स्वामी शुकदेवानंद कॉलेज के हिंदी विभाग की ओर से दिवसीय व्याख्यान हुआ

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शाहजहांपुर।।स्वामी शुकदेवानंद कॉलेज शाहजहांपुर के हिंदी विभाग द्वारा एक दिवसीय व्याख्यान का आयोजन ‘‘हिंदी साहित्य पर बाजार का प्रभाव’’ विषय पर किया गया। व्याख्यान का आरंभ मां सरस्वती की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर किया गया। कार्यक्रम अध्यक्ष स्वामी चिन्मयानंद सरस्वती जी महाराज ने कहा कि- आज बाजारवादी दौर में हम सब प्रभावित है। बाजार में सब कुछ मिलता , बिकता है। क्या आपने कभी सोंचा है कि बाजारवाद किस तरीके से हमारा इस्तेमाल कर रहा है? किस तरह से बाजारवाद हमारे और हमारी भाषा के बल पर ही फल-फूल रहा है? आज भारत के युवा देश दुनिया में अपना परचम लहरा रहे हैं। उसके पीछे हमारी अपनी भाषा है। हिंदी साहित्य ,संस्कृति और संवेदना की भाषा है। उन्होंने कबीर की कुछ पंक्तियों का उल्लेख करते हुए कहा कि-पोथी पढ़ि पढ़ि जग मुआ -पंडित भया न कोय। ढाई आखर प्रेम का पढ़े सो पंडित होय। बाजारवादी दौर में यदि कोई प्रेम का पाठ पढ़ा रहा है तो वह है हिंदी और हिन्दी का सच्चा सपूत कबीर। वह आगे कहते हैं कि कबीर केवल प्रेम की ही भाषा नहीं बोलते वह तो हांथ में लुकाठी रखने की भी बात करते हैं-कबिरा खड़ा बाजार में लिए लुकाठी हाथ। जो घर जारे आपना चले हमारे साथ। मुख्य अतिथि डॉक्टर शैलेंद्र ‘कबीर‘ ने कहा कि- आज पूरी दुनिया एक बाजार है। बाजार में वही बिकता है जो दिखता है। आज देश और दुनिया में हिंदी और हिंदुस्तानियों का परचम लहरा रहा है। हर क्षेत्र में भारतीयों का दबदबा है।

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दुनिया भारतीय ज्ञान-विज्ञान की मुरीद है। हमारे ज्ञान-विज्ञान और प्रबंधन से आकर्षित होकर तमाम देशों के विश्वविद्यालय में हिंदी पर अनेकानेक शोध हो चुके हैं , हो रहे हैं। जो इस बात का प्रमाण है कि हिंदुस्तान के ज्ञान विज्ञान को जानने के लिए उसकी भाषा हिंदी को जानना आवश्यक है। बाजार विज्ञापन के दम पर चलता है और विज्ञापन प्रकाशित करवाने वाले लोग यह भली भांति जानते हैं कि दुनिया की तीसरी सर्वाधिक बोली और समझी जाने वाली भाषा हिंदी है। जो बाजार के लिए एक खुला मंच है। अगर हिंदी भाषा में हम अपना विज्ञापन प्रकाशित करेंगे तो निश्चित ही हम दुनिया की एक बड़ी आबादी तक अपनी बाजार का विस्तार कर सकेंगे। यह तथ्य इस बात का प्रमाण है कि हिंदी ने बड़ी-बड़ी कंपनियों को अपनी ताकत से रूबरू कराया है । जिससे स्पस्ट होता है कि आज पूरे विश्व बाजार पर हिन्दी का बड़ा ही प्रभाव है। विशिष्ट वक्ता राजेंद्र प्रसाद डिग्री कॉलेज मीरगंज से पधारे डॉक्टर नागेश पांडे ‘संजय‘ ने कहा कि हिंदी को आत्मसात करते हुए कबीर, तुलसी, सूर, निराला ने हिंदी से बहुत कुछ लिया और हिंदी को बहुत कुछ दिया, उन्होंने कहा कि बाजार पर हिंदी का प्रभाव जो पड़ना चाहिए वह ना के बराबर है लेकिन हिंदी का बाजार पर जो प्रभाव पड़ सकता है । वह आज के विज्ञापनों में साफ दिखता है। कविता हृदय से निकलती है और हृदय तक जाती है। संवेदनाओं का हामिद अब बूड़ी दादी के लिए चिमटा नहीं लाता। आज बाजारवाद के दौर में लोग संवेदनहीन होते चले जा रहे हैं इस संवेदनहीनता को दूर करने के लिए हमें साहित्य की दुनिया में पुनः वापस आना पड़ेगा। विशिष्ट वक्ता डॉक्टर प्रशांत अग्निहोत्री ने व्याख्यान देते हुए कहा कि हिंदी हमारे हृदय की भाषा है और हृदय की भाषा कभी किसी का अहित नहीं करती। बाजारवाद के दौर में हमारी हिंदी देश विदेश में आज भी स्वार्थ के विरोध में खड़ी हुई प्रेम, संवेदना ,सौहार्द और सामाजिकता की पूर्ति पूरी तन्मयता से कर रही है। इसलिए हम सब हिंदी भाषियों को अपनी हिंदी पर गर्व करना चाहिए। स्वागत भाषण काॅलेज के प्राचार्य प्रो0 आर0के0 आजाद के द्वारा दिया गया। आभार हिंदी विभागाध्यक्ष प्रोफेसर आलोक मिश्रा ने व्यक्त किया। कार्यक्रम का सफल संचालन डाॅ0 श्रीकांत मिश्र ने किया। कार्यक्रम में प्रो. आदित्य कुमार सिंह प्रो शालीन कुमार सिंह , डॉक्टर विकास खुराना, डॉक्टर शिशिर शुक्ला, प्रो मधुकर श्याम शुक्ला डॉक्टर आदर्श पांडे, डॉक्टर कविता भटनागर ,डॉक्टर प्रतिभा सक्सेना ,डॉक्टर अर्चना गर्ग ,डॉ मनोज मिश्रा , डॉक्टर अंजूलता अग्निहोत्री डॉक्टर सुजीत वर्मा ,डॉक्टर मृदुल पटेल ,डा.दुर्ग विजय ,डॉक्टर राजीव कुमार ,डॉक्टर संदीप वर्मा ,कु.रश्मि राठौर, डॉक्टर बलवीर ,बागीश, रवि, शोभित, संजय कुमार आदर्श शुक्ला का विशेष सहयोग रहा।

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