बदायूं। गिन्दो देवी महिला महाविद्यालय में 20 एवं 21 नवंबर को आयोजित होने वाली भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएसएसआर) प्रायोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी के उपलक्ष्य में सोमवार को विशेष जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। प्राचार्या प्रोफेसर इंदु शर्मा के निर्देशन में आयोजित इस कार्यक्रम में महाविद्यालय की छात्राओं एवं शिक्षिकाओं ने उत्साहपूर्वक प्रतिभाग किया। राष्ट्रीय संगोष्ठी का मुख्य विषय ‘भारत में कृत्रिम बुद्धिमत्ता और समाज : सामाजिक परिवर्तन, नैतिक मुद्दे, अत्यधिक निर्भरता एवं नीतिगत नियमन’ निर्धारित किया गया है। जागरूकता कार्यक्रम का उद्देश्य छात्राओं एवं शिक्षिकाओं को कृत्रिम बुद्धिमत्ता के बढ़ते प्रभाव, उपयोगिता, लाभ और चुनौतियों से परिचित कराना रहा। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ. जीवन कुमार ने छात्राओं एवं शिक्षिकाओं को संबोधित करते हुए कृत्रिम बुद्धिमत्ता की कार्यप्रणाली की विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह आधुनिक तकनीक किस प्रकार कार्य करती है तथा दैनिक जीवन, शिक्षा और विभिन्न क्षेत्रों में किस तरह उपयोगी साबित हो रही है। उन्होंने इसके व्यावहारिक उपयोगों के उदाहरण देकर छात्राओं को तकनीक की नई संभावनाओं से परिचित कराया। इसके पश्चात डॉ. सरला चक्रवर्ती ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता के शैक्षिक एवं सामाजिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए छात्राओं को तकनीक का उपयोग अपनी रचनात्मकता और तार्किक क्षमता के विकास के लिए करने के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के जिम्मेदार एवं नैतिक उपयोग, व्यक्तिगत आंकड़ों की सुरक्षा तथा तकनीक पर अत्यधिक निर्भरता से उत्पन्न होने वाली चुनौतियों पर भी विस्तार से चर्चा की गई। वक्ताओं ने छात्राओं को तकनीक का विवेकपूर्ण उपयोग करने और इसके सकारात्मक पहलुओं को अपनाने के लिए जागरूक किया। महाविद्यालय की ओर से आयोजित यह पहल आगामी राष्ट्रीय संगोष्ठी की तैयारियों की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हुई। कार्यक्रम के अंत में संगोष्ठी की संयोजिका डॉ. इति अधिकारी ने सभी प्रतिभागी छात्राओं, शिक्षिकाओं एवं सहयोगियों के प्रति महाविद्यालय की ओर से आभार व्यक्त किया।
गिन्दो देवी महिला महाविद्यालय में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के उपयोग और चुनौतियों से रूबरू हुईं छात्राएं

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