बरेली। अदालत में मुकदमों की पैरवी कर रहे वादकारियों (मुकदमों के पक्षकारों) और अधिवक्ताओं के लिए एक बेहद राहत भरी खबर है। अब न्यायालय के नकल विभाग से मुकदमों की ‘ऑर्डर शीट’ (आदेश पत्र) की नकल निकलवाने के लिए प्रति ऑर्डर शीट अतिरिक्त टिकट नहीं लगाना होगा। अब अधिवक्ताओं व वादकारियों को केवल प्रति पेज फोटोकॉपी का निर्धारित शुल्क ही देना होगा।
इस व्यवस्था को लागू कराने में बरेली बार के वरिष्ठ अधिवक्ता शंकर कुमार सक्सेना का विशेष और महत्वपूर्ण योगदान रहा है, जिन्होंने पूरे मामले को बारीकी से देखा और निरन्तर लगे रहे । क्या था पूरा मामला? पूर्व में नकल विभाग द्वारा हर एक ऑर्डर शीट पर अलग से अतिरिक्त टिकट (फोलियो) की मांग की जाती थी, जिससे वादकारियों पर बेवजह आर्थिक बोझ पड़ता था और स्थिति स्पष्ट न होने के कारण अधिवक्ताओं को भी काफी जटिलताओं का सामना करना पड़ता था। बरेली बार एसोसिएशन के अध्यक्ष मनोज हरित ने अधिवक्ता शंकर कुमार सक्सेना से ऑर्डर शीट पर लगने वाले टिकट की इस कानूनी उलझन का हल निकालने का अनुरोध किया था, ताकि वादकारियों और अधिवक्ताओं की स्थिति स्पष्ट हो सके।
22 ऑर्डर शीट की नकल पर उठा कानूनी सवाल
मामले के समाधान के लिए अधिवक्ता शंकर कुमार सक्सेना ने 22 ऑर्डर शीटों की नकल के लिए आवेदन किया। नकल विभाग द्वारा जब प्रति ऑर्डर शीट अतिरिक्त टिकट की मांग की गई, तो उन्होंने अतिरिक्त टिकट लगाने से साफ इनकार कर दिया और नियमानुसार केवल प्रति पेज फोटोकॉपी शुल्क लेने का आग्रह किया।
विवाद बढ़ने पर यह प्रकरण नकल विभाग के इंचार्ज (ADJ-5) के समक्ष पहुंचा।
कोर्ट में प्रस्तुत किए गए ये ठोस कानूनी साक्ष्य:
अधिवक्ता शंकर कुमार सक्सेना ने एडीजे-5 की अदालत में नकल विभाग के नियमविरुद्ध रवैये के खिलाफ सशक्त कानूनी तर्क व साक्ष्य रखे:
उत्तर प्रदेश सरकार का गजट
जिसमें ऑर्डर शीट की नकल जारी करने के लिए अलग क्लॉज की व्यवस्था दी गई है और मल्टीपल (अतिरिक्त) टिकट लगाने की सख्त मनाही है। रेवेन्यू मैनुअल की विभिन्न धाराओं का हवाला देते हुए ऑर्डर शीट की नकल पर लगने वाले टिकट की वास्तविक कानूनी दरें स्पष्ट कीं।
हाईकोर्ट के उस महत्वपूर्ण फैसले को पेश किया, जिसमें प्रति ऑर्डर शीट के हिसाब से वसूले गए अतिरिक्त टिकटों को वापस कराने का आदेश दिया गया था। कई दिनों तक नकल विभाग इंचार्ज (ADJ-5) के समक्ष चली गहन कानूनी चर्चा और प्रस्तुत साक्ष्यों के अवलोकन के बाद कोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया। कोर्ट ने आदेश दिया कि प्रति ऑर्डर शीट अतिरिक्त फोलियो/टिकट नहीं लगाया जाएगा, केवल प्रति पेज फोटोकॉपी का शुल्क ही लिया जाएगा। कोर्ट के इस आदेश के बाद अधिवक्ता शंकर कुमार सक्सेना को उनकी 22 ऑर्डर शीटों की नकल केवल एक ही फोलियो और एक ही टिकट पर जारी कर दी गई। इस ऐतिहासिक पहल से अब बरेली न्यायालय के हजारों अधिवक्ताओं और लाखों वादकारियों को सीधा आर्थिक लाभ मिलेगा। उल्लेखनीय है कि इससे पहले भी अधिवक्ता शंकर कुमार सक्सेना ने रिपोर्ट/आख्या की नकल जारी करवाने की जटिल समस्या का सफल समाधान कराया था। इस उपलब्धि पर साथी वकीलों और वादकारियों ने उनका आभार व्यक्त किया है।


























































































