बदायूं। अखिल भारतीय सनातन धर्म कल्याण सभा के तत्वावधान में आयोजित 14 दिवसीय दिव्य सनातन दीप महायज्ञ के चौथे दिन कोठीवाल मंदिर में श्रद्धा एवं भक्तिभाव के साथ दीप प्रज्ज्वलन कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस अवसर पर उपस्थित श्रद्धालुओं ने दीप प्रज्ज्वलित कर सनातन संस्कृति, एकता, सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक चेतना को जागृत करने का संकल्प लिया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए आचार्य मुमुक्षु कृष्ण जी ने कहा कि यह दीप महायज्ञ केवल दीप जलाने का अनुष्ठान नहीं, बल्कि समाज में सोई हुई चेतना, संस्कृति और स्वाभिमान को जागृत करने का महाअभियान है। आज के आधुनिक और भौतिकवादी दौर में जहां तकनीक ने दुनिया को करीब ला दिया है, वहीं मानवीय संवेदनाओं और मानसिक शांति में कमी महसूस की जा रही है। युवा पीढ़ी भी मानसिक भटकाव और अपनी सांस्कृतिक जड़ों से दूर होने की चुनौती का सामना कर रही है।
उन्होंने कहा कि ऐसी परिस्थितियों में सनातन धर्म के संस्कार ही समाज को संयम, सेवा, सद्भाव और मानसिक शांति का मार्ग दिखा सकते हैं। सनातन धर्म केवल पूजा-पद्धति नहीं, बल्कि संपूर्ण मानवता को एक परिवार मानने वाली जीवनशैली है। इसका मूल मंत्र ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ आज भी पूरी दुनिया को एकता और भाईचारे का संदेश देता है। युवा पीढ़ी को संस्कारवान एवं सही दिशा देने के लिए सनातन मूल्यों को जीवन में अपनाना आवश्यक है।
इस अवसर पर राहुल कुमार चौबे , पंकज शर्मा, हरिओम रस्तोगी, पवन शंखधार, शिवशंकर महेरे, मृगांक मिश्रा, दिनेश चन्द्र मिश्र, राजीव रस्तोगी, अनुपम शर्मा, रिदम पाराशरी, श्रेष्ठ पाराशरी, मारुत सक्सेना, शशांक रायजादा सहित अनेक श्रद्धालु एवं गणमान्य लोग उपस्थित रहे।कोठीवाल मंदिर में चौथे दिन हुआ दिव्य सनातन दीप महायज्ञ, सनातन संस्कारों से युवा पीढ़ी को दिशा देने का आह्वान
बदायूं। अखिल भारतीय सनातन धर्म कल्याण सभा, बदायूं के तत्वावधान में आयोजित 14 दिवसीय दिव्य सनातन दीप महायज्ञ के चौथे दिन कोठीवाल मंदिर में श्रद्धा एवं भक्तिभाव के साथ दीप प्रज्ज्वलन कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस अवसर पर उपस्थित श्रद्धालुओं ने दीप प्रज्ज्वलित कर सनातन संस्कृति, एकता, सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक चेतना को जागृत करने का संकल्प लिया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए आचार्य मुमुक्षु कृष्ण जी ने कहा कि यह दीप महायज्ञ केवल दीप जलाने का अनुष्ठान नहीं, बल्कि समाज में सोई हुई चेतना, संस्कृति और स्वाभिमान को जागृत करने का महाअभियान है। आज के आधुनिक और भौतिकवादी दौर में जहां तकनीक ने दुनिया को करीब ला दिया है, वहीं मानवीय संवेदनाओं और मानसिक शांति में कमी महसूस की जा रही है। युवा पीढ़ी भी मानसिक भटकाव और अपनी सांस्कृतिक जड़ों से दूर होने की चुनौती का सामना कर रही है।
उन्होंने कहा कि ऐसी परिस्थितियों में सनातन धर्म के संस्कार ही समाज को संयम, सेवा, सद्भाव और मानसिक शांति का मार्ग दिखा सकते हैं। सनातन धर्म केवल पूजा-पद्धति नहीं, बल्कि संपूर्ण मानवता को एक परिवार मानने वाली जीवनशैली है। इसका मूल मंत्र ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ आज भी पूरी दुनिया को एकता और भाईचारे का संदेश देता है। युवा पीढ़ी को संस्कारवान एवं सही दिशा देने के लिए सनातन मूल्यों को जीवन में अपनाना आवश्यक है।
इस अवसर पर राहुल कुमार चौबे , पंकज शर्मा, हरिओम रस्तोगी, पवन शंखधार, शिवशंकर महेरे, मृगांक मिश्रा, दिनेश चन्द्र मिश्र, राजीव रस्तोगी, अनुपम शर्मा, रिदम पाराशरी, श्रेष्ठ पाराशरी, मारुत सक्सेना, शशांक रायजादा सहित अनेक श्रद्धालु एवं गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
कोठीवाल मंदिर में चौथे दिन हुआ दिव्य सनातन दीप महायज्ञ, सनातन संस्कारों से युवा पीढ़ी को दिशा देने का आह्वान

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