बदायूं। सरकारी नौकरी दिलाने और स्पोर्ट्स कॉलेज में दाखिला कराने के नाम पर फर्जीवाड़े का बड़ा मामला सामने आया है। बिसौली कोतवाली क्षेत्र के एक व्यक्ति पर करीब 15 से 18 लोगों से लगभग 20 लाख रुपये की ठगी करने का आरोप लगा है। आरोपी खुद को जिला समन्वयक (कोऑर्डिनेटर) अधिकारी बताकर खेल मंत्री, एसएसपी और कई बड़े नेताओं व अधिकारियों से करीबी संबंध होने की धौंस देता था। आरोप है कि उसने लोगों का विश्वास जीतने के लिए फर्जी नियुक्ति पत्र तक जारी कर दिए और कई युवाओं से अमरोहा, बरेली, डोरीलाल स्टेडियम तथा बगरेन स्टेडियम में करीब चार महीने तक काम भी कराया। वेतन नहीं मिलने पर जब पीड़ितों ने जानकारी की तो पूरे फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ। बिसौली कोतवाली क्षेत्र के ग्राम विधानगला निवासी दानसिंह पुत्र भूपाल सिंह ने पुलिस को शिकायती पत्र देकर आरोपी शिशुपाल पुत्र हरीश चंद्र पाली निवासी परसिया के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। शिकायतकर्ता के अनुसार, आरोपी वर्ष 2023 से नौकरी और दाखिले का झांसा देकर लोगों से ऑनलाइन और नकद रकम वसूल रहा था। उसने कोच, स्टाफ नर्स, चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी की नौकरी और स्पोर्ट्स कॉलेज में प्रवेश दिलाने का भरोसा दिया था।
फर्जी नियुक्ति पत्र देकर चार महीने कराया काम
दानसिंह का आरोप है कि आरोपी ने खेल मंत्री से पारिवारिक संबंध होने की बात कहकर भरोसा दिलाया। इसके बाद कुछ लोगों को नियुक्ति पत्र देकर अलग-अलग स्टेडियम में ड्यूटी करने भेज दिया। चार महीने तक काम कराने के बावजूद जब वेतन नहीं मिला तो आरोपी बहाने बनाने लगा। पीड़ितों को तब पता चला कि उनके हाथ में दिए गए नियुक्ति पत्र फर्जी हैं। सवाल यह भी है कि आखिर स्टेडियमों में चार महीने तक कथित फर्जी कर्मचारी किसके निर्देश पर काम करते रहे और संबंधित अधिकारियों को इसकी जानकारी क्यों नहीं हुई?
कोच की नौकरी के 1.20 लाख, नर्स के 3.50 लाख
शिकायत में सौरभ कुमार निवासी मौसमपुर, मुरादाबाद से स्पोर्ट्स कोच की नौकरी के नाम पर 1.20 लाख, श्वेता पत्नी दानसिंह से स्टाफ नर्स की नौकरी के नाम पर 3.50 लाख और दानसिंह से कोच पद के लिए 1.60 लाख रुपये लेने का आरोप है। उमेश कुमार निवासी एचोरा, रामपुर से उनके 14 वर्षीय बेटे तरुण का गुरु गोविंद सिंह स्पोर्ट्स कॉलेज, लखनऊ में कक्षा छह में दाखिला कराने के नाम पर 3 लाख रुपये लिए गए। इसमें 2.50 लाख ऑनलाइन और 50 हजार रुपये नकद दिए गए। इसके अलावा पुष्पाल निवासी सदुल्लापुर भितारा, बिनावर से 1.50 लाख और वीरेंद्र निवासी रेहगांव, आंवला, बरेली से चतुर्थ श्रेणी की नौकरी के नाम पर 1.20 लाख रुपये लेने का आरोप लगाया गया है।
अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में लाने की मांग
पीड़ितों का सवाल है कि आरोपी यदि खेल मंत्री और पुलिस अधिकारियों से करीबी संबंधों का हवाला देकर लोगों को ठगता रहा तो इसकी गंभीरता से जांच क्यों नहीं हुई? मुख्यमंत्री पोर्टल पर शिकायत किए जाने के बाद भी कार्रवाई में देरी के आरोप लगाए गए हैं। पीड़ितों ने पुलिस से निष्पक्ष जांच, आरोपी के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई और ठगी गई रकम वापस दिलाने की मांग की है। अब देखना यह है कि पुलिस केवल आरोपी के खिलाफ कार्रवाई तक सीमित रहती है या फिर फर्जी नियुक्तियों के जरिए स्टेडियमों में चार महीने तक काम कराने के पूरे नेटवर्क और संबंधित विभागों की भूमिका की भी जांच करती है।


























































































