भारतीय संविधान एक जीवंत दस्तावेज है”: प्रो. बलराज चौहान

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शाहजहांपुर। आज संविधान दिवस के अवसर पर “भारतीय संविधान की कार्य प्रणाली एक वृहद अवलोकन विषय पर एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया जिसमें पूर्व केंद्रीय गृह राज्य मंत्री स्वामी चिन्मयानंद सरस्वती जी के सानिध्य में मुख्य अतिथि प्रो. बलराज चौहान पूर्व कुलपति डॉ. राम मनोहर लोहिया राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय, लखनऊ एवं स्टेट लीडर क्रिप्स (यू.पी.), मुख्य वक्ता डॉ. प्रमोद तिवारी असि. प्रो. दिल्ली विश्वविद्यालय, दिल्ली, श्री मनेन्द्र सिंह वरिष्ठ अधिवक्ता एवं पूर्व अध्यक्ष सेंट्रल बार एसोसिएशन, शाहजहांपुर, डॉ. वी. के, सिंह, पूर्व विधि अधिकारी इलाहाबाद विश्वविद्यालय (संयोजक:लोक पहल), एड. नारायण दत्त त्रिपाठी, अध्यक्ष सेंट्रल बार एसोसिएशन, शाहजहाँपुर मंचासीन रहें। स्वामी चिन्मयानंद सरस्वती जी ने कहा कि इतने संशोधन के बाद भी संविधान की मूल मर्यादा नहीं बदली है। देश की जनता का कर्तव्य है कि वे संविधान की रक्षा करे, क्योंकि हम विकास की जिस ऊंचाई को छू रहे हैं, उसकी शक्ति हमें भारतीय संविधान दे रहा है, और हमारी रक्षा कर रहा है। कार्यक्रम अध्यक्ष एडवोकेट मनेन्द्र सिंह जी ने बताया कि 26 नवंबर 1949 को संविधान दिवस ने कई चर्चाओं और संशोधनों के बाद संविधान को अंतिम रूप दिया था पहले 26 नवंबर के दिन राष्ट्रीय कानून दिवस मनाया जाता था बाद में साल 2015 से संविधान दिवस मनाने की परंपरा की शुरुआत हुई। मुख्य अतिथि प्रो. बलराज चौहान जी ने विद्यार्थियों को बताया कि भारतीय संविधान एक जीवित दस्तावेज है जिसमे अब तक 106 संशोधन किए जा चुके है। उन्होंने केशवानंद भारती, मेनका गाँधी, ए. डी. एम. जबलपुर, विशाखा, पुट्टा स्वामी वादों जिक्र करते हुए न्यायिक सक्रियता को स्पष्ट किया। आज की पीढ़ी के ऊपर जिम्मेदारी है कि हम देश को ऐसा बनाकर छोड़े कि हमारी आनेवाली पीढ़ियों को सुख मिले, वो हमारे विरासत पर गर्व महसूस करे।
मुख्य वक्ता डॉ. प्रमोद तिवारी ने बताया कि हमारा समाजवाद कोई उधार का प्रयोग नहीं है यह हमारे देश में सदियों से विकसित हुआ है हमने जिन मूल्यों को सदियों से संजोया उसको संविधान में रखा गया है, यह समझने की जरूरत है। हम अमेरिका के संविधान से बहुत आगे हैं संविधान में जो चित्र है उसमें भी हमारे लिए नियम और सिद्धांत लिखे हैं।

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ये कहना गलत है कि हमने संविधान के प्रावधानों को दूसरे देशों से लिया। ठीक से अध्ययन करने पर हमको ये कानून प्राचीन काल के भारत में दिखाई देता है। प्रो. वी. के. सिंह ने बताया कि संविधान भारतीयों की आकांक्षाओं का दर्पण है संविधान दिवस बंद कमरों में भी नहीं मनाया जाना चाहिए बल्कि जनता में उसकी खुली चर्चा होनी चाहिए। उन्होंने भारतीय संविधान के 22 भागों की प्रथम पृष्ठ पर अंकित चित्रों के आधार पर मूल भारतीय भावना के अनुरूप संविधान दिवस की महत्ता पर प्रकाश डाला। सेंट्रल बार एसो. शाहजहांपुर के वर्तमान अध्यक्ष एड. नारायण दत्त त्रिपाठी ने भारतीय संविधान की प्रस्तावना का शपथ दिलाया। सी.बी. सिंह लॉ कॉलेज. अंबेडकर नगर द्वारा आयोजित राष्ट्रीय मूट कोर्ट प्रतियोगिता में द्वितीय स्थान प्राप्त करने वाली महाविद्यालय टीम (वंशदीप सिँह, अखिलेश कुमार वर्मा, अभिषेक पाल) को अतिथियों द्वारा सम्मानित किया गया। डॉ. अनुराग अग्रवाल के द्वारा कार्यक्रम संचालन किया गया। विधि महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. जयशंकर ओझा ने अतिथियों के प्रति आभार ज्ञापित किया। महाविद्यालय के प्राध्यापक डॉ. अनिल कुमार शाह, डॉ. पवन कुमार गुप्ता, डॉ. अमित कुमार यादव, डॉ. दीप्ति गंगवार, श्रीमती रंजना खंडेलवाल, डॉ प्रेम सागर, श्री विजय सिंह, श्री प्रदीप कुमार सिंह, श्री अशोक कुमार डॉ. अमरेंद्र सिँह एवं विद्यार्थियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही ।

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