बदायूं: पांच वर्ष से कम आयु के बच्चे टीबी के लक्षण होने पर स्वयं बलगम नहीं निकाल पाते हैं। ऐसे बच्चों में टीबी की पुष्टि के लिए जांच के नमूने लेने की प्रक्रिया के बारे में वीडियो के माध्यम से जानकारी देने के साथ ही सीएचसी एवं पीएचसी से आए चिकित्सा अधिकारियों को टीबी के लक्षण वाले बच्चों को अधिक से अधिक रेफर करने तथा आवश्यक नमूने लेकर जांच कराने के लिए प्रशिक्षित किया गया, ताकि कोई भी टीबी ग्रसित बच्चा उपचार से वंचित न रहे। जनपद में बच्चों में क्षय रोग (टीबी) की शीघ्र पहचान, समयबद्ध जांच एवं उपचार सुनिश्चित करने के उद्देश्य से वर्ल्ड हेल्थ पार्टनर्स द्वारा स्टेट टीबी सेल के समन्वय से मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय के एनएचएम सभागार में बुधवार को दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने सभी संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों से अधिक मेहनत एवं समन्वय के साथ कार्य का आह्वान किया। प्रशिक्षण के प्रथम दिवस विभिन्न विभागों के साथ समन्वय स्थापित करने पर भी चर्चा की गई। बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग के माध्यम से सैम एवं मैम श्रेणी के बच्चों को चिह्नित कर उनमें टीबी के लक्षणों की पहचान करने की प्रक्रिया बताई गई। इसके साथ ही राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के अंतर्गत जनपद में कार्यरत लगभग 120 चिकित्सकों को ऑनलाइन प्रशिक्षण देकर विद्यालयों में छोटे बच्चों में टीबी के लक्षणों की पहचान एवं उन्हें सीएचसी/पीएचसी पर रेफर करने के संबंध में जानकारी दी गई। जनपद के दो बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. नवनीत एवं डॉ. अमित रस्तोगी को डिस्ट्रिक्ट ट्रेनर के रूप में प्रशिक्षित किया गया है, जिनके द्वारा भी प्रशिक्षण प्रदान किया गया। जिला क्षय रोग अधिकारी ने जनपद में क्षय रोगियों की स्थिति, टीबी के लक्षण, जांच, उपचार एवं बचाव के उपायों के बारे में विस्तार से जानकारी दी।