सुरक्षा प्रदान करती हैं। निवेश की प्रक्रिया को सुगम बनाने के लिए सिंगल विंडो प्लेटफॉर्म के माध्यम से सुविधाएं दी जा रही हैं और पॉलिसी के दायरे में रहकर समयबद्ध तरीके से इंसेंटिव वितरण सुनिश्चित किया जा रहा है। फार्मास्यूटिकल और मेडिकल डिवाइस नीति के तहत सब्सिडी, स्टांप ड्यूटी में छूट और निर्यात प्रोत्साहन की बेहतरीन व्यवस्था है। साथ ही, एफ.डी.आई. और फॉर्च्यून-500 पॉलिसी के माध्यम से वैश्विक निवेश को आमंत्रित करने के बड़े अवसर सृजित किए गए हैं। विशेष बात यह है कि उत्तर प्रदेश का यह विकास केवल औद्योगिक नहीं बल्कि संतुलित और पर्यावरण के अनुकूल भी है। पिछले 9 वर्षों में भौतिक विकास के साथ-साथ प्रदेश ने अपने फॉरेस्ट कवर में भी उल्लेखनीय वृद्धि की है। बेहतर कनेक्टिविटी और जवाबदेह प्रशासन के दम पर उत्तर प्रदेश आज फार्मा निवेश का पसंदीदा गंतव्य बन चुका है। केंद्र की दूरदर्शी नीतियों और राज्य सरकार के जमीनी प्रयासों के समन्वय से उत्तर प्रदेश अब फार्मा और बायोफार्मा मैन्युफैक्चरिंग के वैश्विक केंद्र के रूप में भारत की वैश्विक नेतृत्व क्षमता को नई शक्ति प्रदान कर रहा है।

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