बदायूं। लोकतंत्र में पत्रकारिता का दायित्व केवल खबरें दिखाना ही नहीं, बल्कि जनहित के मुद्दों को सामने लाना और सत्ता-व्यवस्था को जवाबदेह बनाना भी है। लेकिन जब पत्रकारों की गिरफ्तारी को लेकर सवाल उठने लगें, तो यह मामला अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और निष्पक्ष पत्रकारिता की सुरक्षा से जुड़ जाता है। हिंदी खबर एवं लिविंग इंडिया चैनल के प्रमुख संपादक अतुल अग्रवाल समेत तीन पत्रकारों की हरियाणा पुलिस द्वारा गिरफ्तारी के विरोध में बदायूं के पत्रकारों में आक्रोश देखने को मिला। नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (एनयूजे), उत्तर प्रदेश की बदायूं इकाई ने प्रधानमंत्री को संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारी कार्यालय में जिला राजस्व अधिकारी को सौंपकर मामले की निष्पक्ष जांच और गिरफ्तार पत्रकारों की तत्काल रिहाई की मांग की। पत्रकारों ने कहा कि एक ओर केंद्र सरकार नशा मुक्त भारत अभियान के माध्यम से समाज को नशे की बुराई से मुक्त करने का संकल्प व्यक्त कर रही है, वहीं दूसरी ओर नशे के विरुद्ध अभियान चलाने वाले मीडिया संस्थानों के प्रमुख संपादक और पत्रकारों की गिरफ्तारी गंभीर सवाल खड़े करती है। ज्ञापन में हिंदी खबर टीवी चैनल के प्रमुख संपादक एवं वरिष्ठ पत्रकार अतुल अग्रवाल की नोएडा स्थित आवास से गिरफ्तारी का विरोध किया गया। पत्रकारों का कहना है कि लोकतंत्र की मजबूती के लिए स्वतंत्र और निर्भीक पत्रकारिता बेहद जरूरी है। यदि पत्रकारों को उनके कार्य के दौरान भय और दबाव का सामना करना पड़ेगा, तो इसका असर जनहित से जुड़े मुद्दों को सामने लाने पर भी पड़ सकता है। एनयूजे की बदायूं इकाई ने प्रधानमंत्री के नाम सौंपे ज्ञापन में मांग की कि पत्रकारों की गिरफ्तारी से जुड़े पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराई जाए। गिरफ्तार संपादकों एवं पत्रकारों को तत्काल रिहा किया जाए तथा पत्रकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए केंद्र सरकार आवश्यक कदम उठाए। पत्रकारों ने कहा कि मीडिया लोकतंत्र का चौथा स्तंभ है। उसकी स्वतंत्रता की रक्षा करना लोकतांत्रिक व्यवस्था की जिम्मेदारी है। पत्रकारों को बिना किसी भय, दबाव या प्रतिशोध के निष्पक्ष पत्रकारिता करने का अवसर मिलना चाहिए। यदि किसी पत्रकार के खिलाफ कोई कानूनी मामला है, तो उसका निस्तारण निष्पक्ष जांच और कानून के निर्धारित प्रावधानों के अनुसार होना चाहिए।
ज्ञापन के माध्यम से पत्रकारों ने केंद्र सरकार से मामले में हस्तक्षेप करने, पत्रकारों की सुरक्षा के लिए प्रभावी कदम उठाने और मीडिया की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने की मांग की। उनका कहना है कि पत्रकारिता की आवाज को दबाने के बजाय तथ्यों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए, ताकि लोकतांत्रिक संस्थाओं और कानून-व्यवस्था पर जनता का भरोसा कायम रह सके।
ये पत्रकार रहे मौजूद
प्रधानमंत्री को संबोधित ज्ञापन सौंपने वालों में नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स के पत्रकार शैलेन्द्र शुक्ला, सचिन भारद्वाज, विवेक खुराना, सुमित श्रीवास्तव, भारत शर्मा, विजय श्रीवास्तव, अतुल शर्मा, संदीप गुप्ता सहित अन्य पत्रकार शामिल रहे।गिरफ्तार पत्रकारों के मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए।
गिरफ्तार संपादकों एवं पत्रकारों की तत्काल रिहाई सुनिश्चित की जाए।
पत्रकारों की सुरक्षा के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएं।
मीडिया को निर्भीक, निष्पक्ष और स्वतंत्र पत्रकारिता का वातावरण उपलब्ध कराया जाए।
पत्रकारों की गिरफ्तारी के विरोध में एनयूजे ने सौंपा ज्ञापन, निष्पक्ष जांच और रिहाई की मांग

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