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बच्चों को भी इंटरनेट इस्तेमाल करने का मौलिक अधिकार, पूरी तरह रोकना गलत : सुप्रीम कोर्ट

October 18, 2026By admin0 comments
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नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने बच्चों के इंटरनेट इस्तेमाल को लेकर एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा है कि इंटरनेट तक पहुंच और उसका उपयोग प्रत्येक व्यक्ति का मौलिक अधिकार है। बच्चों को भी उनकी उम्र की परवाह किए बिना यह अधिकार प्राप्त है। अदालत ने स्पष्ट किया कि ऑनलाइन सुरक्षा के नाम पर बच्चों के इंटरनेट इस्तेमाल पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाना उचित नहीं है। बच्चों की सुरक्षा और उनकी आजादी एक-दूसरे के खिलाफ नहीं, बल्कि दोनों को साथ लेकर चलना जरूरी है। यह फैसला 15 अक्टूबर 2026 को न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और न्यायमूर्ति के. विनोद चंद्रन की पीठ ने सुनाया।

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संविधान के अनुच्छेद 21 और 19(1)(ए) का दिया हवाला:

अदालत ने कहा कि इंटरनेट तक पहुंच और उसका इस्तेमाल संविधान के अनुच्छेद 21 तथा अनुच्छेद 19(1)(ए) के तहत मौलिक अधिकारों से जुड़ा है। इंटरनेट बच्चों के लिए शिक्षा, जानकारी हासिल करने और विचारों की अभिव्यक्ति का महत्वपूर्ण माध्यम है। खासकर दूरदराज के इलाकों में रहने वाले बच्चों के लिए यह सीखने और जानकारी प्राप्त करने का प्रमुख साधन हो सकता है। इसलिए बच्चों को इंटरनेट से पूरी तरह दूर कर देना उनकी स्वतंत्रता और विकास के अवसरों को प्रभावित कर सकता है।

बच्चों को नहीं, हानिकारक सामग्री फैलाने वालों को रोकना जरूरी:

सुप्रीम कोर्ट ने ऑनलाइन बाल यौन शोषण और दुर्व्यवहार से जुड़ी सामग्री पर गंभीर चिंता जताई। अदालत के मुताबिक, ऐसी सामग्री बनाने, प्रसारित करने और उपलब्ध कराने वालों के साथ-साथ उसे हटाने में विफल रहने वाले डिजिटल प्लेटफॉर्मों की जवाबदेही तय होनी चाहिए। केवल बच्चों के इंटरनेट इस्तेमाल पर रोक लगा देना समस्या का समाधान नहीं है। अदालत ने केंद्र सरकार को ऐसी सामग्री की पहचान और उसे हटाने के लिए प्रभावी व्यवस्था, तकनीकी उपाय, राष्ट्रीय डेटाबेस तथा आवश्यक दिशा-निर्देश तैयार करने की दिशा में कदम उठाने को कहा है।

चाइल्ड मोड, अभिभावकों की निगरानी और डिजिटल जागरूकता पर जोर:

अदालत ने स्पष्ट किया कि बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा के लिए उम्र के अनुरूप उचित प्रतिबंध और सुरक्षा उपाय लागू किए जा सकते हैं। इनमें बच्चों के सोशल मीडिया अकाउंट डिफॉल्ट रूप से निजी रखना, अनजान वयस्कों के संदेशों और संपर्कों पर नियंत्रण तथा बच्चों को दिखाई जाने वाली सामग्री की निगरानी जैसे उपाय शामिल हो सकते हैं। साथ ही, बच्चों को डिजिटल सुरक्षा, निजता और ऑनलाइन शोषण के खतरों के बारे में जागरूक करने की जरूरत बताई गई। केंद्र सरकार को संबंधित दिशा-निर्देश और मानक संचालन प्रक्रिया तैयार करने तथा आवश्यक कानूनी बदलावों पर विचार करने के निर्देश दिए गए हैं। मामले में आगे की सुनवाई 10 दिसंबर 2026 को निर्धारित की गई है।

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